Saturday, 10 June 2017

किसानो अोर जवानो के राजनीतीकरण से विपक्ष का हो जायेगा बंटाधार

 एक के बाद एक राज्यों में चुनावी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी बौखला गयी है| उसकी इसी बौखलाहट के कारण वो खुद ही भविष्य में अपने लिए कांटे बो रही है | मोदी सरकार के विरोध में पार्टी यह भूल चुकी है की जिस डाल पे बैठते है उसे काटा नहीं करते वह यह समझ नहीं पा रही की जनता अब तुष्टिकरण की राजनीती से ऊब चुकी है| उसे समझ में आ गया है की पार्टियां अपने वोट बैंक की राजनीती के लिए तुष्टिकरण से भी नहीं चुकती जिसका ताज़ा उदाहरण है उत्तर प्रदेश का चुनाव जिसमे मुस्लिम विरोधी का ठप्पा झेलते आ रही भाजपा को देवबंद जैसे मुस्लिम बहुल इलाके से भी जीत मिली और जबकि एक भी मुस्लिम उमीदवार  खड़े किये बिना लेकिन विपक्ष इसे ईवीम का घोटाला देने में लगा रहा| अपनी नाकामियों को माने की बजाये सारा दोष ईवीम पर मढ दिया| तीन तलाक़ के मुद्दे पर भाजपा को मुस्लिम महिलाओं का भरपूर साथ मिला जिसका परिणाम सबको पता है| लेकिन हार से सबक लेने की बजाए पार्टी अपने विरोधाभास में एक समाज की धार्मिक भावनाओ को आहत करने से बाज नहीं आ रही| क्रूर पशु बलि के खिलाफ कानून क्या बना केरल के कनूर में सरेआम एक बछड़े के ह्त्या कर दी गयी|कल को यदि सरकार स्वछता अभियान पे कोई सख्त कानून बनाये तो क्या विपक्ष सरे बाज़ार में सड़क के बीचों-बीच टट्टी खालेगा| अगर नहीं तो फिर मुद्दों की राजनीती करे ना की तुष्टिकरण की क्यूंकि इस प्रकार की राजनीती से कुछ साल कुछ महीनें ही कामयाबी मिलती है| लंबे समय तक नहीं जिसका परिणाम यह हुआ की राजस्थान में 1500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने पद से यह कहकर की गाय की बलि से उनके ह्रदय को पीड़ा हुई है| इसीलिए हम इस पार्टी का हिस्सा नहीं बने रहना चाहते यह तो शुरुआत भविष्य में और भी घोर राजनितिक परिणाम झेलने पड़ सकते है| अभी यह मुद्दा थमा ही नहीं था की कश्मीर में कोंग्रस के नेता रह चुके मणिशंकर अय्यर हुर्रियत  नेताओ के साथ भारतीय सेना का उपहास उड़ाने  में अलगावादियों के मत से सहमत नजर आते दिखे इसके बाद लेफ्ट के एक नेता ने जर्नरल रावत की तुलना हिटलर से कर  दी और हम जानते है सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने के बाद विपक्ष देश को शर्मशार कर दिया| जिसका परिणाम उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में जनता ने कांग्रेस को नकार दिया और अब मध्यप्रदेश में किसानो के शांतिपूर्ण आंदोलन को भड़काकर यदि विपक्ष यह समझ रहा है की वह अपनी इस राजनीती से आगामी चुनावों में कुछ फायदा होगा तो वो यह समझ ले जिस सरकार के नेता अपनी सेना पे प्रश्नचिह्न लगा सकते तो अब यह जनता तय ले की राजनितिक सफलता के लिए यह मासूम लोगों को अपनी राजनितिक आग में झुलसा सकते है|  जिसका उदहारण है सहरानपुर हिंसा में राजपूत और दलित दोनों तरफ से लोग मारे गए लेकिन विपक्ष के नेता केवल दलितों के परिजनों से मिलकर लौट आये और राजपूतो के परिजनों से हाल भी नहीं पूछा इस प्रकार  कि  राजनीती से वो ना केवल समाज को आपस में बांटते है अब लोगो को यह समझना चाहिए इस प्रकार कि माननसिकता रखने क्या उनका क्या भला करेंगे बंटवारे की राजनीती करके बंटवारा करके अपनी राजनितिक रोटियां शेक सकते है| और इसे ही नकरात्मक राजनीती कहते है नकरात्मक राजनीती से चुनाव जीते जा सकते है दिल नहीं कुछ समय के लिए लेकिन लंबे समय के लिए नहीं इसीलिए जो पार्टी मुद्दों पे राजनीती करेगी वो ही लंबे समय के लिए सफलता प्राप्त करेगी| 

