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Friday, 30 October 2015

बीफ पर गरमाती राजनीती बिगड़ते हालात

आजकल देश में बड़ी समस्यओं को दरकिनार कर सारा ध्यान बीफ पर आकर टिक चूका है अब तो आलम यह है की बिहार चुनावो में भी तमाम अहम् मुदो को दरकिनार कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाये इस पर जनता से अधिक मतदान करने को कहा जा रहा है तमाम राजनितिक दल चुनाव जितने के चक्कर में बिजली,पानी ,सडको को भुला कर गाय के मुद्दे को जनता के सामने बढ़ा-चढ़ाके पेश कर रहे है और तमाम साधु-संत समाज भी इस बात पे अड़ गया है की शेर की जगह गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाये और गो हत्या पे प्रतिबंध लगाया जाये उनका कहना है की इसी से गायो को बचाया जा सकता है और उनका यह भी कहना है की गाय हमारी माता है उसकी हत्या करना पाप है जो गाय की हत्या करता है उसके सारे वंश का सर्वनाश हो जाता है मैं भी उनकी बात से सहमत हूँ की गायो को बचाया जाना चाहिए और उनकी हत्या पे प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए बिलकुल सही है लेकिन क्या गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से उनकी हत्या पे रोक लग जाएगी नही ऐसा बिलकुल नही होगा क्यूंकि यदि ऐसा होता तो शायद भारत में शेरो की संख्या ज्यादा होती उनको बचाने के लिए अलग से अभियान चलाना नही पड़ता यदि हम गयो को वाकई बचाना चाहते है तो शांतिपूर्वक ठोस कदम उठाने होंगे ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि समाज के कुछ ठेकेदार अपना उल्लू सीधा करने के लिए गोहत्या के नाम पर देश में सांप्रदायिकता का माहौल पैदा कर रहे है भाई-भाइयो को आपस में लड़वा रहे है यदि हम गाय को अपनी माता मानते है तो सोचिये जरा की उस माँ को कैसा लगता होगा जब उसके बच्चे एक दुसरे का खून बहाने को उतारू है क्या बीतती होगी उसके मन में कभी सोचा है हमने बस दुसरो की बातो में आकर बिना कुछ सोचे-समझे कोई गलत कदम उठा लेते है जिसे अंत में किसी को भी लाभ नही पहुँचता दोस्तों पुरे दुनिया में केवल भारत ही एक ऐसा देश है जिसने अपनी संस्कृति सालो से संजो कर रखी है जिसे उसका पूरी दुनिया में नाम हुआ है हमे अपनी इस संस्कृति को गवाना नही है क्यूंकि यही हमे आगे चलकर उज्जल भविष्य की और लेकर जायेगी इसलिए मैं आप सबसे यह कहना चाहूँगा की ऐसी किसी भी बात या घटना को अनसुना कर दे जो देश में जानबूझकर सांप्रदायिक घटनाओ को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है आपस में भाईचारे और प्रेम से रहे है क्यूंकि इसे किसी को भी नुकसान नही पहुंचता और इसी मार्ग पे चल कर ही देश का भला हो सकता है जय हिन्द............

