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Saturday, 10 October 2015

आक्रामकता ही बचाव का सही उपाय है

जी हां दोस्तों पिछले कुछ दिनों में भारतीय सेना ने चीनी सेनाओ को जो तेवर दिखाए है उसे हर हिन्दुस्तानी का मन गद-गद हो उठा है भारतीय सेना ने चीनी सेना के पसीने ही छुड़ा दिए वर्ना तो यही देखने को मिलता था की चीनी सैनिको ने भारतीय सीमा के अंदर तक घुस आय और अपने टेंट लगा दिए और भारतीय सेना ने कुछ नही किया लेकिन अब जो आक्रामकता भारतीय सेना दिखा रही है वह सही है और उसे वैसे ही रहना चाहिए इस स्थिति के पीछे मौजूदा सरकार का भी बहुत बड़ा योगदान है वर्ना पिछली सरकारों में तो सैनिक केवल दबाव में ही नज़र आते थे वह चाहकर भी कुछ नही कर पाते थे उदहारण के तौर पे मेरे एक रिश्तेदार जो आर्मी में है वह बताते थे की जब लदाख में चीन से सटी भारतीय सीमओं पर जब चीनी सैनिक अपने टेंट गाड़ दिया करते थे और भारतीय सैनिक उन्हें हटाने का प्रयास करते थे तो उनके बड़े अफसरों द्वारा ऐसा करने के लिए मना कर दिया जाता था क्यूंकि उन बड़े अफसरों को भी सरकार से ऐसे ही आदेश मिलते थे और भारतीय सेना के हाथो को बाँध रखा था लेकिन मौजूदा सरकार की रक्षा-नीतियों से सैनिक बहुत खुश है और उनमे एक नया आत्मविश्वास अलग ही देखा जा सकता है जिसकी पहले भारतीय सेना में बहुत कमी दिखाई देती थी यदि भारतीय सैनिक इन्ही तेवरों के साथ चीनी सेना से मोर्चा लेंगे तो चीनी सैनिको को ना चाहते हुए भी अपनी नीतियाँ बदलनी पड़ेगी क्यूंकि यह तो सभी जानते है की दोनों ही देश परमाणु युक्त है इसलिए दोनों में से कोई भी देश युद्ध जैसी संभावना नही चाहेगा क्यूंकि इसे दोनों के ही वजूद को खतरा है इसलिए युद्ध का तो कोई सवाल ही पैदा नही होता चीन केवल ऐसी चालबाजियों से भारत को दबाव में रखना चाहता है लेकिन भारत को दबाव में आने की जरुरत नही है बल्कि आक्रामकता के साथ उसका जवाब देना चाहिए अब वह समय आ चूका है जब भारत न तो आँख उठाके और ना ही आँख झुकाके बल्कि भारत बात करेगा आँखों में आँखें डालके
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