Friday, 26 May 2017

पहले मचाया ईवीम पर बवाल चुनाव आयोग की चुनौती के बाद धुयाँ हो गए सारे सवाल

भानु प्रताप/नई दिल्ली:चुनावी मैदान में मुँह की खाने के बाद ईवीम और चुनाव आयोग पे सवाल खड़ा करने का तो जैसे फ़ैशन ही चल पड़ा था| जो भी कोई चुनावों में हारता वो हार का सारा धिक्रा ईवीम पर फोड़ देता और यह सिलसिला शुरू हुआ 2016 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों से परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग के समक्ष हंगामा भी किया|  इसके बाद यूपी चुनाव का नतीज़ा आने के बाद मायावती ने भी ईवीम पे ही सारा दोष मढ़ दिया| फिर केजरीवाल एंड कंपनी ने तो हद ही पार कर  दी 2017 दिल्ली  नगर निगम चुनावों के नतीजों के बाद जैसे इस मुद्दे को ही अपना पार्टी का ऐजेंडा बना दिया दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान एक नकली मशीन पेश की और यह दिखाने के कोशिश की किस प्रकार सॉफ्टवेयर को हैक कर एक पार्टी के पक्ष में सारे वोट डलवाये जा सकते है| और भाजपा की जीत को ईवीम की जीत कह के उसे एक बड़ी धांधली करार दिया लेकिन विपक्ष के सभी कोशिशों पर खुद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह कह के की यदि ईवीम से छेड़छाड़ हुई होती तो मैं पंजाब का मुखयमंत्री ना होता चुनाव आयोग पे सवाल उठाने वालो के मुँह पे जोरदार तमाचा जड़ दिया| बरहाल केंद्र ने भी विविपैट मशीनो की खरीद के लिए मंजूरी दे दी  और चुनाव आयोग ने एक महीने का मौका दिया है| सभी विपक्षी दलों को की वो चुनाव आयोग आकर ईवीम हैक करके दिखाए|लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से दी गयी समय सीमा ख़तम हो चुकी है|और अभी एक भी दल चुनाव आयोग नहीं पहुंचा यानी इतना हंगामा केवल सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के लिए यानी थोथा चना बजे घना अब कहाँ गया विपक्ष?कहाँ धुयाँ हो गए उन के सवाल?यानी इन्होने यह नहीं  सोचा की राजनीती में देश के उच्चतम विभाग को भी नहीं बक्शा चुनाव आयोग पे सवाल खड़े कर इन्होने पुरे इलेक्शन सिस्टम पे ही सवाल खड़े कर  दिए जो लगभग सवा सौ करोड़ के ज़्यादा देशवासियों की भावना आहात करने के सामान है| यह वही लोग है जो सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते है तो फिर जो लोग अपने देश की सेना को शर्मशार कर  सकते है उनके लिए चुनाव आयोग पे आरोप लगाना कौन सी बड़ी बात है| इन्हे यह समझना चाहिए की जनता सब जानती है ऐसी भी क्या सियासत का नशा जिसमे चूर होकर अपने  ही देश की संस्थाओं पे प्रश्न चिह्न लगा दे | 

