Monday, 17 July 2017

बीसीसीअाई ने खेल को खेल नही बल्कि एक धंधा बना के रख दिया है

पिछले कुछ महीनो से कोहली अोर कोच अनिल कुंबले के बीच चली अा रही खींच-तान अाखिरकार थम ही गई| रवि शास्त्री के मुख्य कोच के चयन ने एक बार फिर जाहिर कर दिया कि क्रिकेट मे चयनकर्ताओ से ज्यादा कप्तान कि चलती है| उस कि पसंद ओर नापसंद का ख्याल सर्वोपरी है| वैसे ताजुब कि बात तो यह है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रकेट र्बाड होने के बावजूद कप्तान अोर कोच के बीच जो संघर्ष देखने को मिला वो तो शायद ग्रेग चैपल के दौर मे भी नहि मिला साथ ही राहुल द्रविड ओर जहीर खान के चयन से गांगुली अोर शास्त्री के बीच कि जो गहमा-गहमी है वो भी जग जाहिर हो गई वीरेंद्र सहवाग के दौड मे पिछड जाने के बाद दादा ने दिखा दिया कि क्यों उन्हे इस खेल का दादा कहा जाता है| लेकिन दुखद बात यह है कि अनिल कुंबले के इतने सफल कार्यकाल के बाद भी उनको इसतीफे के लिये मजबूर होना पडा जो यह दिखाता है कि किस प्रकार इतने वर्षो मे क्रिकेट का राजनितीकरण हुअा है| क्यो बीसीसीअाई र्कोट अोर लोढा कमेटी कि सिफारिशो को लागु करने मे अब तक नाकाम रहि है| बीसीसीअाई ने खेल को एक धंधा बना दिया है तभी तो खिलडीयों कि इतनी भारी अामदनी के बावजूद भी मैच फिक्सिंग,कैच फिक्सिंग अाईपीएल के फिक्सिंग कान्ड ने ना केवल खेल बल्कि खेलप्रेमियो कि भावनाओ को भी झंकझोर के रख दिया है| इस खेल के प्रति लोगो मे वो भावना नहि रहि जो पहले किसी जमाने मे हु्अा करती थी| तभी अाप लोगो को यह कहते सुनते होंगे कि यह मैच या ये खिलाडी बिक चुका है अोर कइ बार जब सट्टेबाज अोर बुकिज पकडे जाते है तब इन बातो को ओर बल मिलता है| अाज भारतीय क्रिकेट कि यह जो स्थिति है उसका कारण है कि एक खेल के प्रति इतनी जनभावनाये लोगो कि जिसने इस खेल को धर्म कि तरह देखा जाने लगा जिसका सबसे बडा नुकसान हमारे देश को यह हुअा है कि दूसरे खेलो को वो सम्मान प्राप्त नहि हुअा जो कि उन्हे होना चाहिए था यहां तक कि हमारा राष्ट्रिय खेल हाकी मे भारत कितना पिछड गया अथलिट मे तो मिलखा सिंह अोर पीटी उषा के बाद कोइ उस स्तर का धावक नहि मिल पाया जिसका परिणाम हम हर साल ओलंमपिक जैसी प्रतियोगिताओ मे देखने को मिलता है जब देश को यह सुने को मिलता है कि इतनी बडि जनसंखया वाले देश मे खिलाडि पैदा नहि होते लेकिन उन्हे कौन बताए कि क्रिकेट मे भारत जितना पैसा खर्च करता उसका अाधा भी अन्य खेलो मे लगाया होता तो  अाज हमारे देश के खेल का स्तर किसी अौर ही मुकाम पे होता अोर ना ही क्रिकेेट के कारण देश को बद्नामी झेलनी पडती क्योंकि जब सभी खेलो को बराबरी का सम्मान मिलता और बराबर सरकारी सुविधाएं मिलती तो लोग हर खेल को एक सम्मान रवैये से देखते ओर परिणाम यह होता कि केवल क्रिकेट मे ही कयों खेल जगत के हर स्पर्धा मे हिंदोस्तान सफलता कि नई इबादत लिखता जिसका सबसे बडा उदाहरण है अास्ट्रेलिया जिसने विश्व मे सबसे ज्यादा क्रिकेट विश्व कप के खिताब अपने नाम किये है| ओर जभी पांच साल बाद ओलंपिक प्रतियोगिताओ मे टाप पांच देशो मे ही शुमार होता है| जिसका कारण वहां के लोगो का हर खेल के प्रति सम्मान भाव,सम्मान अधिकार ओर युवाओ को अपने पसंदीदा खेलो के प्रति प्रोत्तसाहा्न करना जबकि क्रिकेट मे भी बराबरी का भाव होता तो भी समझ मे अाता जहां एक ओर विराट कोहली कि एक मैच कि अामदनी करोङो मे है वहि अगर अाप इसकी तुलना करे महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज से तो  अाप पाएंगे एक ही खेल के दो अलग वर्गो मे कितना बङा अंतर है पिछले अोलकपिंक्स मे एक के बाद एक जिस तरस से पदक कि दौड से हमारे अथलिटस बाहर हो रहे थे जिस समय भारत कि साख का सवाल था उस समय देश कि बेटियो ने ही देश कि इज्जत बचाई थी पीवी सिन्धु,साक्षी मलिक ये वो नाम है जो अभिनव बिंद्रा,जीतू राय जैसे बडे नामो पे भारी पडी थी ओर अभी चल रहे महिला क्रिकेट विश्व कप मे भारतीय टीम सेमीफाईनल मे पहुंच गई है| जबकि पुरुष ओर महिला वर्ग मे एक ही खेल मे सुविधाओ ओर पैसो का कितना भेद-भाव है| हालांकि पिछले कुछ सालो मे कब्ड्ङी,फुटबाल,जैसे खेलो कि अाईपीएल कि तर्ज पे होने वाली घरेलु लीगो का होना अारंभ हुअा है जिसे काफी सुधार देखने को मिला है जो कि एक सराहनीय प्रयास है लेकिन अभी बहुत सुधार करना बाकि है जिसे भविष्य मे चलके देश मे खेल अोर खिलाडी का स्तर और ऊंचा किया जा सके|
   

