adcode

Saturday, 5 August 2017

स्वदेशी अपनाए देश सेवा मे अपना योगदान बढाए

भारत ओर चीन के बीच तनातनी के चलते देश मे अलग-अलग संस्थअो द्वारा चीनी समान का बहिषकार करने कि लोगो से  अपील कि जा रही है लेकिन इसी बीच कुछ लोग एसे भी है| जो यह कहते है सरकार अाधिकारिक तौर पे  यह काम कयो नही करती? ओर अपने अाप को कथित देशभक्त साबित कर एसे अांदलनो के रास्ते रोडे का काम करते है| एसे लोगो को देश से कोई मतलब नही केवल सरकार को घेरने का मौका चाहिए क्योंकि यह जानते है कि एसा करना लगभग असंभव है जिसका कारण है विश्व व्यापार संधि जिसके तहत कोई भी देश अंतराष्ट्रिय व्यापार मे पूर्णता प्रतिबंधित नही लगा सकता तो एसे मे सवाल उठता है कि क्या चीनी समान का बहिषकार का कोई लाभ नही क्या जो लोग संस्थाए एसा कर रहे है उनके प्रयास का कोई मोल नही काफी असमंजस कि स्थिति ओर कई प्रशन उमड रहे होंगे| तो इसका उत्तर कुछ इस प्रकार है जापान मे भी यह अंतराष्ट्रिय संधि लागु होती है लेकिन फिर भी वहां अमेरिका के लोग अपना समान नही बेक सकते जिसमे ऊनकी सरकार इसमे कोई दबाव नही बल्कि वहां के देश के लोगो का अपने देश के प्रति देशे भक्ति का भाव है| दर्शल द्तीय विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिको ने यह ठाना कि अमेरिका कि कोई भी वस्तु का उपयोग नही करेगें बल्कि स्वदेशी समान को ही अपनाएंगे ओर खुद इतने सश्कत होंगे कि दुनिया भर मे हमारा समान बिके परिणाम स्वरुप अमेरिकी कंपनिया जापान से सदैव अार्थिक घाटा हि झेलती है इसी कारण अमेरिकी कंपनियां ना के बराबर हि जपान मे निवेश करती है| जिसका  एक ओर कारण जापानी प्रडक्टस का गुणवत्ता ओर कीमत के मामले अधिक सक्शम होना है होंडा,सुजुकि,पैनासोनिक, यह वो नाम है जिनकी तुती दुनिया भर मे बोलती है| ठीक इसी प्रकार यदि हम नागरिक स्तर पे इस अांदोलन को जापान के लोगो कि तरह प्रेरणा लेेते हुए बढाए तो हम बिना युद्ध लडे ही चीन को परास्त कर सकते हाल ही मे अभी हमारे व्यापारियो ने ओर हमारी बहनो ने राखी के  इस पर्व पर सहयोग से चीन कि एक कंपनी को बीस करोड का घाटा हुुुया है जिसका असर वहं के सरकारी अखबार मे उस व्यापारी ने खीज मे लिखा कि हमे भारत का कुछ करना होगा लेकिन इसे अभी पूरे देश मे प्रभावी बनाना होगा| दोस्तो हर काम सरकार या सेना नही कर सकती बल्कि नागरिको को भी अपने स्तर पर करने होते है| क्योंकि नागरिको से देश बनता है यदि जापान जैसेे देश एसा कर सकते है तो हमे भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए अाखिर हर बार सेना ही लडाई कयो करे? जबकि देश कुछ एसे गद्धार मौजूद है जो सेना कि कार्यवाही का सबूत मांगते है| सेना से सबूत तो सेना तो नागरिको के लिए होती है ओर यदी नागरिक हि अपनी जिम्मेदारियो को ना समझे तो बडी से बडी सेना भी छोटि से छोटि लडाई भी नही जीत सकती इस बात का सबसे बडा उदाहरण है वियतनाम ने जब अमेरिका को युद्ध मे परास्त वहां के लोगो बंदूक से ही अमेरिकी जैट मटियामेठ कर दिये थे| एक-एक शहरी अपनी जान देने के लिए तैयार था गोरिल्ला टैक्टिक्स से इतनी अाधुनिक तकनीकयुक्त सेना को पछाड दिया ओर अपने देश से भगा दिया|

