Saturday, 27 February 2016

विपक्ष की गलत नीतियों से देश को हो रहा है नुक्सान

केंद्र हो या राज्य कोई भी राजनितिक दल विपक्ष में नही आना चाहता सबको सताह में रहने का जुनून सवार है जिसके फलस्वरुप पिछले कुछ सालो में राजनितिक दलों ने विपक्ष की परिभाषा को बदलकर केवल विद्रोह कर दिया यानि विपक्ष मतलब विद्रोह जिसमे देश और देशवासियों का सबसे ज्यादा नुक्सान पहुँच रहा है कोई भी हारना नही चाहता हर किसी को जीतना है जिसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े यही कारण है की आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारा देश विकाशशील से विकसित नही हो पाया क्यूंकि हमारे यहाँ राजनितिक दल पहले अपना स्वार्थ देखते है उसके बाद फुर्सत मिल जाये तो देश यानी 1पार्टी 2नेशन की नीति अपना रखी है जिसकी वजह से आप देखते होंगे मुद्दा बड़ा हो या छोटा विपक्ष कभी भी विद्रोह करने से नही चुकता उदहारण के तौर पे हाल ही में जितने भी बड़े मुद्दे देश में हुए जैसे जाट आन्दोलन,जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में हुआ काण्ड,जीऐसटी बिल इत्यादि इन सभी मुद्दों पे विपक्ष ने अपने स्वार्थ के लिए जितनी राजनितिक रोटियां शेकी है  उतनी राजनीती तो मौजूदा सरकार ने भी नही करी हमारे यहाँ लोकतंत्र में विपक्ष कि अपनी  महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती है जिसे वह सरकार की गलत नीतियों या फैसलों का विरोध कर सके लेकिन हाल ही में विपक्ष ने सरकार की सहायता नही बल्कि देश को तोड़ने का काम किया है जैसे जेएनयू में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी देशद्रोही से जाकर मिले जिसे जनता में आक्रोश बढ़ गया ,जाट आन्दोलन के दौरान भीड़ को भड़काकर और ज्यादा दंगे-फ़साद करना जिसमे कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओ के होने का शक है और अरविन्द केजरीवाल का कारण और अकारण हर बात के लिए केंद्र को दोषी ठहराना इत्यादि यह सभी दर्शाता है की किस तरह विपक्ष देश के विकास में सहयोग की बजाये बाधा बने का कार्य किया बल्कि विपक्ष का कार्य होता है सरकार की गलत नीतियों और फैसलों का विरोध कर विकास में सहयोग करना और सरकार की अच्छी  नीतियों और फैसलों का स्वागत करना कांग्रेस और सहयोगी विपक्ष ने भूमिअधिक्रण बिल पे जो किया उसे किसानो को काफी लाभ हुआ उन्होंने सरकार की गलत नीतियों को जनता के सामने उजागर किया लेकिन उन्होंने जब सरकार के अच्छी नीतियों और कार्यो को नज़रंदाज़ किया जैसे विदेशनीति,जन-धन योजना जीऐसटी बिल उसे उन्होंने न केवल देश के विकास में बाधा बल्कि जनता का पैसा,धन सब कुछ बर्बाद किया जिसे की काफी नुक्सान उठाना पड़ा इसलिए मेरा यह अनुरोध है की विपक्ष को आत्ममंथन करने की जरुरत है क्यूंकि देश का संपूर्ण विकास तभी हो सकता है जब पक्ष और विपक्ष एक दूसरे की टांग खींचकर नही बल्कि साथ मिलकर काम करे 

