Saturday, 26 September 2015

रक्षाक्षेत्र में महिलाओ की कम उपस्थिति ही उन पर बढ़ते अत्याचारों का मुख्य कारण है


आज -कल दिन -प्रतिदिन महिलाओ पे अत्याचार बढ़ता ही जारा है सायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब हम अखबारों या टी.वी में महिलाओ से किये गए दुष्कर्म की कोई खबर ना सुनते हो पर किसी ने यह जाने की कोशिश की है की ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों  महिलाये  रोज़ाना किसी अपराध का शिकार हो रही है? इसकी  सबसे बड़ी वजह सरकार की विफल नीतियाँ तो है ही लेकिन हम भी उतने ही जिम्मेवार है जितना की सरकार आखिर क्या सीखा हमने दिल्ली गैंगरेप हादसे के बाद? क्या हमने उसे कोई सबक लिया? केवल सख्त कानून बनाने से बदलाव नहीं आएगा बदलाव तब आएगा जब हम उन कानूनों को सुचारू रूप से लागू करे और साथ ही साथ महिलाओ को सशक्त बनाने की और काम करे क्यूंकि इन बढ़ते अपराधो की एक और बड़ी वजह यह है की हम महिलाओ को बराबरी का अधिकार नहीं देते कोई बता सकता है की हमारे देश में कितने ऐसे थाने है जो महिलाओ के अंडर है या कितने ही थाने है जहाँ पुरुष महिलाओ के अंडर काम करते है सिर्फ केरला ही एक मात्र  ऐसा राज्य है जहाँ पे स्पेशल वीमेन पुलिस स्टेशन है आज जब महिलाये हर क्षेत्र में पुरुषो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है तो डिफेन्स में क्यों नही डिफेन्स में महिलाओ की कम उपस्थिति ही इस दुर्गम स्थिति का मुख्य कारण है क्यूंकि इसकी वजह से समाज में संवेदनशीलता समाप्त होती जा रही है जिसे महिलाओ के प्रति अत्याचार बढ़ रहा है यदि हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में महिलाओ की भर्ती रक्षाक्षेत्र में करते है और उनके अधिकार बढ़ा देते है तो ना केवल उनके प्रति अपराध कम होगा बल्कि समाज में महिलाओ के प्रति कम होती संवेदनशीलता बढ़ेगी बल्कि महिलाओ के प्रति सम्मान भी बढेगा और धीरे-धीरे यह दुर्गम स्थिति ख़तम हो जाएगी और महिला सशक्तिकरण का सूर्योदय होगा जिसकी आज देश को बहुत आव्यशकता है क्यूंकि जिस देश में महिलाओ का सम्मान  नही होगा वह देश कभी विकास की और नही बढ़ पायेगा



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