Monday, 31 July 2017

नार्थ कोरिया ओर पाकिसतान दुनिया के लिए बन सकते है गहन संकट

द्क्षिण एशिया मे पाकिस्तान अोेर पूर्व मे नार्थ कोरिया दोनो इस वक्त दुनिया के लिए एक गहरा संकट है| दोनो देशो मे एसे हालात बन रहे है जो दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध या एक बहुत बडे वैशविक संकट कि ओर धकेल सकते है| जहां एक ओर पाकिस्ताम मे तख्तापलट होना ना केवल पाकिस्तान बल्कि भारत के लिए भी  एक बडा खतरा हो सकता है कारण पाकिस्तान मे जब भी तख्तापलट होता है तब वहां कि सेना सत्ताह पे काबिज होने कि कोशिश करती है ओेर अपना प्रभुत्व स्थापित करती है| पाकिस्तान का इतिहास रहा है जब भी वहां तख्तापलट हुअा तब तब भारत से जंग हुई ओर इस समय तो अार्थिक रुप से भी अातंकिस्तान दिवालिया होने के निकट है इसी के साथ पाकिस्तान के परमाणु बम के अातंकियो के हाथ मे जाने का खतरा लगातार बना हुअा है| अातंकिस्तान कि भारत के प्रति द्वेष कि भावना इतनी प्रबल है कि उसके लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जा सकता है यहां तक कि अपने परमाणु तकनीख को दूसरे देशो को बेचने कि कोशिश पहले कर चुका है| अोर विश्व के विद्वानो का तर्क है कि पाकिस्तान अपने अार्थिक संकट के लिए एटम बम कि तकनीक दूसरेे  देशो को बेचने से परेह्ज नही करेगा|वही दूसरी ओर उतर कोरिया लगातार लंबी दूरी तक वार करने वाली मिसाईलों का परीक्षण करने मे लगा हुअा है जिसके चलते रोज अमेरिका से युद्ध कि धमकी देने से बाज नही अाता अभी हाल ही मे जानकारो कि माने तो पाकिस्तान भी नार्थ कोरिया के इन प्रयासो मे उसकी तकनीकी रुप से सहायता कर रहा है| उसने जापान केि सीमा मे अपना मिसाइल परीक्षण किया जिसके जापान सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है| ओर अमेेरिका ने अपना बमवर्षक वाहन जापान ओर उतर कोरिया कि सीमा मे तैनात कर दिए ओर जरुरत पडने पर ठोस कदम उठाने से भी नही चुकेगा वही दूसरी अोर गौर करने वाली बात यह है कि कोरिया हो या अातंकिस्तान इन दोनो को चीन का संरक्षण प्राप्त हो रहा है| उलटा किम जोंग उत्तर कोरिया को समझाने कि बजाय चीन अमेरिका कोई हिदायत दे रहा है उधर अाज ही अास्ट्रेलिया मे विमानो के जरिए अातंकी हमले साजिश नाकाम कि ग‌यी है अोर जांच एेजेंसियो को अापरेशन के हैन्डलर्स पाकिस्तान मे मौजूद होने सबूत मिले है| इसे इस बात को बल मिलता है कि अातंकिस्तान मे सेना ओर अातंकियो मे कोई फर्क नही है ओर ना जाने कब पाकिस्तान के एटम बम अातंकियो के हाथ लग जाए अाप देख ही सकते है किस प्रकार गंभीर परिस्थितियां उमड रही है जिसमे 3-6 देश सीधे तरह से सम्मलित है एक कि भी चूक ओर परिणाम विनाशकारी भी हो सकता है एसा मै इसलिए कह रहा हूं जरा अाप लोगे पढेंगे ओेर खोजबीन करेंगे कि द्तीय विश्व युद्ध कैसे शुरु हुअा तो अाप कारण जान अपना सर पिट लिंगे एक जान कि कीमत के बदले सैकडो जानें कुर्बान कर दी गयी|