Wednesday, 12 July 2017

इस सावन हो जायो तैयार गौरीशंकर करेगे बेडा पार

श्रवण मास के इस शुभ अवसर पर अाज भोले नाथ के सर्गुण स्वरुप के बारे मे कुछ रोचक तथ्य अापको बताते अौर यह अत्यंत शुभ इसलिए भी है  कयोंकि इस बार का सावन सोमवार को ही अारंभ अौर सोमवार कि ही समाप्त हो रहा है एसा संयोग 50 वर्षो बाद बन रहा है| वैसे तो शिव एक ओंकार सवरुप है जिनका ना तो कोई रंग,रुप या अाकार है वो पुरुश अोर प्रकॢति  स्वरुप है| इसलिये उनकी पूजा शिवलिंग के रुप मे होति है परंतु  अपने भक्तो के लिए उस परम परमेश्वर ने स्वंय को पांच भागो अर्थात पांच दिव्य देहो अथवा दिव्य रुपो मे विभाजित किया यहि पांच दिव्य रुप पंच महादेव कहलाते है|जिनकि अराधना शिवरात्री के या अभी चल रहे सावन के पर्व पे शिव भक्तो के लिये अतंयत महत्त्वपूर्ण हो जाति है| अोर यह पंच रुप है गणेश,कार्तिके,नंदी,मां जगदम्बा(पार्वति) अौर भोलेनाथ शंकर अोर इन्ही का पंचाक्षरी मंत्र है ऊं नमः शिवाय जो पंच तत्वो का प्रतीक भी है अग्नि,वायु,जल,धरती,अाकाश यजुर वेद मे इसे ही पंच ब्रह्मा अर्थात कायनाथ का हर स्वरुप के पांच भाग होते है| इसिलिए ही दूसरे धर्मो मे भी संख्या पांच को पाक माना गया है| इसी कारण से यह पाया गया है कि भगवान शिव कि पूजा पांच क्रम या वक्तो मे की जाती है इसी कारण से हमार देश मे शैव ओर शाक्त समप्रदाय के लोग शिव-शक्ति के हर पर्व को बडे नियमा अनुसार जोश के साथ मनाते है पंच महादेव कि पूजा विधि इस प्रकार है| 
 अाप पांच देवो कि स्थापना करके गंगाजल,गाय का दूध, घी अथवा शहद के साथ थोडा जल मिलाकर जनेयु,रोली,भांग,धतूरा शिवलिंग पे बिल्वपत्र् जरुर चढाये ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप 7,5,108 बार प्रतिदिन करे अापको मानसिक अौर शरिरीक लाभ जरुर मिलेंगे अौर गौरीशंकर सहपरिवार पूजा पारिवारिक समस्याओ सुख,शांति अोर भौतिक सुविधायो के लिये बडि लाभकारी होती है| जिस प्रकार वैश्णव समप्रदाय के लोगो के लिये लक्षमीनारायण कि पूजा होती है ठीक उसी प्रकार गौरीशंकर कि अराधना शैव ओर शाक्त समप्रदाय लोगो के लिये मह्त्त्वपूर्ण मानी जाती है|

