Monday, 5 September 2016

चीन पर पाकिस्तानी संगति का असर हो रहा है

पडोसी देश चीन धीरे-धीरे अपने आदर्शो को भुलाता जा रहा है| सुपर पॉवर की लत ने उसे इतना अंधा कर दिया है| धीरे-धीरे विश्वभर में अपने प्रति कांटे बो रहा है| आप सब समझ ही गए होंगे मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ | हालिया जी-20 शिखर समेलन्न में चीनी अधिकारियों ने अमेरिकी पत्रकारों के साथ जिस प्रकार का दुर्वयवहार किया है| उस पे सारी दनिया थू-थू कर रही है| हुआ कुछ यूँ की शिखर समेलन्न में शामिल होने के लिए अमेरिकी प्रेसिडेंट का जहाज जैसे ही लैंड किया| कुछ पत्रकारों ने प्रेसिडेंट का इंटरव्यू लेने के लिए बैरीकैडिंग तोडकर आगे आ गए| जिस पर चीनी अधिकारी चिलाकर ऐसे टूटकर पड़े जैसे वो बैरीकेडिंग तोड़कर नही उनके देश का बॉर्डर तोड़कर घुस आये हो| गरमा-गर्मी इतनी बढ़ गयी की अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार के दखल देने पर चीनी अधिकारी चिलाकर बोले यह हमारा मुल्क है| आप ही बताइए  यह किस प्रकार का  व्यवहार है? मेरा मतलब यह की  जनाब देश आपक का हो सकता है| लेकिन मीटिंग तो अन्तराष्ट्रीय है| और वैसे भी पत्रकारिता में पत्रकारों के बीच होड़ लगी रहती है| कौन सबसे पहले जाकर इंटरव्यू ले या इवेंट कवर करे| ऐसे में दो-चार पत्रकार आगे आभी गए तो कौन सा ऐसा गुनाह कर दिया? अरे  भाई उनका प्रेसिडेंट आया है| अपने प्रेसिडेंट की तस्वीर या इंटरव्यू नही लेंगे तो किसकी  लेंगे? ऐसे में उनके साथ इतना कठोर बर्ताव सही नही है| यह दिखाता है की चीन में आने वाले मेहमानों के प्रति किस  प्रकार का भेद-भाव किया जाता है| और यह साबित भी करता है की ज्यादातर पडोशी देश चीन के बारे में जों कहते है| या जों तथ्य दुनिया के सामने लाते है| वो एक दम सच है| शायद उनके लोगो की मानसिकता ही ऐसी है| लेकिन जब यही देश शांति वार्ता के नाम पर दूसरों के महासागरो में जाता है| वहां पे जाकर दखलअंदाजी करने की कोशिश करता है| तब यह मानसिकता कहाँ चली जाती है| यानी तुम दूसरो के यहाँ जाओ तो हम शांति वार्ता के तहत घुमने आये है| लेकिन कोई दूसरा तुम्हारे यहाँ आये तो यह हमारा समुद्र है हमारा देश है| क्यों भाई दादागिरी है क्या? लेकिन इसमें चीन की गलती नही है| क्यूंकि कहते है ना संगति का असर होता है| जैसे पकिस्तान की आवाम में तो इतना  नही है| लेकिन वहां के जितने भी सियासतदान, विद्वानों की मानसिकता है की हिन्दुस्तान जों भी नयी डिफेन्स टेक्नोलॉजी बना रहा है| वो सब पाकिस्तान के लिए है| या  पाकिस्तान पे ही इस्तेमाल होगी| पकिस्तान के यह दावे सरासर गलत है| नही भाई हम कहाँ और तुम कहाँ हम इतने मुर्ख नही है| की अपनी बर्बादी खुद ही करे हमारे अपने मसले है| नीतियां है| पाकिस्तान की यही मानसिकता धीरे-धीरे चीन में भी आती जा रही है| की अमेरिका साउथ-चाइना सी में जों भी कुछ कर रहा है| वो केवल चीन को भड़काने के लिए चाहे भारत या जापान के साथ मिलकर कोई सैनिकअभ्यास ही क्यूँ ना हो| अरे चीनी भाई-बहनों अंतरास्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्र एक अन्तराष्ट्रीय संपति मानी जाती है| जिसे पे चाहकर भी कोई देश पूर्ण रूप से कब्ज़ा नही कर सकता| और यदि आप ऐसा करने की कोशिश कर रहे है| तो दुनिया भर से आपको विरोध झेलना ही पड़ेगा| अन्तराष्ट्रीय अदालत ने जों फैसला सुनाया है| वो तो माना ही पड़ेगा क्यूंकि वो कानून किसी एक के लिए नही सभी के लिए है| चाहे फिर राज़ी हो या ना हो| और वैसे भी दोस्तों मैं इसे संगति का असर इसलिए भी कह रहा हूँ क्यूंकि जब तक चाइना-पाकिस्तान के इतने गहराने रिश्ते नही थे| तब तक चाइना के प्रति दुनिया भर का नजरिया अलग था| पड़ोशियो से तो विवाद थे| लेकिन अमेरिका या दूसरे देशो से इतने मतभेद नही थे| जितने की अब है| और मौजूदा स्थिति को देख के लगता है की आगे जाके बढ़ेंगे भी क्यूंकि हो सकता है| चाइना को अब ना केवल  अमेरिका से बल्कि उसके नाटो मेंबर्स से भी खटास झेलनी पड़  सकती है| यदि ऐसा होता है तो यह चीन के हित में है या नही इसका फैसला में चीनी भाई-बहनों पे छोड़ता हूँ| क्यूंकि कहते है ना समझदार को इशारा काफी इसलिए ही कहते है की संगति अच्छी हो तो विचार भी अच्छे आते है| वंही संगति अच्छी ना हो तो विचार भी दूषित हो जाते है| अच्छी संगति अच्छे भरोशेमंद दोस्तों  से आती है| हालांकि मैं जानता हूँ की अन्तराष्ट्रीय कूटनीति में अच्छी संगति और  भरोशेमंद जैसी कोई चीज नही होती सभी मुल्क अपने हितों के लिए काम करते है| पर यहाँ पे मेरा इनसे अर्थ है| समझदार कूटनीति से जैसी भारत ने की है| मैं कोई बीजेपी का प्रशंशक नही हूँ लेकिन यहाँ पे भारतीय सरकार और प्रधानमंत्री मोदी तारीफ़ के काबिल है की अमेरिका से नजदीकी के इस दौर में उन्होंने हिन्दुस्तान के सबसे भरोशेमंद देश रूस और इजराइल दोनों के साथ भी अंतरास्ट्रीय संबंध उसी संकल्प और निष्ठा के साथ बरकरार रखे  है| जैसे शीत युद्ध के दौरान थे|


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