Friday, 28 July 2017

शीत युद्ध ३.०

डोकलाम विवाद पे जिस प्रकार भारत अोेर चीन के बीच जो जंग चल रही है उसे 21वी सदी का शीत युद्ध कहना ज्यादा सहज होगा| लेकिन अपने पाठको को पहले यह बता दूं कि शीत युद्ध होता क्या है? इसे अाप अंग्रेजी मे "कोल्ड वार" के नाम से भी जानते है सर्वप्रथम यह युद्ध दि्तीय वि्श्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अाज का रुस अोेर अमेरिका के बीच लडा गया था| यह पारस्पारिक युद्ध से अलग होता जिसमे गोला,बारुद या हथियारो का इस्तेमाल नहि होता बल्कि इसे विचारो का युद्ध कहते है जिसमे लेखको को की कल्म देश का मीडिया एक दूसरे के ऊपर रणनीतीक दबाव बनाते है लेकिन अह्म सवाल यह कि यह युद्ध किस बात को लेकर था| तो जैसा कि अाप सभी जानते है कि दि्तीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अोर अमेरिका दो शक्तिशाली देश थे अार्थिक ओर मिलिट्री दोनो ही क्षेत्रो  मे लेकिन यह युद्ध भविष्य के अार्थिक तंत्र को लेकर विश्व मे किस प्रकार के अार्थिक माडल कि दुनिया के दूसरे देश अपनाएंगे एक तरफ था सोशलिस्ट तंत्र जिसकी अगुवाई सोवियत संघ कर रहा था दूसरी तरफ था निजिकरण प्रावेटिस्ट कैपिटल माडल जिसकी अगुवाई अमेरिका कर रहा था सभी अन्य देश पुरा विश्व दो धडो मे बट चुका था| सोशलिस्ट माडल मे सारी पावर सरकारी विभागो के पास होती है सभी सरकारी विभागो के अह्म निर्णय सरकार लेती है जब कि कैपिटलिस्ट माडल मे विभागो का एकिकरण हो जाता लिबिरलाइजेशन,प्राईवेटाईजेशन,ग्लोबलाईजेशन सरल शब्दो निजिकरण,एकिकरण यह माडल अमेरिका का है| इसी विषय पे दोनो देश अामने-सामने अा गये अोर स्थिति युद्ध तक पहुंच गयी कयू्बा छोटे से तटिय देश पर रुस ने अपनी बैलिस्टिक मिसाईलस टेस्टिंग कि जिस प्रकार चीन ने तिब्बत मे युद्ध अभ्यास किया था| जवाब मे अमेरिका ने भी अपना यु्द्ध पोत कैरिबियन सी मे तैनात कर दिया अोर अंतिम चेतावनी दि कि हम फुल स्केल न्युकलियर वार के लिये तैयार है| लेकिन युद्ध को रोकने के प्रयास से अमेरिका ने एक संदेश रुस को भेजा इसे ना केवल दोनो ही देश अपितु पूरी दुनिया तबाह हो जायेगी जिसके चलते सोवियत संघ ने अपने सैनिक वापिस बुला लेिए अौर एक बहुत बडा संकट टल गया| लेकिन सोवियत संघ अपना ज्यादा खर्च सेना ओर हथियारों पे करता था जिसके चलते वहां पे अार्थिक संकट बढता चला गया,बेरोजगारी बढती गयी अोर धीरे-धीरे सोवियत संघ टूट कर कई अलग देशों मे बंट गया जिससे यह साबित हो गया कि अमेरिका का एलपीजी माडल भविष्य के लिए ज्यादा त्रेष्ठ है अब एसी ही स्थिति भूटान के डोकलान क्षेत्र को लेकर जिस पे चीन अपना दावा करता है भारत अोर चीन कि है भारत ओर भूटान का संबध इतना गहरा जिस प्रकार अमेरिका अोर क्यूबा के संबध थे|  जिसके चलते भारत भूटान को कोई अलग देश नही मानता बल्कि भारतीय सेना ही भूटान कि सीमा सुरक्षा करती है भारत ओर भूटान के लोगो कि किसी विजा कि जरुरत नही पडती दोनो देशो के नागरीक किसी राज्य कि तरह यहां से वहां या वहां से यहां अा जा सकते है| इसी कारण भूटान अोर भारत दोनो कि संप्रभुता को बचाने के लि‌ये भारत ने डोकलाम क्षेत्र पर सख्त कदम उठा वहां पे अपनी सेना तैनात कर दी अोर चीन को सडक बनाने से रोक दिया वहां पर सडक बन जाने से ना केवल भूटान बल्कि चीन भारत ,भूटान, सिकिम्म को जोडने वाले सिलिगुडी कारीडोर तक पहुंच जाएगा |चीन का मीडीया भी रोज भारत पे दबाव बनाने के लिए धमकी देता रहता है लेकिन भारत भी पीछे हटने को तैयार नही अपने रुख पे अडिग है अोर साफ कहा हम भी युद्ध के लिए सज है| जिसको देखते हुए अजित डोभाल चीन दौरे पर गये अोेर बातचीत करी जिसमे चीन भी यह कहने को मजबूर हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतॄत्व मे हिंदोस्तान कि विदेश नीती मजबूत हुई है जिसमे साफ पता चलता है कि दोनो देशो के बीच चल रहा यह शीत युद्ध अागे भी एसे ही जारी रहेगा अोेर विचारो कि गोलीबारी एसे ही जारी ही रहेगी|




























