Sunday, 11 September 2016

पकिस्तान का परमाणु बम ही भविष्य में उसके संपूर्ण विनाश का कारण होगा

उत्तर कोरिया ने पांचवें परमाणु बम के सफल परिक्षण के  बाद दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी| क्यूंकि यह अब तक का उनका सबसे घातक बम साबित हुआ है| कोरियाई मीडिया की माने तो हिरोशिमा और नागासाकी वाले से भी ज़्यादा ताकतवर इतना शक्तिशाली की जिसके द्वारा उत्पन्न हुए झटके पडोशी देश जापान और दक्षिण कोरिया में भी महसूस किये गये| यदि कोरियाई दावे सच है| तो पूरी दुनिया के लिए यह एक गहरी चिंता की बात है| क्यूंकि एक ऐसा मुल्क जिसपे तमाम पाबंदिया है| उसके बाद भी वो लगातार ऐसे परीक्षणों को अंजाम दिए जा रहा है| जहाँ का तानाशाह इतना निरंकुश है| की अपनी सनक में वह कुछ भी कर सकता है| तो इस बात की क्या गारंटी हैकि अपनी सनक के चलते वो इन हथियारो का इस्तेमाल या फिर कोई ऐसा कदम ना उठा ले| जिसके चलते ना केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया पे गहन संकट  पैदा हो जाए| जिसका जिम्मेवार केवल और केवल पाकिस्तान है| क्यूंकि यह बात किसी से गुपि-छुपी नही है| की उत्तर कोरिया को ये टेक्नोलॉजी पाकिस्तान ने मुहैया करायी है|  यह कहना बिलकुल गलत नही होगा की पाकिस्तान बना तो धर्म के नाम पे था| लेकिन चल रहा एटम बम के ऊपर है| वो एटम बम के नाम पर दुनिया को डराता है| एटम बम के नाम पर ही विदेशो से भीख मांगता  है| और इसी से उसकी आर्थिक व्यवस्था भी चल रही है| यानी पाकिस्तान को इस बात का एह्शास ही नही है की यह परमाणु बम उनकी अवाम का खून चूस रहा है| और उन्हें धीरे-धीरे शीत मृत्यु की और ले जा रहा है| यह ऐसी अवस्था होती है| जिसमे मौत कब हो जाती है| पता ही नही चलता यानी मुल्क अंदर से खोकला हो जाता है| अच्छा यह तो हुआ पहला  पहलु दूसरा  पहलु यह है की एक नामी-ग्रामी विदेशी अखबार के मुताबिक इस वक्त पाकिस्तान के पास भारत से भी अधिक परमाणु हथियार है| और वो हर साल अपने इस प्रोग्राम को बड़ी मात्रा बढ़ा रहा है| वो अपने न्यूक्लियर अड्डो को पुख्ता सुरक्षा दे तो पा रहा है| लेकिन उसकी
सुरक्षा अभेद नही है| अखबार की इस दलील के बाद मेरा नज़रिया यह है की पाकिस्तान भले ही कितनी भी उत्तम सुरक्षा क्यों ना मुहैया करा रहा हो| लेकिन इससे उसे दोतरफा नुक्सान ही हो रहा है| पहला हर  बढ़ते परमाणु परियोजना के साथ नाचाहकर भी पाकिस्तान अपने नागरिको की मूलभूत सुख-सुविधाओं के साथ जों हर नागरिक का अधिकार होती है| उनके साथ समझौता कर रहा है| क्यूंकि पुरानी कहावत है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है| दूसरा यह है की यदि  पाकिस्तान ऐसे ही अपनी परियोजना में विस्तार करता रहा तो एक वक़्त ऐसा आयेगा की अधिकतम सीमा के बाद वो सुरक्षा मुहैया करने में असक्षम होगा| जिसे आतंकवादियों के हाथ इस तक पहुँचने आसान हो जायेंगे| और यदि ऐसा हुआ तो ना चाहकर भी समस्त दुनिया को  पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कारवाही करनी ही पड़ेगी जिसे पाकिस्तान का वजूद भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है|
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