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Saturday, 18 June 2016

मोदी जी की ऐनऐसजी नीती से भविष्य में पड़ने वाले प्रभाव

भारतीय प्रधान मंत्री की विदेश नीती किसी से छुपी नही है| न्यूक्लियर सप्पलायर समूह में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए जो कुछ प्रधानमंत्री  कर रहे है| वह अतुलनीय है| इसने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है| की भारतीय प्रधानमंत्री विदेश नीती के रॉकस्टार है| लेकिन आप सबके मन में कई प्रशन होंगे जैसे क्या भारत को स्थायी सदस्यता मिलेगी? क्या यह भारत के लिए सही समय था इस समूह में आवेदन देने के लिए? और इसका भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा|? आइये पहले मैं आपको बताता हूँ की न्यूक्लियर सप्प्लायर ग्रुप है क्या? जो न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी ऐवंम मिसाइल टेक्नोलॉजी को बिना किसी रोक-टोक के उनका आयात और निर्यात कर सकते है| और न्यूक्लियर एनर्जी का इस्तेमाल शान्तिप्रिय कामों के लिए किया जाना इस ग्रुप की प्राथमिकता है| इस ग्रुप के अतिरिक्त कोई अन्य देश यह काम नही कर सकता| बरहाल इस ग्रुप के सामने जो ताज़ा स्थिति उत्पन्न हो रही है| उसके मुताबिक इन्हें भारत के आवेदन पर फैसला लेना है| जिसमे भारत के सामने कई चुनौतियाँ है| पहला तो यह की भारत ने ऐनपीटी पालिसी पे दस्तख़त नही किये है| जिसके दम पर चीन भारत का विरोध कर रहा है| और कह रहा है की ऐसे तो फिर पाकिस्तान को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए| हालांकि भारत के लिए राहात की बात यह है की ऐनपीटी इस ग्रुप में शामिल होने के लिए प्राथमिकता नही है| मौजूदा मेम्बर्स में फ्रांस इसका उदाहरण है| जिसने बिना इस पालिसी पे हस्ताक्षर किये इस समूह का मेम्बर है| अब बड़ा सवाल जो खड़ा होता है| वो यह की क्या भारत को इस समूह में  शामिल किया जाए या नही? इस सवाल का जवाब मैं 2 तरीके से दूंगा पहला  अकेले केवल भारत को इसकी सदस्यता नही दी जानी चाहिए| उसका कारण यह है कि अगर भारत इसका अकेले मेम्बर बन गया तो भविष्य में गंभीर प्रभाव पड़ेगा क्यूंकि फिर पाकिस्तान गैर कानूनी तरीके से न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी अथवा मिसाइल टेक्नोलॉजी को हासिल करने की कोशिश करेगा| जिसे ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनियां के लिए चिंता बढ़ सकती है| क्यूंकि भारत खुद ही इस बात का समर्थन करता रहा है| की पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी होना ठीक नही है| वो इसलिएकी कि अगर पकिस्तान में पल रहे आतंवाद के हाथ इस तक पहुँच गए तो ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में विनाश का खतरा पैदा हो सकता है| अब जरा आप सोचिये की अगर पाकिस्तान को इस समूह में शामिल नही किया जाता और वह गैर कानूनी तरीके से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को आगे बढ़ाता है| तो साथ ही इसे आतंकवादियों के इस तक पहुँचने का रास्ता और साफ़ हो जाएगा| क्यूंकि जितना ज्यादा पकिस्तान अपने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को बढ़ाएगा तो उस हिस्साब से उसे सुरक्षा प्रदान करना पकिस्तान के लिए और भी मुश्किल होता चला जाएगा| और चिंता के बादल गहराएंगे|


लेकिन अब आप सब यह पूछेंगे की क्या फिर हमारे प्रधानमंत्री ने गलत किया? क्या मौजूदा सरकार का यह फैसला ठीक नही है? तो मरे हिसाब से प्रधानमंत्री ने कुछ भी गलत नही किया वो इसलिए क्यूंकि अगर भारत को अकेले दम पर इस ग्रुप की सदस्यता मिल जाती है तो इसका बहुत बड़ा लाभ ना केवल भारतीय डिफेन्स सेक्टर को होगा बल्कि इसे दुनिया भर में जितने भी छोटे देश है| छोटे देश से मेरा मतलब थर्ड वर्ल्ड कन्ट्रीज के सभी देशो को फायदा होगा| वो इसलिए क्यूंकि भारत ने हमेशा बड़े स्तर पर थर्ड वर्ल्ड कन्ट्रीज के हितो के लिए काम किया है| उनके विकास के लिए भारत ने हमेशा भरपूर सहयोग दिया है| और उनके लीडर के तौर पे पूरी दुनिया में जाना जाता है| तो इस हिसाब से अगर देखा जाए तो भारत को यह सदस्यता मिलनी चाहिए ताकि जिसे वो छोटे देशो की जरूरतों उनके हितो को दुनिया के सामने रख सके और उनका विकास करने में योगदान दे सके जिसे की विश्व भर में संतुलन बना रहे और इंटरनेशनल सोव्रेंनिटी कायम रहे| तो इसलिए देखा जाए तो मैं यह फैसला आप सब पे छोड़ता हूँ की भारत को सदस्यता दी जानी चाहिए या नही| मैंने आपको दोनों नज़रिये बतादिये है| और साथ ही  भारतीय प्रधानमंत्री को 24 जून जी हाँ दोस्तों यही तारीख जिस दिन भारत की सदस्यता पर निर्णय लिया जाना है| समस्त भारत वासियों की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी को ढेरो शुभकामनाये देता हूँ |

जय हिन्द|