Monday, 24 July 2017

नार्थ कोरिया धरती का जिंदा नर्क

नार्थ कोरिया एक एसा देश जो कि अपने  अाप मे ही अाज के परिवेश मे किसी बुरे सपने से कम नहि अाज भी वहां पे तनाशाहाअो का राज चलता है| यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि नार्थ कोरिया मे ना तो इंटरनेट है, ना वहां के नागरिक अपनी मर्जी से कही अा जा सकते है, ना ही पहन सकते है, ना ही खा सकते है, ओर ना ही अपने देश मे अपनी मर्जी से अा जा सकते है| वहां पे टेलिविजन पर केवल एक ही चैनल अाता है कुलमिलाके वहां के नागरीकों पर अपनी मर्जी से सांस लेने तक का अधिकार नही है| वहां कि मताएं अपने बच्चो से कहती है कि तुम्हारी अवाज इतनी कम होनी चाहिए कि चूहा भी ना सुन सके क‌योंकि यदि हमारे तनाशाह कि तुम्हारे मन मे क्या चल रहा है इस बात कि भनक तक ना लग सके यहि वहां के नागरिकों कि जीवन पद्धति है| वहां केवल किम जोंग जो उनका तानाशाह है उसकि चलती है यहां तक कि यदि वहां का कोई प्रेमी अपने से या तनाशाह कि हरम कि लडकियो से किसी ज्यादा सुंदर लडकी से विवाह करना चाहता है तो उसे पहले किम जोंग के साथ हम्बिसतर होना पडेगा विरोध करने वालो कि वहां पे कोई गिनती नहि है उसे सीधा सजा-ए-मौत दे दी जाती है| अपनी इसी सनक के चलते वहां का तानाशाह अमेरिका जैसे देश को भी युद्ध कि धमकी देता रहता है उसकि सनक इतनी है कि कैमिकल हथियारो बनाने कि अोर फिर उसके जरिये दुनिया को फतह करने कि चाह मन मे पाले हुए है| अपनी सनक के लिये वो अपने मुल्क कि भी बलि दे सकता है | इसी डर के साये मे  वहां के लोग अपना जीवन बिताते है जिनके बस मे होता है वो देश छोड दूसरे देशो मे शरणार्थी बने को मजबूर है| जो देश छोङने कि कोशिश मे पकडे जाते है उन्हे मौत कि सजा सुनाई जाती है| वहां के सरकारी अखबार मे भी केवल वो छापा जाता है जो किम जोंग चाहते है स्वतंत्रता जैसे विचारो कि कोई सुनवाई नहि है नार्थ कोरिया अपने-अाप मे  एक अविशवशनिय देश है वहां के तानाशाह के किम जोंग के अागे तो हिेटलर भी पानी कम चाय है| एक एेसा देश जहां अाप अपनी मर्जी से जा सकते है लेकिन अा नहि सकते है| अौर विडंबना देखिए हमारा इतना बडा देश है परंतु फिर भी हमारे देश मे  हर क्षेत्र मे एसे गद्धार बैठे है कि उनके होने से दुसमनो कि जरुरत नही है अब मै एक विडियो लिंक डालने जा रहा हूं इस विडियो को जरुर देखे ओर खासके वो बुद्धिजिवी जो खाते तो यहां का है लेकिन गुणगान कही का करते यह वीडियो देखने के बाद खुशकिस्मत समझे अपने अाप को जिन्होने यहां पे जन्म लिया है जो भारतीय है भारत माता कि जय बोलने मे हिचकिचाए नहि चाहे कोई भी हो यह देश यहां के लोगो ने बनाया है जिन्हे इसकी कद्र नहि अोेर जरा सोचिए जो लोग अब तक अपने देश कि सहि मायनो मे अाजाद कराने के लिए संघर्ष कर रहे है कयोंकि उन लोगो से यदि पूछेंगे कि जीवन मे सबसे बडा पाप कौन सा है तो उनका जवाब होगा देश से गद्धारी उनके लिये देश से गद्धारी का अर्थ है भगवान,खुदा उस उपर वाले से गद्धारी वो उपरवाला भी इस पाप को माफ नहि करता| एसा क्यों वो अाप इस विडियो को देखकर समझ जाएंगे वन यंग वर्लड नाम कि संस्था के अाप फेसबुक अोर युटयुब पे जुड के इसे ्ओर ज्यादा से ज्यादा अपना समर्थन दे ओर लोगो को जागरुक करे   video