Saturday, 8 July 2017

दगाबाज है चीन

चीन वैदिक काल मे प्राचीन अखंड भारत एक अंग हु्या करता था| जिसकी सीमाये मध्य एसिया मेसोपोटामिया तक जब एक ही सनातन  सभ्यता पुरे विशव मे थी| चीन के संत भारत नालंदा अोर तक्षिला जैसे महाविद्यालयों मे शिक्षा-दीक्षा लेने अाते थे| लेकिन  जैसे-जैसे समय का चक्र बदला अोर युग बीते वैसे-वैसे परिवर्तन अाया अोर फिर कलियुग मे भगवान विष्णु ने अपने नो वे अवतार सिद्धार्थ गौतम जो अागे चलके भगवान गौतम बुद्ध के नाम से विख्यात हुए अोर यहि से बोद्ध धर्म कि स्थापना हुई| इस्लाम अोर इसाई धर्म के अाने से पूर्व दुनिया भर मे बोद्ध धर्म फैला हुया था|अौर चीन को एक सभ्य देश बनाने मे भगवान गौतम बुद्ध के शिष्य बोद्धिधर्मा का बहुत बडा योगदान था|यह वहि संत है जिनहोने भारत से जाकर चाइना मे शाअोलिन मंदिर कि स्थापना कि अोर साथ ही भगवान गौतम बुद्ध द्वारा कलियुग कि दिव्य युद्ध शिक्षा जिसे सारा संसार अाज शअोलिन कंग-फु के नाम से जानता है| वो भारत के ही एक संत बोद्धिधर्मा ही भारत से चाईना लेके गये थे| लेकिन यहि से धोखेबाज या दगाबाज चाईना कि काहानी शुरु होति है जो शायद देश के पहले प्रधानमंत्री चाचा नेहरु या तो जानते नहि थे या फिर किसी बुद्धीजीवी ने इस बात से अवगत कराना जरुरी नहि समझा जिसका परिणाम भारत ने 1962 के युद्ध मे अपना एक राज्य तिब्बत गवां दिया| लोग अाज कहते है कि चाईना ने 1962 मे धोखे से भारत को हराया था मुह पे हिंदी चीनी भाई-भाई कह के पीठ पीछे छुरा घोंप दिया| लेकिन चीन कि तो फितरत ही यहि रही है| उन्होने संत बोधिधर्मा के साथ भी एक षडयंत्र रचा था जी हां दोस्तो जब भारतीय संत चीन यात्रा से अपने वतन वापस अाना चाहते थे| जब तक वो वहां रहे चीन काफी समॢद्ध अोर विकसित देश बन चुका था| उसे भय था यदी बोद्धिधर्मा यहा से चले गये तो चीन से सुख-समॢद्धी अोर साथ ही साथ शअोलिन कंग-फू कि शिक्षा किसी अोर देशों तक ना पहुंचे इसलिेए एक दिन बोधिधर्मा के खाने मे जहर मिलाके उन्हे परोश दिया गया जिसके चलते उनका स्वर्गवाश हो गया| जो संत भारत के ही नहि बल्कि पूरे चाईना के लोगो के गुरु भी थे जो अपने दुर्लभ विद्या के चलते  विश्वगुरु बने उसी गुरू कि केवल अपने लाभ के लिये निर्मम हत्या कर दि गयी यह घटना कई चाईनीज लेखक अपने लेखो अोर किताबो मे बता चुके है|  लेकिन चीन यह भूल गया कि भारत अनंत काल से सिद्ध संतो,पीरो की भूमि रहा है| लगभग सभी महान संत या पीर भारत मे जन्मे है| या फिर यहां पे अाये है| अोर उनहोने अपना ज्ञान इस धरा के लोगो को दिया है तभी मौजूदा वैज्ञानिक भी मानते है कि भारत कि भूमि सभी धर्मा कि जननी है| ठीक उसी प्रकार  बोद्धिधर्मा ने पहले ही अपन विद्या दक्षिण भारत मे दी थी जिसको अाज हम कलायरीपायटू के नाम से केरल समेत पूरे दक्षिण भारत मे मशहूर है शायद एक सिद्ध संत होने के कारण बोधिधर्मा को इस बात का अाभास था कि उनके खिलाफ कोई साजिश रची जायेगी जिसके चलते उन्होने सर्वप्रथम अपने ज्ञान का प्रसार पहले भारत के लोगो के बीच ही किया इसिलिए अाज भी विदेशों से लोग चीन से पहले वो अनोखी युद्ध शिक्षा सिखने दक्षिण भारत के विद्यालयो मे अाते है| इस कहानी का यहि सार हैकि ज्ञान पे किसी एक का अधिकार नहि वो सबके लिये समान है अौर ना ही उसे किसी वस्तु कि तरह बांध के रखा जा सकता है वो पानी कि धारा कि तरह होेता जो निर्मल बहता रहता है|   अौर अाज चीन सीमा पर भारतीय सेना द्वारा सख्त रवैये अपनाने पर पंचशील समझोता उल्लंघन कि बात कर रहा है| वो शायद भूल गया 1962 के युद्ध कि शुरुअात करके उसी ने बहुत पहले ही उस संधि कि धज्जियां अपने हाथो से उडा दि थी| 
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Tuesday, 4 July 2017