Friday, 30 December 2016

साइबर सुरक्षा पुख्ता हुए बिना डिजिटल इंडिया का सपना कैसे होगा पूरा

नई दिल्ली/भानु प्रताप: रविवार को यूनियन होम मिनिस्ट्री की वेबसाइट हैक कर ली गयी। जांच के लिए फिलहाल ब्लॉक किया गया। बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान के किसी ग्रुप ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड यानी एनएसजी की वेबसाइट हैक कर ली थी। हैक किए जाने के बाद वेबसाइट पर भारत विरोधी कमेंट पोस्ट कर दिए गए थे।  ऐसे में देश को कैशलैस इकॉनमी के चरण में ले जाने से पहले कुछ मुलभूत सुविधाए ऐसी है। जिन पे सुधार करना जरुरी है। जैसे गाँव-गाँव में बिजली की सुविधा दुरुस्त करना। कैशलेस इकॉनमी और ऑनलाइन ट्रांज़ैकशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अंत में सबसे महत्वपूर्ण अपना एक मजबूत स्वदेशी सर्वर प्रणाली बनाना। जिससे  भविष्य में कैशलेस ट्रांजैकशन से लोगो को परेशानी न हो और साइबर सुरक्षा पुख्ता हो सके।जैसे-जैसे देश इ-बैंकिंग की और बढ़ेगा वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा से सबंधित समस्याए बढेंगी और जब हमारी अपने देश कि सैन्य गुप्त जानकारियाँ हैक हो जाती है। तो तब क्या होगा जब जनता के खातो में से पैसे गायब होने लगेंगे जैसे मोबाइल में सिम क्लोनिंग के जरिये डाटा हैक हो जाता है। परिणाम स्वरूप जनता बहुत जल्दी इस व्यवस्था पे से अपना भरोसा खो बैठेगी।  इसलिए जरुरी है की डीऐनस सर्वर वायरस और ऐसे ही घातक वायरसों से सुरक्षाहेतु एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।  भारत जैसे आईटी हब कहे जाने वाले मुल्कों के लिए यह मुश्किल नही होना चाहिए। और वैसे भी इसे हम इंटरनेट कन्टेंट पे भी काबू  पा सकते है। क्या दिखाना है और  कितना इस पे नियंत्रण पाया जा सकता है। क्योंकि कही ऐसा ना हो जाए की विज्ञान के इस युग में हमारे  देश का हाल भी कुछ-कुछ  टर्मिनेटर फ़िल्म जैसा हो जाए जिसमें  हमे लगता है की विज्ञान हमारा गुलाम है।लेकिन स्थिति विपरीत होने में समय नही लगता की पता चले हम विज्ञान के गुलाम हो गए है। कैशलैस अर्थव्यवस्था जिन विकसित देशो में मौजूद है। उन देशो का अध्यन्न करना होगा और यह भी समझना होगा। की उन्हें अब और पहले किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ताकि हम उनसे सबक लेकर और सीख लेकरअपने देश में लागु करे। डिजिटल इंडिया बनाना तो इन सभी चुनौतियों से निपटना जरुरी है। जिससे केवल डिजिटल इंडिया नही बल्कि सुरक्षित डिजिटल इंडिया बने ऐसी व्यवस्था का विकास हो कि तमाम विकसित देशों के सामने एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत हो सके 

