Saturday, 20 August 2016

बेटियाँ पड़ी बेटों पे भारी ओलंपिक्स में इस बार बेटियों ने है बाजी मारी

पूरे 12 दिन बाद जी हाँ दोस्तों पूरे 288 घंटे लगे भारत को अपना पहला पदक जीतने में क्यूंकि जिस तरह हर बीते  इवेंट के साथ  खिलाडी बाहर हो रहे थे| उसे भारत की पदक जीतने की उमीदे भी धुंधली होती जा रही थी| और यह लगभग तय लग रहा था| की पिछले ओलंपिक्स में  हिन्दुस्तान जिस पायदान पर था| उसे बचाना भी मुश्किल हो जाएगा| लेकिन भला हो हिन्दुस्तान की बेटी साक्षी का जिन्होंने भारत की पदक तालिका के सूखे को ख़तम किया| और निराशा में आशा की किरण का संचार किया| और उसी आशा को आगे ले जाकर पीवी सिंधु ने स्वर्ण पदक की उमीदो को जिंदा रखा है| हिन्दुस्तान जों उमीदे नरसिंह यादव, अभिनव बिंद्रा, जीतू रॉय जैसे तमाम बड़े खिलाडियों से लगाये बैठा था| वो उमीदे भारत की बेटियों ने पूरी की है| इसी से इन लडकियों ने करार तमाचा जड़ा है| समाज के दूषित मानसिकता वाले उन लोगो को जों बेटियों का पैदा होना अच्छा नही मानते|क्यूंकि इन्होने दिखा दिया की जब बात  देश के सम्मान की हो तो बेटियाँ किसी से कम नही| बरहाल इस साल  ओलंपिक्स  में पहली बार भारत ने अपना सबसे बड़ा दल भेजा | लेकिन बड़े दल का मतलब यह नही की  पदकों की संख्या भी ज्यादा हो| सोचा नही था की  इतना बड़ा दल होने के बावजूद भी हमारी पदको की संख्या इतनी कम रहेगी| हमसे बढ़िया तो रूस है| जिसके पता नही कितने ही खिलाडी डोपिंग की वजह से बाहर हुए लेकिन पदक तालिका में हमसे काफी आगे है|वो तो भला हो भारत की इन बेटियों का जिन्होंने हिन्दुस्तान और तिरंगे दोनों की ही लाज रख ली| नही तो इतनी संख्या में खिलाडी होने के बावजूद पदकों की संख्या कम होना अपने आप में शर्मसार करने वाली बात है| क्यूंकि यह स्थिति सवाल या निशान खड़ा करती है| की क्यों दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आबादी वाले देश में खिलाडी पैदा नही  होते? इसका कारण यह है| की मौजूदा खेल व्यवस्था हमारे देश में खेलो को लेकर बहुत भेद-भाव करती है| जों की साफ़ तौर पे बड़े स्तरों पे देखा जा सकता है| जहाँ एक और क्रिकेट,बैडमिंटन और टेनिस कुछ चुनिंदा खेलों पे कुछ जयादा ही ध्यान दिया जाता है| वंही दूसरी और फुटबॉल,जिमनास्ट और बॉक्सिंग इत्यादि जैसे खेलो के लिए तो कोई व्यवस्था ही नही है| यही कारण है की हिन्दुस्तान को दशको लग जाते है एक मैरीकोम बनाने में सदियाँ बीत जाती है एक दीपा बनाने में तो आप कहेंगे क्या इसका कारण भारत में हुनर की कमी होना है| जिसका जवाब है बिलकुल नही हमारे हिंदुस्तान में प्रतिभा की कोई कमी नही है| और ना ही कमी है| प्रतिभा को पहचाने वालो की लेकिन फिर भी हिंदुस्तान अन्तराष्ट्रीय खेलो में इतना पिछड़ा हुआ है| तो केवल इसलिए की यहाँ पे खिलाडियों की क़द्र ना करनेवालो की उनका शोषण करने वालो की संख्या जयादा है| तभी तो आप लोगो ने सुना भी होगा की यहाँ सिल्वर मैडल विजेता सडको पे झाड़ू लगा रहा है| बर्तन मांझ रहा है| जिस देश में खिलाडियों का यह हाल होगा वो मुल्क क्या पदक जीतेगा हमारे देश में खेल व्यवस्था में इतना घोटाला मौजूद है| की हुनरमंद खिलाडी अपनी गरीबी के चलते बड़े स्तर तक पहुँच ही नही पाता हमारे यहाँ खेल फेडरेशनो में ऐसे लोग बैठे है| जिनका उन खेलो से कोई लेना-देना ही नही है| जों या तो राजनीति से जुड़े है या फिर किसी और फील्ड से वास्ता रखते है| उदहारण एनश्रीनिवासन जों कुछ वक़्त पहले तक बीसीसीआई के चेयरमैन हुआ करते थे| अरे भाई किसी खेल की फेडरेशन में पूर्व खिलाडियों या फिर ऐसे लोगो को तैनात करो जों उस खेल से जुड़े हुए हो या फिर उसे कुछ वास्ता रखते हो| यदि ऐसे लोग जब बड़े पदों पे मौजूद होंगे तो खिलाडी अपने आप ही निकल आयेंगे जिसे युवा पीढ़ी के लिए भी रोल-मॉडल तैयार होंगे और उनका प्रोत्शाहन भी खेलो के प्रति बढेगा इसलिए जरुरी नही की जब पढ़ेगा इंडिया तभी बढेगा इंडिया बल्कि यह भी हो सकता है|की जब खेलेगा इंडिया तभी तो जीतेगा इंडिया|