सत्तर सालों बाद होगा दो दोस्तो का मिलन

प्रधानमंत्री मोदी अाज से तीन दिवसिय इजरायल दौरे पर है| भारत अौर इजरायल के संबध यूं तो वैदिक काल से दोनो सभ्यतायो के इतिहास के प्रमाण मिलते है| जब यहुदीयो पर दुनिया भर मे अत्याचार बढा तब केवल भारत ही एकमात्र एेसा देश था जहां उन्हे शरण मिली अौर यहीं से दोनो देशो के लोगो के बीच का रिशता अोर संवाद इतना गहरा हो गया जिसकी मिसाल अाने वाले लंबे समय तक दुनिया के सामने एक ऊदाहरण बनके चमकेगी|इस रिशते मे सबसे बडा योगदान मूलरुप से भारतीय इजरायलि समाज का है| जिसने अपने देश लोटकर वाकई मे उस कहावत को सत्य साबित कर दिया कि भारत कि मिटी सोना उगलती है| जब दुनिया भर मे शरणार्थी यहुदी अपने नये वतन अाये जिसमे भारत से भी लोग मौजूद थे तो उन्हे अपने रंग के कारण भेदभाव का सामना करना पडा जिसका कारण यूरोप से अाये शरणार्थी थे वो रंग मे गोरे थे| जिस वजह से भारतीय मूल के लोगो के मेन शहर से अलग रेगिस्तानी इलाके मे रहने को कहा गया| परंतु अपनी परिश्रम अोर भारतीय संस्कारों के बल पर भारतीय मूल के लोगो ने रेगिस्तानि  इलाके खेती,सब्जीयों कि पैदावार कर कुछ सालों मे उस इलाके को हरे-भरे मैदानों मे बदल दिया| परिणामस्वरुप इनाम के तौर पे अाखिरकार भारतीय मूल के लोगो को भी मुख्य शहरों मे बसने कि अोर समाज के मुख्यधारा से जुडने मे सफलता मिली ओर नये अाधुनिक इजरायल का अपने परिश्रम भारतीय संस्कारो के चलते देश का अभिन्न अंग बन गये| इसी गहरे संबध के चलते इजरायल ने बिना परिणाम कि चिंता करते हुए 1965,1971 भारत-पाक के जंगो मे प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष सदैव भारत कि सहायता कि अोर अंतराष्ट्रीय स्तर पर चाहे स्थिति भारत के अनकूल रही हो या प्रतिकूल सदैव हर मोर्चे पे भारत का पक्ष लिया| वैदिक काल के समय के वजह से दोनो देशों कि सांस्कॄतिक त्योहारो मे भी संमानताये देखने को मिलती उदाहरण के तोर पे दियों के त्योहार यानी दिपावली को दोनो मुल्कों मे अलग-अलग कारणो से मनाया जाता है| एक नही बल्कि एसे अनेक त्योहार है जिनका इतिहास ओर कारण भले ही अलग हो परंतु मनाने का तरीका बिल्कुल समान है| दोनो देशों कि समस्याएं भी एक जैसी हि है फिर चाहे वो अातंकवाद हो या अांतरीक सुरक्षा  महीला सशक्तीकरण ये तमाम वो क्षेत्र है| जहां इजरायल ने महारत हासिल कि है जिनसे भारत बहुत कुछ सीख सकता है|


