Saturday, 3 December 2016

नोटबंदी से सरकार ने किये तीन शिकार यानी एक अनार तीन बीमार


नोटबंदी प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम है। कालेधन,आतंकवाद,और देश कि अर्थव्यवस्था में बढ़ते जाली नोटों के खिलाफ जिससे जनता को थोड़ी परेशानी तो हो रही है। लेकिन लोग इसके लिए तैयार है। क्योंकि लोग जानते है की कल देश के लेट जाने से अच्छा है। की देश आज लाइन में खड़ा हो जाए और वैसे भी जब हम सब वोट डालने के लिए, अस्पतालों में इलाज के लिए, और जिओ सिम के लिए लाइन में खड़े हो सकते है। तो मुल्क के लिए क्या बुराई है। इसी बीच लेकिन देश की जनता के मन में कई ऐसे सवाल भी  है। जैसे क्या इस कदम से देश में कालधन ख़तम हो जाएगा? क्या बाद में कालाधन पैदा नही होगा? क्या कालाबाज़ारी रुक जायेगी? और इत्यादि। अभी हाल ही में आयकर संसोधन बिल में कुछ बदलावों के साथ लोकसभा में पारित हो गया। जिसके चलते अघोषित आय पर 50 फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन इसने जनता के मन में कई सवाल पैदा कर दिए जैसे की कहीं इस फैसले से सरकार ने कालधन रखने वालो के  लिए एक सुगम रास्ता तो नही दे दिया। या विपक्ष यह पूछ रहा है। की जब यही करना था। तो इतने बड़ा ड्रामा करने की क्या जरुरत थी? खैर विपक्ष का तो काम ही यही है। विपक्ष  अपना विपक्षी धर्म अच्छे से निभारा है और पूरी कोशिश कर रहा है। की लोग सरकार के खिलाफ सड़को पे उतर आये हंगामा करे और किसी तरह यह फैसला प्रधानमन्त्री वापिस ले। फिर चाहे उसके लिए भारत बंद करने का प्रयास ही क्यों ना हो। प्रयास तो विफल हो गया। लेकिन भड़ास निकालने के लिए सदन की कार्यवाही हर दिन स्थगित हो रही है। जिसमे ना जाने रोज़ाना  कितने ही हज़ारों, लाखों रुपयो का नुक्सान हो रहा है। लेकिन कोई यह नही समझ रहा की इस निर्णय के पीछे सरकार का असली मकसद क्या है। दरसल सरकार का मकसद यह नही की देश का सारा कालाधन ख़तम या बर्बाद हो जाए बल्कि यह जितनी ज़्यादा हो सके यह काली अघोषित आये  बैंक खातों तक पहुँच जाए और साथ ही देश भविष्य में कैशलेस अर्थव्यवस्था की और कदम बढ़ाये। और कालाधन सामने आ जाये इसी कारण सरकार ने  50  फीसदी के प्रवाधान के साथ आयकर संधोधन बिल पास किया ताकि यह कालाधन जितना हो सके देश के विकास में काम आये अब उन सवालों का जवाब की इससे कलाधन ख़तम होगा या नही? आतंकवाद पे रोक लगेगी या नही? लेकिन इससे पहले यह समझना होगा की इन सब परेशानियों का मूल कारण क्या था? दरसल इससे पहले भारत अपनी करेंसी छापने के लिए जिस काग़ज का प्रयोग करता था वो बाहर से आता था। और वो जिस देश से आता था। उसी देश से पडोशी देश ने भी समझौता कर लिया  और जाली इंडियन करेंसी छापने लगा। जिसे यह सारी दिकत्ते पैदा हुई और मौजूदा सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। और नए नोट छापने के लिए अत्याधुनिक कागज़ और स्याही का इस्तेमाल करना पड़ा। जिसकी बारीकियों को समझना और नकल करना मुश्किल है। सरकार के इस फैसले से कालाधन पैदा होना समाप्त तो नही होगा। लेकिन कम जरूर  हो जाएगा और और देश के ट्रांसैक्शन प्रणाली में पारदर्शिता आजायेगी और देश डिजिटल ट्रांसैक्शन और प्लास्टिक मनी की लिए प्रेरित होगा। 