Monday, 17 July 2017

बीसीसीअाई ने खेल को खेल नही बल्कि एक धंधा बना के रख दिया है

पिछले कुछ महीनो से कोहली अोर कोच अनिल कुंबले के बीच चली अा रही खींच-तान अाखिरकार थम ही गई| रवि शास्त्री के मुख्य कोच के चयन ने एक बार फिर जाहिर कर दिया कि क्रिकेट मे चयनकर्ताओ से ज्यादा कप्तान कि चलती है| उस कि पसंद ओर नापसंद का ख्याल सर्वोपरी है| वैसे ताजुब कि बात तो यह है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रकेट र्बाड होने के बावजूद कप्तान अोर कोच के बीच जो संघर्ष देखने को मिला वो तो शायद ग्रेग चैपल के दौर मे भी नहि मिला साथ ही राहुल द्रविड ओर जहीर खान के चयन से गांगुली अोर शास्त्री के बीच कि जो गहमा-गहमी है वो भी जग जाहिर हो गई वीरेंद्र सहवाग के दौड मे पिछड जाने के बाद दादा ने दिखा दिया कि क्यों उन्हे इस खेल का दादा कहा जाता है| लेकिन दुखद बात यह है कि अनिल कुंबले के इतने सफल कार्यकाल के बाद भी उनको इसतीफे के लिये मजबूर होना पडा जो यह दिखाता है कि किस प्रकार इतने वर्षो मे क्रिकेट का राजनितीकरण हुअा है| क्यो बीसीसीअाई र्कोट अोर लोढा कमेटी कि सिफारिशो को लागु करने मे अब तक नाकाम रहि है| बीसीसीअाई ने खेल को एक धंधा बना दिया है तभी तो खिलडीयों कि इतनी भारी अामदनी के बावजूद भी मैच फिक्सिंग,कैच फिक्सिंग अाईपीएल के फिक्सिंग कान्ड ने ना केवल खेल बल्कि खेलप्रेमियो कि भावनाओ को भी झंकझोर के रख दिया है| इस खेल के प्रति लोगो मे वो भावना नहि रहि जो पहले किसी जमाने मे हु्अा करती थी| तभी अाप लोगो को यह कहते सुनते होंगे कि यह मैच या ये खिलाडी बिक चुका है अोर कइ बार जब सट्टेबाज अोर बुकिज पकडे जाते है तब इन बातो को ओर बल मिलता है| अाज भारतीय क्रिकेट कि यह जो स्थिति है उसका कारण है कि एक खेल के प्रति इतनी जनभावनाये लोगो कि जिसने इस खेल को धर्म कि तरह देखा जाने लगा जिसका सबसे बडा नुकसान हमारे देश को यह हुअा है कि दूसरे खेलो को वो सम्मान प्राप्त नहि हुअा जो कि उन्हे होना चाहिए था यहां तक कि हमारा राष्ट्रिय खेल हाकी मे भारत कितना पिछड गया अथलिट मे तो मिलखा सिंह अोर पीटी उषा के बाद कोइ उस स्तर का धावक नहि मिल पाया जिसका परिणाम हम