Friday, 30 December 2016

साइबर सुरक्षा पुख्ता हुए बिना डिजिटल इंडिया का सपना कैसे होगा पूरा

नई दिल्ली/भानु प्रताप: रविवार को यूनियन होम मिनिस्ट्री की वेबसाइट हैक कर ली गयी। जांच के लिए फिलहाल ब्लॉक किया गया। बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान के किसी ग्रुप ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड यानी एनएसजी की वेबसाइट हैक कर ली थी। हैक किए जाने के बाद वेबसाइट पर भारत विरोधी कमेंट पोस्ट कर दिए गए थे।  ऐसे में देश को कैशलैस इकॉनमी के चरण में ले जाने से पहले कुछ मुलभूत सुविधाए ऐसी है। जिन पे सुधार करना जरुरी है। जैसे गाँव-गाँव में बिजली की सुविधा दुरुस्त करना। कैशलेस इकॉनमी और ऑनलाइन ट्रांज़ैकशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अंत में सबसे महत्वपूर्ण अपना एक मजबूत स्वदेशी सर्वर प्रणाली बनाना। जिससे  भविष्य में कैशलेस ट्रांजैकशन से लोगो को परेशानी न हो और साइबर सुरक्षा पुख्ता हो सके।जैसे-जैसे देश इ-बैंकिंग की और बढ़ेगा वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा से सबंधित समस्याए बढेंगी और जब हमारी अपने देश कि सैन्य गुप्त जानकारियाँ हैक हो जाती है। तो तब क्या होगा जब जनता के खातो में से पैसे गायब होने लगेंगे जैसे मोबाइल में सिम क्लोनिंग के जरिये डाटा हैक हो जाता है। परिणाम स्वरूप जनता बहुत जल्दी इस व्यवस्था पे से अपना भरोसा खो बैठेगी।  इसलिए जरुरी है की डीऐनस सर्वर वायरस और ऐसे ही घातक वायरसों से सुरक्षाहेतु एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।  भारत जैसे आईटी हब कहे जाने वाले मुल्कों के लिए यह मुश्किल नही होना चाहिए। और वैसे भी इसे हम इंटरनेट कन्टेंट पे भी काबू  पा सकते है। क्या दिखाना है और  कितना इस पे नियंत्रण पाया जा सकता है। क्योंकि कही ऐसा ना हो जाए की विज्ञान के इस युग में हमारे  देश का हाल भी कुछ-कुछ  टर्मिनेटर फ़िल्म जैसा हो जाए जिसमें  हमे लगता है की विज्ञान हमारा गुलाम है।लेकिन स्थिति विपरीत होने में समय नही लगता की पता चले हम विज्ञान के गुलाम हो गए है। कैशलैस अर्थव्यवस्था जिन विकसित देशो में मौजूद है। उन देशो का अध्यन्न करना होगा और यह भी समझना होगा। की उन्हें अब और पहले किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ताकि हम उनसे सबक लेकर और सीख लेकरअपने देश में लागु करे। डिजिटल इंडिया बनाना तो इन सभी चुनौतियों से निपटना जरुरी है। जिससे केवल डिजिटल इंडिया नही बल्कि सुरक्षित डिजिटल इंडिया बने ऐसी व्यवस्था का विकास हो कि तमाम विकसित देशों के सामने एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत हो सके 