Tuesday, 20 October 2015

बढ़ता प्रदूषण बढती परेशानियाँ

जी हां दोस्तों दिनो-दिन प्रदूषण बढ़ता ही जारा है जिसे लोगो को अपनी रोज़मरा की जिंदगी में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और सबसे चौकाने वाली बात तो यह है की राजधानी दिल्ली प्रदूषण के मामले में सबसे आगे निकल चुकी है मतलब दुनिया के तमाम प्रदूषित शहरों  में से दिल्ली प्रथम स्थान पर है उसने चीन के बिजिंग शहर को भी पीछे छोड़ दिया यदि हमने अभी कुछ नही किया तो यह स्थिति एक भयानक भविष्य की और ले जाएगी अभी जितनी मौते डेंगू और मलेरिया से नही होती उसे कहीं ज्यादा  तो हर साल सांस की बीमारियों से हो जाती है रोजाना हजारों की तादाद में लोग अस्पतालों में साँस की बीमारियों के चलते भर्ती हो रहे है जिसमे सबसे प्रमुख है अस्थमा के मरीज केवल अस्थमा ही नही बल्कि और भी ऐसी जानलेवा बीमारियाँ है जो लोगों को कष्ट दे रही है जैसे की दमा, कैंसर इत्यादि दिल्ली सरकार केवल अपनी सारी गलतियों का ठीकरा केंद्र सरकार पे फोडती रहती है वह दिल्ली पुलिस को राज्य को देने के लिए केंद्र से रोज लडती रहती है लेकिन शायद सताह के नशे में चूर दिल्ली सरकार का ध्यान इस बढती मुसीबत की और नही जारा है यहाँ लोग प्रदूषण से होने वाली बीमारियाँ और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों से लोग परेशान है लेकिन दिल्ली सरकार तीसरा मोर्चा बनाने में व्यस्त है अरे जमीन और कानून जैसे कुछ चुनिंदा कानून उसके दायरे से बहार है लेकिन बाकी सारे कानून तो उसके दायरे के अंदर है ना तो क्यों नही इस स्थिति पर काबू करने लायक नीतियाँ बनाने की वजाए केंद्र से झगड़ने में व्यस्त है ऐसे कुछ तामाम कानून है जिन्हें लागु करने से इस परेशानी से निजात दिलाने में सक्षम है जैसे दिल्ली में भी राजस्थान की तर्ज पे "रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम" लागु किया जाना चाहिए बारिश के पानी को बचाने के लिए टैंक्स,तालाब यमुना की साफ़-सफाई आदि,प्रदूषण करने वाले वाहनों पर सख्त जुरमाना एवंम सजा दोनों होनी चाहिए इन सभी चीजो को लागु कर स्थिति काबू में लायी  जा सकती है तो इसलिए मैं विनती करता हूँ की इस समस्या को जड़ से ख़तम करने हेतु हमे अपने स्तर पर और सरकार अपने स्तर पर कुछ ठोस कदम उठाये और जनता को इस समस्या से जितनी जल्दी हो सके राहत दिलाये यदि इस साल स्व हम दिवाली पे पटाखों का उपयोग करना कम करे और धीरे इनका इस्तेमाल बंद ही कर दे तो आपको प्रदूषण की मात्र में भरी गिरावट देखने को मिलेगी क्यूंकि हर साल दिवाली के नाम पे हम अपने वातावरण की हालत बद से बदतर करते जा रहे है इसकी वजाए हम बड़े स्तर पे पौधारोपण पे ध्यान दे स्थिति को काबू में लाया जा सकता है साथ ही हमे जरुरत है की भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले वाहनों का प्रोत्शाहन करे जिसे की हमारा वातावरण स्वच्छ और साफ़ हो सके और हम इस धरती की बुझी हुई लौ को दोबारा से प्रजोलित्त कर सके

Saturday, 10 October 2015

आक्रामकता ही बचाव का सही उपाय है

जी हां दोस्तों पिछले कुछ दिनों में भारतीय सेना ने चीनी सेनाओ को जो तेवर दिखाए है उसे हर हिन्दुस्तानी का मन गद-गद हो उठा है भारतीय सेना ने चीनी सेना के पसीने ही छुड़ा दिए वर्ना तो यही देखने को मिलता था की चीनी सैनिको ने भारतीय सीमा के अंदर तक घुस आय और अपने टेंट लगा दिए और भारतीय सेना ने कुछ नही किया लेकिन अब जो आक्रामकता भारतीय सेना दिखा रही है वह सही है और उसे वैसे ही रहना चाहिए इस स्थिति के पीछे मौजूदा सरकार का भी बहुत बड़ा योगदान है वर्ना पिछली सरकारों में तो सैनिक केवल दबाव में ही नज़र आते थे वह चाहकर भी कुछ नही कर पाते थे उदहारण के तौर पे मेरे एक रिश्तेदार जो आर्मी में है वह बताते थे की जब लदाख में चीन से सटी भारतीय सीमओं पर जब चीनी सैनिक अपने टेंट गाड़ दिया करते थे और भारतीय सैनिक उन्हें हटाने का प्रयास करते थे तो उनके बड़े अफसरों द्वारा ऐसा करने के लिए मना कर दिया जाता था क्यूंकि उन बड़े अफसरों को भी सरकार से ऐसे ही आदेश मिलते थे और भारतीय सेना के हाथो को बाँध रखा था लेकिन मौजूदा सरकार की रक्षा-नीतियों से सैनिक बहुत खुश है और उनमे एक नया आत्मविश्वास अलग ही देखा जा सकता है जिसकी पहले भारतीय सेना में बहुत कमी दिखाई देती थी यदि भारतीय सैनिक इन्ही तेवरों के साथ चीनी सेना से मोर्चा लेंगे तो चीनी सैनिको को ना चाहते हुए भी अपनी नीतियाँ बदलनी पड़ेगी क्यूंकि यह तो सभी जानते है की दोनों ही देश परमाणु युक्त है इसलिए दोनों में से कोई भी देश युद्ध जैसी संभावना नही चाहेगा क्यूंकि इसे दोनों के ही वजूद को खतरा है इसलिए युद्ध का तो कोई सवाल ही पैदा नही होता चीन केवल ऐसी चालबाजियों से भारत को दबाव में रखना चाहता है लेकिन भारत को दबाव में आने की जरुरत नही है बल्कि आक्रामकता के साथ उसका जवाब देना चाहिए अब वह समय आ चूका है जब भारत न तो आँख उठाके और ना ही आँख झुकाके बल्कि भारत बात करेगा आँखों में आँखें डालके