Sunday, 14 August 2016

देर आये दुरुस्त आये

ना जाने कितनी सरकारे आई और गई| ना जाने कितने ही मौसम बदले| लेकिन कभी भी किसी ने कश्मीर पे एक उचित पक्ष जों रखना चाहिए था| वो नही रखा| यदि प्रधामंत्री ने कश्मीर पे अपना पक्ष रखा है| वह अतुलनीय है| हमे उम्मीद है| की  अब इसे पीछे नही हटेंगे| पिछली सरकारे यह काम पहले कर लेती तो शायद दोनों देशो के बीच कश्मीर पे जों विवाद है| वो बहुत पहले ही ख़तम हो गया होता| लेकिन तमाम राजनितिक दलों ने वोटबैंक की राजनीती के चलते| देश की एकता और अखंडता में फूट डालने का काम किया| जिसके फलस्वरूप कश्मीर में अलगावादियों और आतंकी जैसे अराजक तत्वों ने अपने पैर पसार लिए| उसे भारत से अलग करने की नाकाम कोशिशे की और अबतक कर रहा है| जों अब कश्मीरी बहन-भाइयो को बरगला कर जिहाद के नाम पे उनका शोषण कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है| यह देखकर अच्छा लगा की सभी राजनितिक दलों ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर कश्मीर के मुद्दे पे एकसाथ खड़ी हो गयी| इसलिए कहना पड़ेगा की देर आये लेकिन दुरुस्त आये| क्यूंकि यह बात तो समझ के परे थी|मतलब की जब कश्मीर भारत का अखंड अंग है| तो उसे लेकर पाकिस्तान से  बात-चित क्या करना करना| यदि बातचीत करनी है| तो पाकिस्तान ने अवैध तरीके से  कश्मीर के जिस भाग पर कब्ज़ा कर रखा है| जिसे वह आज़ाद कश्मीर भी कहता है| जों भारत का हिस्सा है| बात तो उस पे होनी चाहिए| इस बात का सबूत तो पडोशी देश खुद ही अपनी नापाक करतूतों से दे चूका है| की आज़ाद कश्मीर भारत का अंग है| जरा आप ही बताइए भाइयो-बहनों कौन सा ऐसा मुल्क है| जों अपने ही राज्य और  नागरिको दोनों पे ही बम बरसाता हो| हवाई हमले करवाता है| पाकिस्तान केवल आज़ाद कश्मीर और वहां की भोली-भाली अवाम का इस्तेमाल कर रहा है| आज़ाद कश्मीर की धरती का केवल अपने नापाक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहा है| वहां पे ना जाने अनगिनत तादाद में फ़िदायीन और जेहादी तैयार किये जा रहे है| और मैं यह भी जानता हूँ की ज़्यादातर कश्मीरी भाई-बहन भारत का ही समर्थन करते है| क्यूंकि हर सच्चा कश्मीरी यह जानता है| की जब कश्मीर में सैलाब आया तब यह अलगावादी कहाँ थे| आपदा के समय जब ना जाने कितने ही कश्मीरी भाई-बहनों को बेघर होना पड़ा| तब यह अलगावादी कहाँ थे? क्यों नही मदद करने आये? कहाँ गायब हो गये थे? मुसीबत के समय भारतीय जवानों ने अपनी जान पे खेलकर आप सभी की सहायता करी थी| इसलिए मरे प्रिय कश्मीरी भाइयो-बहनों मेरी आप सब से विनती है| सरकार ने यह जों कदम उठाया इसमें उनका योगदान दे| एक कदम आप बढाइये| दो कदम सरकार बढ़ाएगी| और तीन कदम पूरा हिन्दुस्तान मेरा मतलब है| की 15 अगस्त का मौका है| और मौका है| आप सभी के पास भी की एक साथ सभी अपने घरो में, मस्जिदों में अथवा हर उस जगह जिसे आप उचित मानते है| फेहरा दीजिये तिरंगा और दिखा दिजिये इन मुट्ठीभर देश के गदारो को की चाहे कुछ भी हो जाये एक सच्चा हिन्दुस्तानी अपने मुल्क से ग़द्दारी नही कर सकता| क्यूंकि आप सभी एक मुसलमान,सिख ,हिन्दू,जैन किसी भी धर्म या जाती से क्यों ना हो| लेकिन सबसे  पहले एक हिन्दुस्तानी है| और हिन्दुस्तानी होने के नाते देश के प्रति आप सबका कर्त्तव्य सर्प्रथम है| क्यूंकि यह जों आजादी हमे मिली है| इनमे हिन्दू हो या मुसलमान,सिख हो या इसाई ना जाने कितने ही वीरो ने इस आजादी के लिए अपना बलिदान दिया है| इस उमीद में की आगे चलके हम इस धरोहर को संभाल के रख सके| जरा पूछिए अपने आप से| क्या हम उनकी उमीदो पर खरा उतर पा रहे है या नही? मरे सभी भाई-बहनों को 15 अगस्त की हार्दिक शुभकामनाये|
जय हिन्द 