Saturday, 3 December 2016

नोटबंदी से सरकार ने किये तीन शिकार यानी एक अनार तीन बीमार


नोटबंदी प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम है। कालेधन,आतंकवाद,और देश कि अर्थव्यवस्था में बढ़ते जाली नोटों के खिलाफ जिससे जनता को थोड़ी परेशानी तो हो रही है। लेकिन लोग इसके लिए तैयार है। क्योंकि लोग जानते है की कल देश के लेट जाने से अच्छा है। की देश आज लाइन में खड़ा हो जाए और वैसे भी जब हम सब वोट डालने के लिए, अस्पतालों में इलाज के लिए, और जिओ सिम के लिए लाइन में खड़े हो सकते है। तो मुल्क के लिए क्या बुराई है। इसी बीच लेकिन देश की जनता के मन में कई ऐसे सवाल भी  है। जैसे क्या इस कदम से देश में कालधन ख़तम हो जाएगा? क्या बाद में कालाधन पैदा नही होगा? क्या कालाबाज़ारी रुक जायेगी? और इत्यादि। अभी हाल ही में आयकर संसोधन बिल में कुछ बदलावों के साथ लोकसभा में पारित हो गया। जिसके चलते अघोषित आय पर 50 फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन इसने जनता के मन में कई सवाल पैदा कर दिए जैसे की कहीं इस फैसले से सरकार ने कालधन रखने वालो के  लिए एक सुगम रास्ता तो नही दे दिया। या विपक्ष यह पूछ रहा है। की जब यही करना था। तो इतने बड़ा ड्रामा करने की क्या जरुरत थी? खैर विपक्ष का तो काम ही यही है। विपक्ष  अपना विपक्षी धर्म अच्छे से निभारा है और पूरी कोशिश कर रहा है। की लोग सरकार के खिलाफ सड़को पे उतर आये हंगामा करे और किसी तरह यह फैसला प्रधानमन्त्री वापिस ले। फिर चाहे उसके लिए भारत बंद करने का प्रयास ही क्यों ना हो। प्रयास तो विफल हो गया। लेकिन भड़ास निकालने के लिए सदन की कार्यवाही हर दिन स्थगित हो रही है। जिसमे ना जाने रोज़ाना  कितने ही हज़ारों, लाखों रुपयो का नुक्सान हो रहा है। लेकिन कोई यह नही समझ रहा की इस निर्णय के पीछे सरकार का असली मकसद क्या है। दरसल सरकार का मकसद यह नही की देश का सारा कालाधन ख़तम या बर्बाद हो जाए बल्कि यह जितनी ज़्यादा हो सके यह काली अघोषित आये  बैंक खातों तक पहुँच जाए और साथ ही देश भविष्य में कैशलेस अर्थव्यवस्था की और कदम बढ़ाये। और कालाधन सामने आ जाये इसी कारण सरकार ने  50  फीसदी के प्रवाधान के साथ आयकर संधोधन बिल पास किया ताकि यह कालाधन जितना हो सके देश के विकास में काम आये अब उन सवालों का जवाब की इससे कलाधन ख़तम होगा या नही? आतंकवाद पे रोक लगेगी या नही? लेकिन इससे पहले यह समझना होगा की इन सब परेशानियों का मूल कारण क्या था? दरसल इससे पहले भारत अपनी करेंसी छापने के लिए जिस काग़ज का प्रयोग करता था वो बाहर से आता था। और वो जिस देश से आता था। उसी देश से पडोशी देश ने भी समझौता कर लिया  और जाली इंडियन करेंसी छापने लगा। जिसे यह सारी दिकत्ते पैदा हुई और मौजूदा सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। और नए नोट छापने के लिए अत्याधुनिक कागज़ और स्याही का इस्तेमाल करना पड़ा। जिसकी बारीकियों को समझना और नकल करना मुश्किल है। सरकार के इस फैसले से कालाधन पैदा होना समाप्त तो नही होगा। लेकिन कम जरूर  हो जाएगा और और देश के ट्रांसैक्शन प्रणाली में पारदर्शिता आजायेगी और देश डिजिटल ट्रांसैक्शन और प्लास्टिक मनी की लिए प्रेरित होगा। 