Tuesday, 18 October 2016

एक तरफ है सुप्रीम कोर्ट की हूंकार दूसरी तरफ मुस्लिम लॉ बोर्ड का अहंकार

मुस्लिम महिलाओ की कोशिश रंग लाइ और देश की उच्च अदालत ने तीन तलाक के मामले पे सुनवाई करने का निर्णय लिया | और धर्म कि आड़ में तीन तलाक़ के नाम पर  मुस्लिम महिलओं के साथ हो रहे शोषण को बड़ी सख्ती के साथ उजागर किया| लेकिन यह काम अगर पहले हो जाता तो आज हालात कुछ और होते बरहाल
अजीब विडंबना जब कुछ लोग यह कहते है|  इस्लाम में महिलओं को उनका हक जैसी कोई बात लिखी नही है हालांकि मैं इस्लाम का इतना बड़ा कोई ज्ञाता तो हूँ नही यह तो हमारे देश के मौलवी जानते होंगे लेकिन ऐसा हो
नही सकता की कोई मजहब भेदभाव की अनुमति देता हो| यह जरुर हो सकता है की कुछ लोग व्यतिगत फायदे के लिए धर्म के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करे और उसे ही कानून बना दे| जैसा की इस वक़्त देश का मुस्लिम लॉ बोर्ड करने की कोशिश कर रहा है| जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा मुल्क के मुस्लिम समाज को ही हुआ है| जहाँ एक और आजादी की लड़ाई मुस्लिम महिलओं कि भागीद्दारी अधिक थी| उन्होंने बढ़-चढ़कर अपने विचार व्यक्त किये वो आज कहाँ पिछड गयी ? इतना ही नही कुछ ताज़ा सर्व के मुताबिक देश में साक्षरता और पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए है| यहाँ तक की पिछड़े समाज अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति आदि से भी पिछड़े| यहाँ तक की कुछ राज्यों में आरक्षण मिलने के बाद भी मुस्लिम भाई-बहन भी उसका पूरा फयादा नही उठा पाते| जिसके चलते वो ऐसे अब व्यवस्था को भी दोष नही दे सकते| क्यूंकि व्यवस्था तो उन्हें अवसर दे रही है लेकिन वो मौको का लाभ नही ले पा रहे तो इसमें सरकार का क्या दोष| दुसरे धर्मो में भी पहले ऐसी कुछ प्रथाए प्रचलित थी| जो समय के साथ कुप्रथा बन गयी और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे सती प्रथा,बाल-विवाह इत्यादि यदि हिन्दू लॉ बोर्ड भी इन पर अडिग हो जाता तो शायद देश महिलओं के अवस्था और भी बुरी हो जाती| क्यूंकि भगवान् श्री कृषण ने कहा है| कि समय परिवर्तनशील है| मनुष्य को समय के अनुसार आचरण करना चाहिए अर्थात वक़्त के साथ अपने जीवन में बदलाव लाना जरुरी है| जो मनुष्य ऐसा नही करते   वो तबाह हो जाते अर्थात उनका जीवन नष्ट हो जाता है| यहाँ पे मैंने श्रीकृषण का उदाहरण इसलिए दिया है| क्यूंकि इस्लाम के कुछ सूफी संतो का मनान है की मुहम्मद पैगंबर आखरी पैगंबर थे| उनसे पहले बाकी धर्मो में बहुत से पैगंबर हुए है| जैसे जीसस.कृषण.मोसेस आदि| यदि मुस्लिम महिलाये अपने हक चाहती है| और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से निवारण चाहती है| जो इस्लाम ने नही बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बनाई है| तो उनको अपने समाज के लोगो को जागरूक करना होगा तभी बदलाव भी आएगा क्यूंकि मक्का-मदीना जहाँ से इस्लाम कि शुरुआत हुई यानी सऊदी अरब समेत 21 मुसलमान देशो में भी तीन तलाक जैस कोई सिस्टम नही है|