Sunday, 7 August 2016

सरकारी विस्विद्यालय बाबुजियों के हवाले

आज मैं आपको दिल्ली विश्विद्यालयों की ऐसी सत्य घटना बतायुंगा जिसे सुनने के बाद हो सकता है| आपके विचार परिवर्तित हो जाए| यह घटना मेरे मित्र के साथ घटी है| वो भी उन्ही हजारों-लाखों बच्चो में से एक है| जो हर साल अलग-अलग राज्यों से आँखों में सपने लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में पढने के उम्मीद से आते है| लेकिन बहुत कम ही होते है| जिनके सपने पूरे हो पाते है| क्यूंकि दिल्ली विस्वविद्यालय  में व्याप्त धांधली ना जाने कितने ही बच्चो के सपनो को चकनाचूर कर दिया है| और जो यह कट ऑफ लिस्ट का ड्रामा होता है| यह केवल छात्र और उनके अभीभावको को दिखाने के लिए होता है| बच्चो का एडमिशन उनके मेरिट से नही बल्कि बबुबाजी मेरा मतलब घोटाले से होता है| आप सभी की तरह भी मेरा मित्र भी एडमिशन के लिए आया कट-ऑफ भी आई हुई थी| लेकिन सिर्फ एक ही ऐसी चीज थी| जिसे देख कर उसे एडमिशन नही दिया गया वो था की वह उत्तर प्रदेश(यूपी) बोर्ड से बारहवी की थी| ना जाने कितने ही कॉलेज में गया लेकिन हर कोई या तो  परसेंटेज कम बताता या फिर सभी कागज़ात पूरे होने के बाद भी उन में कोई न कोई कमी बता देता और कह देता बेटा  अगली कट ऑफ में देखना| लेकिन अब जो बात मैं आपको बतायुंगा उसे जानकार आप को कोई आश्चर्य ना हो क्यूंकि हमारे देश के  सिस्टम में घोटाले की दीमक ऐसी लग चुकी है| जो देश को धीरे-धीरे अन्दर से खोकला करती जा रही है| क्यूंकि एक छात्र ऐसा था जो बारहवी में फेल हो चूका था| और इस साल उसकी परसेंट तो थोड़ी अच्छी आई लेकिन इतनी अच्छी नही थी की उसे दिल्ली विस्विद्याल्य में एडमिशन मिल सके| लेकिन उसे एडमिशन कम परसेंट होने के बावजूद भी मिल गया| और किसी ऐसे-वैसे कोर्स में नही बल्कि साइंस के बड़े नामी-ग्रामी कोर्स में| ऐसे कोर्स में जिसमे में एडमिशन के लिए बच्चो की लंबी कतारें लगी रहती है| बरहाल आप यह जान चाहेंगे की उसे एडमिशन मिला कैसे? जी तो बात ऐसी है की डीयु का एक प्रोफ़ेसर जो उसे टूशन पढ़ाते  थे| उन्ही की मेहरबानी है| उन्होंने कोई धान्द्लीबाज़ी से एडमिशन करा दिया| यदि आप में से किसी के साथ भी ऐसा हुआ है| तो मुझे जरुर कमेंट बॉक्स में अपना नाम बताये| लेकिन अंत में मित्रो मैं यही कहना चाहूंगा की डीयु अब वैसा नही रहा जैसा की किसी ज़माने में हुआ करता था| और सिर्फ डीयू ही क्यों हर राज्य के सरकारी कॉलेजों का यही हाल है| यही कारण है| की हमारे भारत में कभी किसी ज़माने नालंदा विस्विद्यालय में पढने के विदेशो से बच्चे आया करते थे| आज उनकी जगह तमाम प्राइवेट कॉलेजों ने ले ली है| इसलिए मैं तो अपने  अनुभव से आपको यही कहना चाहूँगा की यदि मेरे मित्र की तरह सरकारी विस्विद्यालयों का भूत आपकों भी चढ़ा हो तो एक बार गहराई से जरुर विचार करे|