Tuesday, 18 October 2016

एक तरफ है सुप्रीम कोर्ट की हूंकार दूसरी तरफ मुस्लिम लॉ बोर्ड का अहंकार

मुस्लिम महिलाओ की कोशिश रंग लाइ और देश की उच्च अदालत ने तीन तलाक के मामले पे सुनवाई करने का निर्णय लिया | और धर्म कि आड़ में तीन तलाक़ के नाम पर  मुस्लिम महिलओं के साथ हो रहे शोषण को बड़ी सख्ती के साथ उजागर किया| लेकिन यह काम अगर पहले हो जाता तो आज हालात कुछ और होते बरहाल
अजीब विडंबना जब कुछ लोग यह कहते है|  इस्लाम में महिलओं को उनका हक जैसी कोई बात लिखी नही है हालांकि मैं इस्लाम का इतना बड़ा कोई ज्ञाता तो हूँ नही यह तो हमारे देश के मौलवी जानते होंगे लेकिन ऐसा हो
नही सकता की कोई मजहब भेदभाव की अनुमति देता हो| यह जरुर हो सकता है की कुछ लोग व्यतिगत फायदे के लिए धर्म के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करे और उसे ही कानून बना दे| जैसा की इस वक़्त देश का मुस्लिम लॉ बोर्ड करने की कोशिश कर रहा है| जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा मुल्क के मुस्लिम समाज को ही हुआ है| जहाँ एक और आजादी की लड़ाई मुस्लिम महिलओं कि भागीद्दारी अधिक थी| उन्होंने बढ़-चढ़कर अपने विचार व्यक्त किये वो आज कहाँ पिछड गयी ? इतना ही नही कुछ ताज़ा सर्व के मुताबिक देश में साक्षरता और पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए है| यहाँ तक की पिछड़े समाज अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति आदि से भी पिछड़े| यहाँ तक की कुछ राज्यों में आरक्षण मिलने के बाद भी मुस्लिम भाई-बहन भी उसका पूरा फयादा नही उठा पाते| जिसके चलते वो ऐसे अब व्यवस्था को भी दोष नही दे सकते| क्यूंकि व्यवस्था तो उन्हें अवसर दे रही है लेकिन वो मौको का लाभ नही ले पा रहे तो इसमें सरकार का क्या दोष| दुसरे धर्मो में भी पहले ऐसी कुछ प्रथाए प्रचलित थी| जो समय के साथ कुप्रथा बन गयी और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे सती प्रथा,बाल-विवाह इत्यादि यदि हिन्दू लॉ बोर्ड भी इन पर अडिग हो जाता तो शायद देश महिलओं के अवस्था और भी बुरी हो जाती| क्यूंकि भगवान् श्री कृषण ने कहा है| कि समय परिवर्तनशील है| मनुष्य को समय के अनुसार आचरण करना चाहिए अर्थात वक़्त के साथ अपने जीवन में बदलाव लाना जरुरी है| जो मनुष्य ऐसा नही करते   वो तबाह हो जाते अर्थात उनका जीवन नष्ट हो जाता है| यहाँ पे मैंने श्रीकृषण का उदाहरण इसलिए दिया है| क्यूंकि इस्लाम के कुछ सूफी संतो का मनान है की मुहम्मद पैगंबर आखरी पैगंबर थे| उनसे पहले बाकी धर्मो में बहुत से पैगंबर हुए है| जैसे जीसस.कृषण.मोसेस आदि| यदि मुस्लिम महिलाये अपने हक चाहती है| और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से निवारण चाहती है| जो इस्लाम ने नही बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बनाई है| तो उनको अपने समाज के लोगो को जागरूक करना होगा तभी बदलाव भी आएगा क्यूंकि मक्का-मदीना जहाँ से इस्लाम कि शुरुआत हुई यानी सऊदी अरब समेत 21 मुसलमान देशो में भी तीन तलाक जैस कोई सिस्टम नही है|