हर साल ओलंमपिक जैसी प्रतियोगिताओ मे देखने को मिलता है जब देश को यह सुने को मिलता है कि इतनी बडि जनसंखया वाले देश मे खिलाडि पैदा नहि होते लेकिन उन्हे कौन बताए कि क्रिकेट मे भारत जितना पैसा खर्च करता उसका अाधा भी अन्य खेलो मे लगाया होता तो  अाज हमारे देश के खेल का स्तर किसी अौर ही मुकाम पे होता अोर ना ही क्रिकेेट के कारण देश को बद्नामी झेलनी पडती क्योंकि जब सभी खेलो को बराबरी का सम्मान मिलता और बराबर सरकारी सुविधाएं मिलती तो लोग हर खेल को एक सम्मान रवैये से देखते ओर परिणाम यह होता कि केवल क्रिकेट मे ही कयों खेल जगत के हर स्पर्धा मे हिंदोस्तान सफलता कि नई इबादत लिखता जिसका सबसे बडा उदाहरण है अास्ट्रेलिया जिसने विश्व मे सबसे ज्यादा क्रिकेट विश्व कप के खिताब अपने नाम किये है| ओर जभी पांच साल बाद ओलंपिक प्रतियोगिताओ मे टाप पांच देशो मे ही शुमार होता है| जिसका कारण वहां के लोगो का हर खेल के प्रति सम्मान भाव,सम्मान अधिकार ओर युवाओ को अपने पसंदीदा खेलो के प्रति प्रोत्तसाहा्न करना जबकि क्रिकेट मे भी बराबरी का भाव होता तो भी समझ मे अाता जहां एक ओर विराट कोहली कि एक मैच कि अामदनी करोङो मे है वहि अगर अाप इसकी तुलना करे महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज से तो  अाप पाएंगे एक ही खेल के दो अलग वर्गो मे कितना बङा अंतर है पिछले अोलकपिंक्स मे एक के बाद एक जिस तरस से पदक कि दौड से हमारे अथलिटस बाहर हो रहे थे जिस समय भारत कि साख का सवाल था उस समय देश कि बेटियो ने ही देश कि इज्जत बचाई थी पीवी सिन्धु,साक्षी मलिक ये वो नाम है जो अभिनव बिंद्रा,जीतू राय जैसे बडे नामो पे भारी पडी थी ओर अभी चल रहे महिला क्रिकेट विश्व कप मे भारतीय टीम सेमीफाईनल मे पहुंच गई है| जबकि पुरुष ओर महिला वर्ग मे एक ही खेल मे सुविधाओ ओर पैसो का कितना भेद-भाव है| हालांकि पिछले कुछ सालो मे कब्ड्ङी,फुटबाल,जैसे खेलो कि अाईपीएल कि तर्ज पे होने वाली घरेलु लीगो का होना अारंभ हुअा है जिसे काफी सुधार देखने को मिला है जो कि एक सराहनीय प्रयास है लेकिन अभी बहुत सुधार करना बाकि है जिसे भविष्य मे चलके देश मे खेल अोर खिलाडी का स्तर और ऊंचा किया जा सके|
   