Saturday, 24 September 2016

पाकिस्तान को पहले मानो की है वो आतंकिस्तान वही होगी वीर सपूतो को सच्ची श्रधांजलि

उरी हमले के बाद देश गुस्से में है ज़्यादातर लोग आपको यह कहते मिलेंगे की भारत को पाकिस्तान पे हमला कर देना चाहिए या फिर युद्ध छेड देना चाहिए आर -पार की लडाई होनी चाहिए | मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ | वह भावुक हो कर यह कह रहे| शहीदों के परिवारों पर क्या गुजर रही है| उस दर्द कों भले ही मैं अनुभव ना कर पायूं| लेकिन मेरा ऐसा मानना है की जो लोग परमाणु या फिर आर-पार की लड़ाई  इस तरह  की जो बाते करते है| वो एक बार दोबारा विचार जरुर करे क्यूंकि ऐसी अवस्था में वो लोग जाने-अनजाने में अपनी ना जाने कितनी ही पीढियों को एक अंधकार से भरे भविष्य की और धकेल रहे है| हिरोशिमा और नागासाकी पे जब एटम बम गिराए गये तब से लेके आजतक वहां पे जो बच्चे पैदा होते है| वो किसी ना किसी शारीरिक विकृति से ग्रस्त है| इतनी दूर क्या जाना भोपाल गैस त्रासदी के बारे में तो सब ने सुना ही होगा| जरा वो लोग जो परमाणु युद्ध को  सही मानते है| जाके देखे की भोपाल हादसे के इतने साल बाद भी वहां पे जो पैदा हो रहे है| वो कितने ही प्रकार की शारीरिक रोगों अथवा विकृतियों का शिकार है| भले ही एटमी जंग की सूरत में पाकिस्तान का नामो-निशान क्यों ना मिट जाए लेकिन भारत का भी  कोई  कम नुक्सान नही होगा| और वैसे भी हिन्दुस्तान पहले परमाणु हमला नही करने के वायदे के बंधन में है| तो इन सब स्थितियों को देखते हुए मेरा नज़रिया यह है की परमाणु बम अंतिम विकल्प हो सकता है| लेकिन सिर्फ एक विकल्प नही हो सकता| तो ऐसे में वो कौन से तरीके है जिसे आतंकिस्तान को सबक भी सिखाया जा सके और देश पे भी कोई बड़ी मुसीबत ना आये| यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे तो ऐसे कई तरीके है| लेकिन पहले हमारे मुल्क की सरकारे हमारे नेता आतंकिस्तान पे कोई बड़ा फैसला या पक्ष तो रखे| हर देशवासी की तरफ से मैं यह सवाल पूछना चाहता हूँ| की 70 सालो बाद भी हम यह तय नही कर पा रहे की आतंकिस्तान हमारा दुश्मन है या नही? उल्टा हमने पकिस्तान को सबसे प्रिय मुल्क का दर्जा दे रखा है| यही कारण है की भारत के और उनके राजनेताओं के दौहरे रवैये के चलते अंतराष्ट्रीय
समुदाय पापिस्तान पे कोई भी कड़ी कारवाही करने से पहले दो बार सोचता है|और हिन्दुस्तान द्वारा सैकड़ो बार आतंकिस्तान को बेनक़ाब करने के बावजूद पाकिस्तान को अंतरास्ट्रीय समुदाय की आँखों में धुल झोकने का मौका मिल जाता है| मैं यह कतई नही कह रहा है की राजनेता या सरकारे भ्रस्ट है| कुछ भ्रस्ट हो सकते है| लेकिन ज़्यादातर ठीक-ठाक अच्छे लोग भी है| परंतु खोट हमारी पाक नीति में है| क्यूंकि मैंने देखा है की सभी सरकारों में पाकिस्तान को लेकर बड़ी उलझन रहती है| की पाकिस्तान से रिश्ते सुधारे जाए या नही और जितनी बार  भी हमने रिश्ते सुधारने की कोशिश करी पडोशी ने उतनी ही बार पीठ में छुरा घोंप