Tuesday, 23 February 2016

देश के वीरो से ज्यादा देशद्रोहो को मिल रहा है सम्मान

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में जो कुछ भी हो रहा है उसे हर सच्चे हिन्दुस्तानी का दिल तार-तार हो गया देश के खिलाफ खुले आम नारे लगाये गए और प्रशाशन खुले आम देखता रहा और सबसे ज्यादा तो चौकाने वाली बात तो यह है की विद्यालय के शिक्षक उन दोषियों का साथ दे रहे है यदि किसी देश में ऐसे शिक्षक हो तो उस देश में ज्ञान का प्रकाश कभी नही फैल सकता इस काण्ड के इतने दिनों बाद भी प्रशाशन दोषियों को पकड़पाने में असक्षम है यह दिल्ली पुलिस और प्रशाशन की लाचारता को दिखाता है अरे कोई यह बताये क्या इसी दिन के लिए महात्मा गाँधी और भगत सिंह जैसे वीरो ने अपना बलिदान दिया था? क्या इसी दिन के लिए वीर सिपाही सीमओं पर दुश्मनों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान देते है? अभी जहाँ कुछ दिन हनुमंथप्पा और उनके दस साथियो के सहास का गुणगान कर रह थे वही दूसरी और अफज़ल गुरु के पक्ष में नारे लगाये जारे थे जो यह प्रशंचिहन खड़ा करता है और दुनिया में यह संदेश दिखाता है की हिंदुस्तान की जनता को अपने वीर जवानो से कितना प्रेम है  क्या हम अपने जवानो से प्रेम नही करते? यदि करते है तो क्यूँ अभी भी वह दोषी खुले आम घूम रहे क्यूँ पुलिस उन्हें गिरफ्तार नही कर रही यदि हम अपने देश के अंदर के मुजरिमों को नही पकड़ सकते तो देश की सीमा के बाहर के मुजरिमों को कैसे पकड़ेंगे वो कहावत तो सुनी होगी की घर का भेदी लंका ढाए ऐसे अराजक तत्व देश को अंदर से खोकला कर रहे है आज हमारे देश को बाहर के दुश्मनों से इतना खतरा नही है जितना देश के अंदर के दुश्मनों से जो की देशहित के लिए सही नही है इसीलिए मैं अपने सभी देशवासियों से यह विनती करता हूँ की जैसे हम अपने हकों के लिए प्रशाशन पे दबाव डालते है ठीक उसी प्रकार देश के इन दोषियों की गिरफ्तारी के लिए भी दबाव डाले प्रशाशन इन्हें गिरफ्तार करने असमर्थ हो सकता है लेकिन देश की जनता सर्वोपरि है वह अपने प्रयासों से इन देशद्रोही को गिरफ्तार करवा सकती है 

