Sunday, 7 August 2016

सरकारी विस्विद्यालय बाबुजियों के हवाले

आज मैं आपको दिल्ली विश्विद्यालयों की ऐसी सत्य घटना बतायुंगा जिसे सुनने के बाद हो सकता है| आपके विचार परिवर्तित हो जाए| यह घटना मेरे मित्र के साथ घटी है| वो भी उन्ही हजारों-लाखों बच्चो में से एक है| जो हर साल अलग-अलग राज्यों से आँखों में सपने लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में पढने के उम्मीद से आते है| लेकिन बहुत कम ही होते है| जिनके सपने पूरे हो पाते है| क्यूंकि दिल्ली विस्वविद्यालय  में व्याप्त धांधली ना जाने कितने ही बच्चो के सपनो को चकनाचूर कर दिया है| और जो यह कट ऑफ लिस्ट का ड्रामा होता है| यह केवल छात्र और उनके अभीभावको को दिखाने के लिए होता है| बच्चो का एडमिशन उनके मेरिट से नही बल्कि बबुबाजी मेरा मतलब घोटाले से होता है| आप सभी की तरह भी मेरा मित्र भी एडमिशन के लिए आया कट-ऑफ भी आई हुई थी| लेकिन सिर्फ एक ही ऐसी चीज थी| जिसे देख कर उसे एडमिशन नही दिया गया वो था की वह उत्तर प्रदेश(यूपी) बोर्ड से बारहवी की थी| ना जाने कितने ही कॉलेज में गया लेकिन हर कोई या तो  परसेंटेज कम बताता या फिर सभी कागज़ात पूरे होने के बाद भी उन में कोई न कोई कमी बता देता और कह देता बेटा  अगली कट ऑफ में देखना| लेकिन अब जो बात मैं आपको बतायुंगा उसे जानकार आप को कोई आश्चर्य ना हो क्यूंकि हमारे देश के  सिस्टम में घोटाले की दीमक ऐसी लग चुकी है| जो देश को धीरे-धीरे अन्दर से खोकला करती जा रही है| क्यूंकि एक छात्र ऐसा था जो बारहवी में फेल हो चूका था| और इस साल उसकी परसेंट तो थोड़ी अच्छी आई लेकिन इतनी अच्छी नही थी की उसे दिल्ली विस्विद्याल्य में एडमिशन मिल सके| लेकिन उसे एडमिशन कम परसेंट होने के बावजूद भी मिल गया| और किसी ऐसे-वैसे कोर्स में नही बल्कि साइंस के बड़े नामी-ग्रामी कोर्स में| ऐसे कोर्स में जिसमे में एडमिशन के लिए बच्चो की लंबी कतारें लगी रहती है| बरहाल आप यह जान चाहेंगे की उसे एडमिशन मिला कैसे? जी तो बात ऐसी है की डीयु का एक प्रोफ़ेसर जो उसे टूशन पढ़ाते  थे| उन्ही की मेहरबानी है| उन्होंने कोई धान्द्लीबाज़ी से एडमिशन करा दिया| यदि आप में से किसी के साथ भी ऐसा हुआ है| तो मुझे जरुर कमेंट बॉक्स में अपना नाम बताये| लेकिन अंत में मित्रो मैं यही कहना चाहूंगा की डीयु अब वैसा नही रहा जैसा की किसी ज़माने में हुआ करता था| और सिर्फ डीयू ही क्यों हर राज्य के सरकारी कॉलेजों का यही हाल है| यही कारण है| की हमारे भारत में कभी किसी ज़माने नालंदा विस्विद्यालय में पढने के विदेशो से बच्चे आया करते थे| आज उनकी जगह तमाम प्राइवेट कॉलेजों ने ले ली है| इसलिए मैं तो अपने  अनुभव से आपको यही कहना चाहूँगा की यदि मेरे मित्र की तरह सरकारी विस्विद्यालयों का भूत आपकों भी चढ़ा हो तो एक बार गहराई से जरुर विचार करे|
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