दिया| अजीब विडंबना है की जहाँ एक और हमारा देश पाक-नीति को लेकर उलझन में रहता है| वंही अमेरिकी संसद में पकिस्तान को आतंकिस्तान  घोषित करने के लिए विधेयक पेश कर दिया जाता है| और यूरोपीय संघ भी पापिस्तान के   के बलूचिस्तान में पापों को देखकर उन्हें चेतावनी जारी कर देता है| इन मुल्को से सबक लेकर हिन्दुस्तान को भी अपनी पाक-नीति में पारदर्शिता रखनी चाहिए| और जब देशवासी और सरकारे यह मानती है की पाकिस्तान एक दुश्मन मुल्क है| तो उसके साथ वैसा ही व्यवाहार करना चाहिए क्यूंकि पापिस्तान की तरफ से यह साफ़ हो चूका है की वह सुधरने वाला नही है| उसे बात की नही लात की भाषा समझ में आती है| बरहाल मुद्दे से हम भटक रहे यह कुछ  वो तरीके जो आतंकिस्तान को बर्बाद कर सकते है| सबसे पहले सभी प्रकार के व्यापारिक,सामरिक और आर्थिक संबंधो का बहिष्कार कर देना चाहिए| क्यूंकि जब हमारे किसान उगाते है तब जाके पाकिस्तान समेत आधी दुनिया का पेट भरता है| हमे अपने दूतावास को अतंकिस्तान से वापिस बुला लेना चाहिए और उनके दूतावास को उनके देश वापिस भेज देना चाहिए यहाँ तक की भारत को आतंकिस्तान के साथ वीज़ा पॉलिसीस को बंद कर देना चाहिए क्यूंकि बड़ी संख्या में पाकिस्तान के लोग अपना इलाज कराने हिन्दुस्तान में आते है| क्यूंकि यहाँ उन्हें बाकी दुनिया से बेहतर सस्ता इलाज पड़ता है| और वैसे भी यह सब कार्य एक प्रक्रिया माने जाते है| जब कोई देश किसी देश को दुश्मन घोषित कर देता है| इन सबसे जो परिणाम निकलेगा वो किसी युद्ध में पाकिस्तान को हराने से भी ज्यादा घातक होगा| जैसे की पाकिस्तान कर्ज में डूबा हुआ देश तमाम  मीडिया और बुद्धिजीविओ कि रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 तक पाकिस्तान दिवालिया मुल्क बन सकता है| जहाँ की आधी से ज्यादा आबादी मूलभूत सुविधाओ के लिए तरसती है| तो आप अंदाज़ा लगा सकते है की ऐसे कदम उठाकर पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई जा सकती है| इसका परिणाम यह होगा की जिस तरह का आंदोलन इस वक़्त पाकिस्तान के बलूचिस्तान के प्रांत में चल रहा है| वहां के लोग आतंकिस्तान से अलग होना चाहते है| वैसे आंदोलन बड़े स्तर पे पाकिस्तान के हर सूबे में शुरू हो जायेंगे लोगो का सरकार के प्रति आक्रोश बढेगा आंतरिक गृह युद्ध के हालात होंगे और पाकिस्तान कई टुकडो में बट जाएगा| जिसे पाकिस्तान का वजूद ही दुनिया के नक़्शे से हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है| तो इसलिए मैं अपने सभी देशवासियों से दरख्वास्त करना चाहूंगा की जिस तरह आप सड़को पे निकलकर पाकिस्तान को मुह्तौड़ जवाब देने का सरकार पे दबाव डाल रहे है| ठीक उसी प्रकार पाकिस्तानी कलाकारों और तमाम लोगो जो हिन्दुस्तान में रहकर कमा रहे है| उनकी फिल्मो का उनके गानों का उनकी किताबो का और उनको देश से भगाने के लिए भी आंदोलन करे और सरकार पे दबाव बनाये की आतंकिस्तान से सभी प्रकार के संबंध ख़तम करे यही उन शहीदों को सच्ची श्रधांजलि होगी|


