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Tuesday, 23 February 2016

देश के वीरो से ज्यादा देशद्रोहो को मिल रहा है सम्मान

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में जो कुछ भी हो रहा है उसे हर सच्चे हिन्दुस्तानी का दिल तार-तार हो गया देश के खिलाफ खुले आम नारे लगाये गए और प्रशाशन खुले आम देखता रहा और सबसे ज्यादा तो चौकाने वाली बात तो यह है की विद्यालय के शिक्षक उन दोषियों का साथ दे रहे है यदि किसी देश में ऐसे शिक्षक हो तो उस देश में ज्ञान का प्रकाश कभी नही फैल सकता इस काण्ड के इतने दिनों बाद भी प्रशाशन दोषियों को पकड़पाने में असक्षम है यह दिल्ली पुलिस और प्रशाशन की लाचारता को दिखाता है अरे कोई यह बताये क्या इसी दिन के लिए महात्मा गाँधी और भगत सिंह जैसे वीरो ने अपना बलिदान दिया था? क्या इसी दिन के लिए वीर सिपाही सीमओं पर दुश्मनों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान देते है? अभी जहाँ कुछ दिन हनुमंथप्पा और उनके दस साथियो के सहास का गुणगान कर रह थे वही दूसरी और अफज़ल गुरु के पक्ष में नारे लगाये जारे थे जो यह प्रशंचिहन खड़ा करता है और दुनिया में यह संदेश दिखाता है की हिंदुस्तान की जनता को अपने वीर जवानो से कितना प्रेम है  क्या हम अपने जवानो से प्रेम नही करते? यदि करते है तो क्यूँ अभी भी वह दोषी खुले आम घूम रहे क्यूँ पुलिस उन्हें गिरफ्तार नही कर रही यदि हम अपने देश के अंदर के मुजरिमों को नही पकड़ सकते तो देश की सीमा के बाहर के मुजरिमों को कैसे पकड़ेंगे वो कहावत तो सुनी होगी की घर का भेदी लंका ढाए ऐसे अराजक तत्व देश को अंदर से खोकला कर रहे है आज हमारे देश को बाहर के दुश्मनों से इतना खतरा नही है जितना देश के अंदर के दुश्मनों से जो की देशहित के लिए सही नही है इसीलिए मैं अपने सभी देशवासियों से यह विनती करता हूँ की जैसे हम अपने हकों के लिए प्रशाशन पे दबाव डालते है ठीक उसी प्रकार देश के इन दोषियों की गिरफ्तारी के लिए भी दबाव डाले प्रशाशन इन्हें गिरफ्तार करने असमर्थ हो सकता है लेकिन देश की जनता सर्वोपरि है वह अपने प्रयासों से इन देशद्रोही को गिरफ्तार करवा सकती है 
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