Monday, 8 February 2016

विफल हो जाएगी स्मार्ट सिटी परियोजना

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्त्वकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू होने से पहले ही विफल हो चुकी है क्यूंकि आप ही बताइए स्मार्ट सिटी परियोजना मकसद क्या है 100 नई स्मार्ट सिटीज बनाना लेकिन स्मार्ट सिटीज की जो पहली सूची आई है उनमे से ज्यादातर जो शहर चुने वो मौजूदा हालात में भी दुसरो से काफी आगे है जैसे अहमदाबाद,चंडीगढ़ इत्यादि और सबसे चौकाने वाली बात यह है दोस्तों की उत्तर प्रदेश और बिहार में से  एक भी शहर नही चुना गया जिसकी वजह से यह परियोजना विफल हो जाएगी जरा सोचिये सबसे ज्याद लोग रोज़गार के लिए किन राज्यों से दुसरे राज्यों में जाते है उत्तर प्रदेश और बिहार से अब जब इन्ही राज्यों में से कोई शहर पहली सूची  में अपनी जगह नही बना पाया तो फिर फायदा क्या है ऐसी परियोजना का? स्मार्ट सिटी का मतलब तो यही होता है ना कि शहर को सभी मूलभूत सुविधायें देना जब की होना यह चाहिए था की पहली सूची में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार में से इस परियोजना के लिए शहर चुने जाने चाहिए थे क्यूंकि यही सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य है और इन राज्यों में जितना ज्यादा विकास होगा दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों पे से बोझ उतना ही कम होगा क्यूंकि जो शहर पहले से ही दुसरो से अव्वल है उन्हें तो बाद में भी विकसित कर सकते है लेकिन जिन शहरों अथवा राज्यों में आबादी ज्यादा है वहां स्मार्ट सिटी परियोजना लागू  करनी चाहिए ज्यादा से ज्यादा स्मार्ट सिटीज बनानी चाहिए माना की इन राज्यों के शहरों के विकास में कुछ बहुत बड़ी मूलभूत कठिनाईयाँ है लेकिन इन राज्यों के शहरों का विकास कर देने से ना केवल इन राज्य के शहरों को लाभ  होगा बल्कि दुसरे राज्यों के शहरों को भी लाभ होगा उदहारण के तौर पे अभी 2 करोड़ लोगो की बसावट वाले मुंबई शहर में 20 करोड़ आबादी रहती है जिसे मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों पे बोझ बढ़ रहा आबादी ज्यादा होने से लोगो को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे रोजगार के अवसर काम पैदा होते है.महंगाई दिनोंदिन बढ़ रही है इत्यादि इसलिए मेरी सरकार से यह विनती इन राज्यों के शहरों को वो ज्यादा प्राथमिकता दे माना इन राज्यों के शहरों के विकास में काफ़ी कठिनाईयाँ है लेकिन जैसा की सिंगापुर को बनाते समय नेल्सन मंडेला ने कहा था की हर कार्य कठिन लगता है जब तक वह पूरा नही हो जाता तो इसलिए कठिन भले ही लेकिन असंभव नही   

Saturday, 6 February 2016

सम-विषम योजना सफल भी और विफल भी

सम-विषम योजना के बारे में यह कहा जाये की वह सफल भी हुई और विफल भी तो कुछ गलत नही होगा वो इसलिए क्यूंकि जो योजना दुसरे देशो में सफल नही हो पाई उसने भारत में बहुत ही अच्छा किया जिसे सफल बनाने में जनता का बहुत बड़ा योगदान रहा जिसकी वजह से सडको पे से ट्रैफिक जाम से लोगो को रहत मिली और विफल इसलिए क्यूंकि ट्रैफिक तो कम हुआ लेकिन जहाँ तक प्रदूषण का सवाल है उसमे कोई खास सफलता नही मिली दिल्ली में प्रदूषण अभी मानक स्तर से काफी ऊपर है और दिल्ली सरकार योजना को आगे दोबारा शुरू करने के लिए लोगो से सुझाव मांग रही मेरी राय है की योजना को दोबारा शुरू कर देना चाहिए क्यूंकि थोड़ी ही सही सफलता तो हाथ लगी है लेकिन दिल्ली को यदि प्रदूषण मुक्त करना है तो सरकार ऐसी योजनाये या प्रयास करे जिसे की लम्बी अवधि तक फायदा हो क्यूंकि मौजूदा योजना केवल छोटी अवधि तक ही फायदा पहुंचा सकती है जैसे की सम-विषम योजना यदि दिल्ली को प्रदूषणमुक्त करना है और पेरिस सम्मलेन में हुए वातावरण जुड़े संबंध कारको को पूरा करना है तो नॉन-रिन्यूएबल रिसोर्सेज पे चलने वाले उपकरणों को  बढावा देना चाहिए जैसे की बैटरी से चलने वाली गाड़ियाँ, सौर-उर्जा से चलने वाले हीटर,गाड़ियाँ इत्यादि तभी दिल्ली और पुरे देश को प्रदूषण से रहत मिल पायेगी और वातावरण स्वच्छ होगा प्रदूषण की समस्या को समाप्त करनेहेतु केवल सम-विषम योजना पे आश्रित होना दिल्ली सरकार की बहुत बड़ी गलती साबित हो सकती है