Monday, 30 November 2015

पिता की डांट के कारण 13 साल के बेटे ने की आत्म-हत्या दोषी कौन? बाप या बेटा आप ही कीजिये फैसला

पिता की डांट से तंग आकर 13 साल के बेटे ने बाथरूम में खुद को फांसी लगा ली पिता का दोष सिर्फ इतना था की उसने बेटे को खेलने-कूदने से मना करके पढने को कहा जिसके चलते बेटे ने आत्म-हत्या करली अब यहाँ पे सवाल यह उठता है की गलती किसकी है बेटे की या बाप की बेशक आप लोग कहेंगे की बेटे की गलती है लेकिन मेरा नज़रिया  आप सभी से थोडा अलग है मेरी नज़रो में तो माँ-बाप भी उतने ही दोषी है जितना की बेटा कारण है की सही समय पे डांटा होता तो आज शायद यह दिन नही देखना पड़ता क्यूंकि कोई भी चीज समय रहते कर ली जाए तो उसके परिणाम हमेशा सुगम ही निकलते दोस्तों एक शोध के अनुसार यह पता चला है की चीन और जापान के माता-पिता दुनिया के सबसे अच्छे माता-पिता माने जाते है कारण है की वह हमेशा अपने बच्चो के साथ सही समय पे सही चीज करते है उदहारण के तौर पे हमारे भारत में जब बच्चा 10 रूपए चुराता है तो माँ-बाप यह सोच कर नज़रअंदाज़ कर देते है की बच्चा अभी छोटा है बड़ा  होगा तो  समझ जायेगा और उसकी गलतियों पे पर्दा डाल देते है वही दूसरी तरफ  यही  गलती अगर चीन या जापान में जब कोई बच्चा करता है तो उनके माँ-बाप उसी समय उस गलती को नज़रअंदाज नही करके उसे सख्ती से समझाते है और उसे टोकते है जब की हमारे भारत में माँ-बाप ऐसा कुछ नही करते वह यह सोच कर नज़रंदाज़ कर देते है की 10 रूपए ही चुराय है अभी छोटा है जब बड़ा होगा तो अपने आप समझ जाएगा अरे वह यह क्यूँ नही समझते की वो बच्चा है कोई भगवान नही जो अपने आप समझ जाएगा अरे जब तक आप उसे नही समझायेंगे तब तक वो कैसे समझेगा अगर आज वो 10 रूपए चुरा रहा है तो हो सकता है आपकी न्ज़रंदाज़ी को यह ना समझने लग जाये की वह जो कर रहा है उसमे कुछ गलत नही है और कल को वो 10 रूपए की बजे 10,000 चुराने लग जाये क्यूंकि आपने तो बचपन में उसे रोका नही और अब वो खुद रुकने को तैयार नही ठीक उसी प्रकार यहाँ पे भी अगर पिता बच्चे को यही डांट उसे थोड़ी और पहले बचपन में ही मार दी होती तो शायद उन्हें आज यह दिन नही देखना पड़ता यहाँ में किसी का पक्षपात नही ले रहा हूँ केवल सही बात बताने की कोशिश कर रहा हूँ क्यूंकि जिस तरह एक पौधे को सही मात्रा  में खाघ और पानी मिलने के बाद एक फलता-फूलता पेड़ तैयार होता है ठीक उसी प्रकार सही समय पे डाँटने से बच्चो का भी सही मानसिक विकास होता है इसलिए मेरी सभी माता-पिताओ से  विनती है  की अपने बच्चो की गलतियों को नज़रंदाज़ करने की वजाए उन्हें रोक कर उन्हें उन्ही की भाषा में समझाए फिर चाहे वे उम्र के किसी भी पड़ाव पर क्यूँ न हो 

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