Wednesday, 12 July 2017

इस सावन हो जायो तैयार गौरीशंकर करेगे बेडा पार

श्रवण मास के इस शुभ अवसर पर अाज भोले नाथ के सर्गुण स्वरुप के बारे मे कुछ रोचक तथ्य अापको बताते अौर यह अत्यंत शुभ इसलिए भी है  कयोंकि इस बार का सावन सोमवार को ही अारंभ अौर सोमवार कि ही समाप्त हो रहा है एसा संयोग 50 वर्षो बाद बन रहा है| वैसे तो शिव एक ओंकार सवरुप है जिनका ना तो कोई रंग,रुप या अाकार है वो पुरुश अोर प्रकॢति  स्वरुप है| इसलिये उनकी पूजा शिवलिंग के रुप मे होति है परंतु  अपने भक्तो के लिए उस परम परमेश्वर ने स्वंय को पांच भागो अर्थात पांच दिव्य देहो अथवा दिव्य रुपो मे विभाजित किया यहि पांच दिव्य रुप पंच महादेव कहलाते है|जिनकि अराधना शिवरात्री के या अभी चल रहे सावन के पर्व पे शिव भक्तो के लिये अतंयत महत्त्वपूर्ण हो जाति है| अोर यह पंच रुप है गणेश,कार्तिके,नंदी,मां जगदम्बा(पार्वति) अौर भोलेनाथ शंकर अोर इन्ही का पंचाक्षरी मंत्र है ऊं नमः शिवाय जो पंच तत्वो का प्रतीक भी है अग्नि,वायु,जल,धरती,अाकाश यजुर वेद मे इसे ही पंच ब्रह्मा अर्थात कायनाथ का हर स्वरुप के पांच भाग होते है| इसिलिए ही दूसरे धर्मो मे भी संख्या पांच को पाक माना गया है| इसी कारण से यह पाया गया है कि भगवान शिव कि पूजा पांच क्रम या वक्तो मे की जाती है इसी कारण से हमार देश मे शैव ओर शाक्त समप्रदाय के लोग शिव-शक्ति के हर पर्व को बडे नियमा अनुसार जोश के साथ मनाते है पंच महादेव कि पूजा विधि इस प्रकार है| 
 अाप पांच देवो कि स्थापना करके गंगाजल,गाय का दूध, घी अथवा शहद के साथ थोडा जल मिलाकर जनेयु,रोली,भांग,धतूरा शिवलिंग पे बिल्वपत्र् जरुर चढाये ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप 7,5,108 बार प्रतिदिन करे अापको मानसिक अौर शरिरीक लाभ जरुर मिलेंगे अौर गौरीशंकर सहपरिवार पूजा पारिवारिक समस्याओ सुख,शांति अोर भौतिक सुविधायो के लिये बडि लाभकारी होती है| जिस प्रकार वैश्णव समप्रदाय के लोगो के लिये लक्षमीनारायण कि पूजा होती है ठीक उसी प्रकार गौरीशंकर कि अराधना शैव ओर शाक्त समप्रदाय लोगो के लिये मह्त्त्वपूर्ण मानी जाती है|

