Tuesday, 18 October 2016

एक तरफ है सुप्रीम कोर्ट की हूंकार दूसरी तरफ मुस्लिम लॉ बोर्ड का अहंकार

मुस्लिम महिलाओ की कोशिश रंग लाइ और देश की उच्च अदालत ने तीन तलाक के मामले पे सुनवाई करने का निर्णय लिया | और धर्म कि आड़ में तीन तलाक़ के नाम पर  मुस्लिम महिलओं के साथ हो रहे शोषण को बड़ी सख्ती के साथ उजागर किया| लेकिन यह काम अगर पहले हो जाता तो आज हालात कुछ और होते बरहाल
अजीब विडंबना जब कुछ लोग यह कहते है|  इस्लाम में महिलओं को उनका हक जैसी कोई बात लिखी नही है हालांकि मैं इस्लाम का इतना बड़ा कोई ज्ञाता तो हूँ नही यह तो हमारे देश के मौलवी जानते होंगे लेकिन ऐसा हो
नही सकता की कोई मजहब भेदभाव की अनुमति देता हो| यह जरुर हो सकता है की कुछ लोग व्यतिगत फायदे के लिए धर्म के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करे और उसे ही कानून बना दे| जैसा की इस वक़्त देश का मुस्लिम लॉ बोर्ड करने की कोशिश कर रहा है| जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा मुल्क के मुस्लिम समाज को ही हुआ है| जहाँ एक और आजादी की लड़ाई मुस्लिम महिलओं कि भागीद्दारी अधिक थी| उन्होंने बढ़-चढ़कर अपने विचार व्यक्त किये वो आज कहाँ पिछड गयी ? इतना ही नही कुछ ताज़ा सर्व के मुताबिक देश में साक्षरता और पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए है| यहाँ तक की पिछड़े समाज अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति आदि से भी पिछड़े| यहाँ तक की कुछ राज्यों में आरक्षण मिलने के बाद भी मुस्लिम भाई-बहन भी उसका पूरा फयादा नही उठा पाते| जिसके चलते वो ऐसे अब व्यवस्था को भी दोष नही दे सकते| क्यूंकि व्यवस्था तो उन्हें अवसर दे रही है लेकिन वो मौको का लाभ नही ले पा रहे तो इसमें सरकार का क्या दोष| दुसरे धर्मो में भी पहले ऐसी कुछ प्रथाए प्रचलित थी| जो समय के साथ कुप्रथा बन गयी और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे सती प्रथा,बाल-विवाह इत्यादि यदि हिन्दू लॉ बोर्ड भी इन पर अडिग हो जाता तो शायद देश महिलओं के अवस्था और भी बुरी हो जाती| क्यूंकि भगवान् श्री कृषण ने कहा है| कि समय परिवर्तनशील है| मनुष्य को समय के अनुसार आचरण करना चाहिए अर्थात वक़्त के साथ अपने जीवन में बदलाव लाना जरुरी है| जो मनुष्य ऐसा नही करते   वो तबाह हो जाते अर्थात उनका जीवन नष्ट हो जाता है| यहाँ पे मैंने श्रीकृषण का उदाहरण इसलिए दिया है| क्यूंकि इस्लाम के कुछ सूफी संतो का मनान है की मुहम्मद पैगंबर आखरी पैगंबर थे| उनसे पहले बाकी धर्मो में बहुत से पैगंबर हुए है| जैसे जीसस.कृषण.मोसेस आदि| यदि मुस्लिम महिलाये अपने हक चाहती है| और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से निवारण चाहती है| जो इस्लाम ने नही बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बनाई है| तो उनको अपने समाज के लोगो को जागरूक करना होगा तभी बदलाव भी आएगा क्यूंकि मक्का-मदीना जहाँ से इस्लाम कि शुरुआत हुई यानी सऊदी अरब समेत 21 मुसलमान देशो में भी तीन तलाक जैस कोई सिस्टम नही है|



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