Thursday, 14 January 2016

विनाशकाले विपरीत बुद्धि

अब तो इसी कहावत से गोवा सरकार को बुलाना पड़ेगा क्यूंकि भैया इन्होने तो पेड़ को पेड़ ही मानने से इनकार कर दिया और अपना उल्लू सीधा करने के लिए कह दिया की पूर्व सरकार ने नारियल के पेड़ को गलती से पेड़ो की सूची में डाल दिया था क्यूँ भाई क्या नारियल का पेड़ फल नही देता? उस फल के अन्दर रस नही होता क्या नारियल का पेड़ ऑक्सीजन नही देता? क्या वो और पेड़ो की तरह कार्बनडाइऑक्साइड नही लेता? तो फिर कैसे कह दिया की नारियल के पेड़ के अन्दर जैविक गुण नही होते यहाँ पे मुद्दा यह नही की नारियल का पेड़ पेड़ होता है की नही बल्कि देखने वाली बात यह है की गोवा में विकास के लिए नारियल के पेड़ो की कटाई का रास्ता साफ़ करना चाहते है क्या विकास के लिए यही एक मात्र उपाय रह गया है ऐसे बचायेंगे धरती को पेरिस में जाकर जहाँ एक और सारी दुनिया धरती के वातावरण को लेकर चिंतित है धरती के वातावरण को शुद्ध करने के लिए निम्न उपाय किये जा रहे है वही दूसरी और आप लोग औधोगीकरण के लिए पेड़ो को काटना चाहते है ऐसे होगा क्या धरती का वातावरण शुद्ध अभी भी यह बात समझ में नही आ रही की पेड़ो की इतनी कटाई से धरती की हालत आज ऐसी है की मनुष्य को लेने के लिए शुद्ध हवा नही मिल पा रही है और आप उल्टा अधिक से अधिक पेड़ लगाने की बजाये काटना चाहते है इसलिए जरा मेरी गोवा ही नही सभी प्रदेश सरकारों से यह विनती है की विकास के लिए ऐसे विकल्प सोचिये जिसे की धरती के वातावरण को जरा भी हानि ना पहुँच सके पेड़ काटने की बजाये पेड़ लगाने का प्रयाश कीजिये क्यूंकि अधिक से अधिक पेड़ लगाने से ही वातावरण शुद्ध हो पायेगा क्यूंकि यह पेड़ कार्बनडाइऑक्साइड जैसी ज़हरीली गैस को लेते है मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखते है और ख़ास कर नारियल का पेड़ तो डेंगू और उसके ही जैसी जानलेवा बीमारियों के लिए बहुत ही उपयोगी इसलिए इन  पेड़ो को तो काटने के बारे में सोचिये भी मत  इसीलिए पेड़ काटने की बजाये अधिक से पेड़ लगाइए और दुनिया भर को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कीजिये क्यूंकि यदि पेड़ ही नही रहेंगे तो इस धरती पे जीवन की कल्पना भी नही की जा सकेगी 
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