Saturday, 8 July 2017

दगाबाज है चीन

चीन वैदिक काल मे प्राचीन अखंड भारत एक अंग हु्या करता था| जिसकी सीमाये मध्य एसिया मेसोपोटामिया तक जब एक ही सनातन  सभ्यता पुरे विशव मे थी| चीन के संत भारत नालंदा अोर तक्षिला जैसे महाविद्यालयों मे शिक्षा-दीक्षा लेने अाते थे| लेकिन  जैसे-जैसे समय का चक्र बदला अोर युग बीते वैसे-वैसे परिवर्तन अाया अोर फिर कलियुग मे भगवान विष्णु ने अपने नो वे अवतार सिद्धार्थ गौतम जो अागे चलके भगवान गौतम बुद्ध के नाम से विख्यात हुए अोर यहि से बोद्ध धर्म कि स्थापना हुई| इस्लाम अोर इसाई धर्म के अाने से पूर्व दुनिया भर मे बोद्ध धर्म फैला हुया था|अौर चीन को एक सभ्य देश बनाने मे भगवान गौतम बुद्ध के शिष्य बोद्धिधर्मा का बहुत बडा योगदान था|यह वहि संत है जिनहोने भारत से जाकर चाइना मे शाअोलिन मंदिर कि स्थापना कि अोर साथ ही भगवान गौतम बुद्ध द्वारा कलियुग कि दिव्य युद्ध शिक्षा जिसे सारा संसार अाज शअोलिन कंग-फु के नाम से जानता है| वो भारत के ही एक संत बोद्धिधर्मा ही भारत से चाईना लेके गये थे| लेकिन यहि से धोखेबाज या दगाबाज चाईना कि काहानी शुरु होति है जो शायद देश के पहले प्रधानमंत्री चाचा नेहरु या तो जानते नहि थे या फिर किसी बुद्धीजीवी ने इस बात से अवगत कराना जरुरी नहि समझा जिसका परिणाम भारत ने 1962 के युद्ध मे अपना एक राज्य तिब्बत गवां दिया| लोग अाज कहते है कि चाईना ने 1962 मे धोखे से भारत को हराया था मुह पे हिंदी चीनी भाई-भाई कह के पीठ पीछे छुरा घोंप दिया| लेकिन चीन कि तो फितरत ही यहि रही है| उन्होने संत बोधिधर्मा के साथ भी एक षडयंत्र रचा था जी हां दोस्तो जब भारतीय संत चीन यात्रा से अपने वतन वापस अाना चाहते थे| जब तक वो वहां रहे चीन काफी समॢद्ध अोर विकसित देश बन चुका था| उसे भय था यदी बोद्धिधर्मा यहा से चले गये तो चीन से सुख-समॢद्धी अोर साथ ही साथ शअोलिन कंग-फू कि शिक्षा किसी अोर देशों तक ना पहुंचे इसलिेए एक दिन बोधिधर्मा के खाने मे जहर मिलाके उन्हे परोश दिया गया जिसके चलते उनका स्वर्गवाश हो गया| जो संत भारत के ही नहि बल्कि पूरे चाईना के लोगो के गुरु भी थे जो अपने दुर्लभ विद्या के चलते  विश्वगुरु बने उसी गुरू कि केवल अपने लाभ के लिये निर्मम हत्या कर दि गयी यह घटना कई चाईनीज लेखक अपने लेखो अोर किताबो मे बता चुके है|  लेकिन चीन यह भूल गया कि भारत अनंत काल से सिद्ध संतो,पीरो की भूमि रहा है| लगभग सभी महान संत या पीर भारत मे जन्मे है| या फिर यहां पे अाये है| अोर उनहोने अपना ज्ञान इस धरा के लोगो को दिया है तभी मौजूदा वैज्ञानिक भी मानते है कि भारत कि भूमि सभी धर्मा कि जननी है| ठीक उसी प्रकार  बोद्धिधर्मा ने पहले ही अपन विद्या दक्षिण भारत मे दी थी जिसको अाज हम कलायरीपायटू के नाम से केरल समेत पूरे दक्षिण भारत मे मशहूर है शायद एक सिद्ध संत होने के कारण बोधिधर्मा को इस बात का अाभास था कि उनके खिलाफ कोई साजिश रची जायेगी जिसके चलते उन्होने सर्वप्रथम अपने ज्ञान का प्रसार पहले भारत के लोगो के बीच ही किया इसिलिए अाज भी विदेशों से लोग चीन से पहले वो अनोखी युद्ध शिक्षा सिखने दक्षिण भारत के विद्यालयो मे अाते है| इस कहानी का यहि सार हैकि ज्ञान पे किसी एक का अधिकार नहि वो सबके लिये समान है अौर ना ही उसे किसी वस्तु कि तरह बांध के रखा जा सकता है वो पानी कि धारा कि तरह होेता जो निर्मल बहता रहता है|   अौर अाज चीन सीमा पर भारतीय सेना द्वारा सख्त रवैये अपनाने पर पंचशील समझोता उल्लंघन कि बात कर रहा है| वो शायद भूल गया 1962 के युद्ध कि शुरुअात करके उसी ने बहुत पहले ही उस संधि कि धज्जियां अपने हाथो से उडा दि थी| 
.