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Tuesday, 6 October 2015

कौन कहता है की राक्षस बुरे होते है कुछ राक्षस अच्छे भी होते है

जी हां दोस्तों राक्षस बुरे नही होते बल्कि अच्छे भी होते है ऐसा कहना है रावण,मेघनाथ और कुंभकरण बनाने वाले कारीगर मोहन लाल का जिनके साथ हमने बीताया एक दिन और जाना उनके जीवानुभवो के बारे में  उन्होंने बताया की भगवान नही बल्कि दैत्यराज रावण उनकी रोज़ी रोटी का जरिया है रावण,मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाकर वह अपनी गुजर-बसर करते है और एक पुतला तक़रीबन 10,000रूपए से लेकर 20,000रूपए तक बिक जाता है और वह यह काम झाडी के हिसाब से करते है और उनका लगभग सारा परिवार इस काम में शामिल है हमने उनसे तमाम सवाल पूछे जैसे की रावण कैसे बनता है? और एक पुतला कितने दिनों में तैयार हो जाता है? तो उन्होंने बताया की एक पुतले को बने में तीन से चार दिन लगते है उन्होंने इसके बने की पूरी प्रक्रिया हमे बताई जैसे पहले लकडियों से ढांचा तैयार किया जाता है उसके बाद उस ढांचे को मजबूती से जोड़ने के लिए उस पर एक तरह का खास गोंद लगाया जाता है और बाद में उसे सूखने के लिए रख दिया जाता है सूखने के बाद अंत में उसपे रंग किया जाता है तथा उसके अंदर पटाके लगाये जाते है इस तरह से एक पुतला तैयार होता है फिर जब हमने उनसे पूछा की यह काम तो केवल एक या दो महीने के लिए ही होता है लेकिन उनके पक्के रोज़गार का जरिया क्या है तो इस पे उन्होंने बताया की वो मजदूर है और मजदूरी उनके रोज़ी-रोटी कमाने का पक्का जरिया है लेकिन उनका यह भी कहना था की जितनी बचत उन्हें इस काम में होती है उतनी रोज़मरा की मजदूरी से नही होती तो अंतता: उनके इन सभी संघर्षो को जानकर हम यह कह सकते है की केवल देवता ही नही बल्कि दैत्य भी पूजने योग्य है क्यूंकि इन मजदूरों का पेट भगवान श्रीराम के नाम से नही बल्कि दैत्यराज रावण के पुतलो से भरता है 
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