जय हिन्द 

Sunday, 11 September 2016

पकिस्तान का परमाणु बम ही भविष्य में उसके संपूर्ण विनाश का कारण होगा

उत्तर कोरिया ने पांचवें परमाणु बम के सफल परिक्षण के  बाद दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी| क्यूंकि यह अब तक का उनका सबसे घातक बम साबित हुआ है| कोरियाई मीडिया की माने तो हिरोशिमा और नागासाकी वाले से भी ज़्यादा ताकतवर इतना शक्तिशाली की जिसके द्वारा उत्पन्न हुए झटके पडोशी देश जापान और दक्षिण कोरिया में भी महसूस किये गये| यदि कोरियाई दावे सच है| तो पूरी दुनिया के लिए यह एक गहरी चिंता की बात है| क्यूंकि एक ऐसा मुल्क जिसपे तमाम पाबंदिया है| उसके बाद भी वो लगातार ऐसे परीक्षणों को अंजाम दिए जा रहा है| जहाँ का तानाशाह इतना निरंकुश है| की अपनी सनक में वह कुछ भी कर सकता है| तो इस बात की क्या गारंटी हैकि अपनी सनक के चलते वो इन हथियारो का इस्तेमाल या फिर कोई ऐसा कदम ना उठा ले| जिसके चलते ना केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया पे गहन संकट  पैदा हो जाए| जिसका जिम्मेवार केवल और केवल पाकिस्तान है| क्यूंकि यह बात किसी से गुपि-छुपी नही है| की उत्तर कोरिया को ये टेक्नोलॉजी पाकिस्तान ने मुहैया करायी है|  यह कहना बिलकुल गलत नही होगा की पाकिस्तान बना तो धर्म के नाम पे था| लेकिन चल रहा एटम बम के ऊपर है| वो एटम बम के नाम पर दुनिया को डराता है| एटम बम के नाम पर ही विदेशो से भीख मांगता  है| और इसी से उसकी आर्थिक व्यवस्था भी चल रही है| यानी पाकिस्तान को इस बात का एह्शास ही नही है की यह परमाणु बम उनकी अवाम का खून चूस रहा है| और उन्हें धीरे-धीरे शीत मृत्यु की और ले जा रहा है| यह ऐसी अवस्था होती है| जिसमे मौत कब हो जाती है| पता ही नही चलता यानी मुल्क अंदर से खोकला हो जाता है| अच्छा यह तो हुआ पहला  पहलु दूसरा  पहलु यह है की एक नामी-ग्रामी विदेशी अखबार के मुताबिक इस वक्त पाकिस्तान के पास भारत से भी अधिक परमाणु हथियार है| और वो हर साल अपने इस प्रोग्राम को बड़ी मात्रा बढ़ा रहा है| वो अपने न्यूक्लियर अड्डो को पुख्ता सुरक्षा दे तो पा रहा है| लेकिन उसकी
सुरक्षा अभेद नही है| अखबार की इस दलील के बाद मेरा नज़रिया यह है की पाकिस्तान भले ही कितनी भी उत्तम सुरक्षा क्यों ना मुहैया करा रहा हो| लेकिन इससे उसे दोतरफा नुक्सान ही हो रहा है| पहला हर  बढ़ते परमाणु परियोजना के साथ नाचाहकर भी पाकिस्तान अपने नागरिको की मूलभूत सुख-सुविधाओं के साथ जों हर नागरिक का अधिकार होती है| उनके साथ समझौता कर रहा है| क्यूंकि पुरानी कहावत है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है| दूसरा यह है की यदि  पाकिस्तान ऐसे ही अपनी परियोजना में विस्तार करता रहा तो एक वक़्त ऐसा आयेगा की अधिकतम सीमा के बाद वो सुरक्षा मुहैया करने में असक्षम होगा| जिसे आतंकवादियों के हाथ इस तक पहुँचने आसान हो जायेंगे| और यदि ऐसा हुआ तो ना चाहकर भी समस्त दुनिया को  पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कारवाही करनी ही पड़ेगी जिसे पाकिस्तान का वजूद भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है|