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Friday, 18 December 2015

पुराने ग्रंथो में छिपा है महिलाओ के प्रति बढ़ते अपराधो को कम करने का राज़

16 दिसंबर 2012 की वह दुखद घटना शायद ही कोई भूल पाया होगा आज उस हादसे के बाद क्या दिल्ली या फिर यु कहे देश के हालात बेहतर हुए है? क्या राजधानी और देश महिलाओ सुरक्षित हो पाए है ? क्या वह बेफिक्र रात में कहीं भी आ जा सकती है यदि आप मेरे से पूछेंगे तो शायद नही कुछ नही बदला है बल्कि उस वारदात के बाद से इस तरह की वारदाते बढती चली गयी चाहे उबेर टैक्सी काण्ड हो या 7 साल की नाबालिग से बदसलूकी कर उसे पार्क में अकेले छोड़ देना इस तरह की वारदाते प्रशाशन की लाचारी को दर्शाती है तीन साल पहले हुए उस हादसे के बाद बड़े-बड़े वादे किये गए थे की दिल्ली और देश दोनों को महिलाओ के लिए सुरक्षित बनाएगे महिलाये बेफिक्र कहीं भी आ-जा सकिंगी लेकिन वह सब वादे केवल इतिहास के पन्नो में धुल बनके रह गए और स्थिति बद से बदतर होती चली गयी महिलाओ के साथ होते अपराध घटने की बजाये उल्टा बढ़ते ही चले गये जिसके कई कारण है केवल प्रशाशन अकेला ही इसके लिए जिम्मेवार नही बल्कि हमारा भी दोष है आप कितने भी सख्त कानून बना ली जिए कितने भी होम गार्ड्स बसों में तैनात कर लीजिये लेकिन यह वारदाते तब तक ख़तम नही होगी जब तक लोगो के मन में व्याप्त संवेदनशीलता दोबारा जाग नही उठती जिसका उदहारण है बलात्कार के बाद बस में उस महिला के साथ की गयी दरिंदगी  जिसका मुख्य कारण यह है की आजकल हम बच्चो के शैक्षिक विकास पे तो ध्यान देते है लेकिन उनके चारित्रिक विकास की और ध्यान देना भूल जाते है जिसकी वजह से आज यह अपराध हो रहे है पता है की जब कुछ साधू संत यह कहते है की स्कूलों में अंग्रेजी किताबो के साथ भगवदगीता या रामायण जैसे ग्रन्थ भी पढाये जाने चाहिए तो शायद मेरी नज़रो में कम से कम  इसमें कुछ गलत तो है नही आप सब की कुछ अलग राये हो सकती है क्यूंकि बच्चो के अच्छे चारित्रिक विकास के लिए उनके सामने मर्यादा पुरषोत्तम राम या भगवन श्रीकृष्ण जैसी प्रेरणा को उनके सामने रखना होगा तभी वह पहले अपने जीवन में कुछ भी बने से पहले एक अच्छा इंसान बने की कोशिश करेंगे आप लोग शायद यह पढ़कर सोचेंगे की तो क्या इसका मतलब हम इतिहास की और भागे या फिर रुढ़िवादी बन जाये नही मैं ऐसा कुछ नही ख रहा हूँ लेकिन कुछ समस्यओं का हल जैसे मनुष्य का अच्छा चारित्रिक विकास इन ग्रंथो के जरिये ही पूरा किया जा सकता है जब हम बच्चो बचपन से ही अच्छी चीजे सिखायेंगे तभी वह अच्छे इंसान बन पाएंगे वो कहते है ना सही देखभाल से ही पौधा पेड़ बनता है ठीक उसी प्रकार ऐसी वारदातों को कम करने के लिए हमे अपने युवाओ की सही शिक्षा देनी होगी और उन्हें महिलाओ के प्रति संवेदनशील बनाना होगा जिसमे शायद यह ग्रन्थ एक अहम् भूमिका निभा सकते है   
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