Tuesday, 6 October 2015

कौन कहता है की राक्षस बुरे होते है कुछ राक्षस अच्छे भी होते है

जी हां दोस्तों राक्षस बुरे नही होते बल्कि अच्छे भी होते है ऐसा कहना है रावण,मेघनाथ और कुंभकरण बनाने वाले कारीगर मोहन लाल का जिनके साथ हमने बीताया एक दिन और जाना उनके जीवानुभवो के बारे में  उन्होंने बताया की भगवान नही बल्कि दैत्यराज रावण उनकी रोज़ी रोटी का जरिया है रावण,मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाकर वह अपनी गुजर-बसर करते है और एक पुतला तक़रीबन 10,000रूपए से लेकर 20,000रूपए तक बिक जाता है और वह यह काम झाडी के हिसाब से करते है और उनका लगभग सारा परिवार इस काम में शामिल है हमने उनसे तमाम सवाल पूछे जैसे की रावण कैसे बनता है? और एक पुतला कितने दिनों में तैयार हो जाता है? तो उन्होंने बताया की एक पुतले को बने में तीन से चार दिन लगते है उन्होंने इसके बने की पूरी प्रक्रिया हमे बताई जैसे पहले लकडियों से ढांचा तैयार किया जाता है उसके बाद उस ढांचे को मजबूती से जोड़ने के लिए उस पर एक तरह का खास गोंद लगाया जाता है और बाद में उसे सूखने के लिए रख दिया जाता है सूखने के बाद अंत में उसपे रंग किया जाता है तथा उसके अंदर पटाके लगाये जाते है इस तरह से एक पुतला तैयार होता है फिर जब हमने उनसे पूछा की यह काम तो केवल एक या दो महीने के लिए ही होता है लेकिन उनके पक्के रोज़गार का जरिया क्या है तो इस पे उन्होंने बताया की वो मजदूर है और मजदूरी उनके रोज़ी-रोटी कमाने का पक्का जरिया है लेकिन उनका यह भी कहना था की जितनी बचत उन्हें इस काम में होती है उतनी रोज़मरा की मजदूरी से नही होती तो अंतता: उनके इन सभी संघर्षो को जानकर हम यह कह सकते है की केवल देवता ही नही बल्कि दैत्य भी पूजने योग्य है क्यूंकि इन मजदूरों का पेट भगवान श्रीराम के नाम से नही बल्कि दैत्यराज रावण के पुतलो से भरता है 

Friday, 2 October 2015

क्या डेंगू के बढ़ते प्रकोप को स्वच्छ्ता अभियान की सफलता माना जाये ?

जी हाँ दोस्तों हमारे सामने जब यह सवाल खड़ा होता है तो इसका जवाब यही है की स्वच्छ्ता अभियान से देश को फायदा हुआ हो या ना हुआ हो लेकिन लगता है डेंगू को जरुर हुआ क्यूंकि डेंगू का मछर गंदे पानी में तो पनपता नही वह तो साफ़ पानी में ही पनपता है इस देश का तो भगवान ही मालिक है जहाँ बड़े-बड़े फ़िल्मी सितारों से लेकर संसद भवन जैसी जगहों पर डेंगू का लार्वा पाया गया है जिसे की स्वच्छ्ता अभियान की असलियत खुलके सामने आ जाती है डेंगू के कारण रोजाना हजारों की तादाद में लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे है और दिनों-दिन डेंगू के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जारा है जिसमे केंद्र और राज्य सरकार दोनों का ही दोष है क्यूंकि जब तक सर पे तलवार न लटकी हो तब तक प्रशाशन की आँखें खुलती ही नही डेंगू से निपटने के लिए अस्पतालों में जो इंतजाम अब किये जा रहे है वो अगर  पहले ही कर लिए जाते तो शायद हालात काबू में होते लेकिन नही केंद्र और राज्य सरकारों को एक दुसरे पर आरोप लगाने आपस में लड़ने से ही फुर्सत नही मिल रही है जिसकी वजह से जनता को भुगतना पड़  रहा है केवल झाड़ू लगाते हुए फोटो खिचवालेने से स्वच्छ्ता अभियान सफल नही होगा बल्कि वो तो हम सभी के प्रयासों पर निर्भर है इसलिए मेरी केंद्र और राज्य सरकार दोनों से अपील है की आपस में एक दुसरे  पे आरोप न लगाके आपसी तालमेल से काम करे तभी स्वच्छ्ता अभियान सफल हो पायेगा और भारत स्वच्छ बन पायेगा