Friday, 30 December 2016

साइबर सुरक्षा पुख्ता हुए बिना डिजिटल इंडिया का सपना कैसे होगा पूरा

नई दिल्ली/भानु प्रताप: रविवार को यूनियन होम मिनिस्ट्री की वेबसाइट हैक कर ली गयी। जांच के लिए फिलहाल ब्लॉक किया गया। बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान के किसी ग्रुप ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड यानी एनएसजी की वेबसाइट हैक कर ली थी। हैक किए जाने के बाद वेबसाइट पर भारत विरोधी कमेंट पोस्ट कर दिए गए थे।  ऐसे में देश को कैशलैस इकॉनमी के चरण में ले जाने से पहले कुछ मुलभूत सुविधाए ऐसी है। जिन पे सुधार करना जरुरी है। जैसे गाँव-गाँव में बिजली की सुविधा दुरुस्त करना। कैशलेस इकॉनमी और ऑनलाइन ट्रांज़ैकशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अंत में सबसे महत्वपूर्ण अपना एक मजबूत स्वदेशी सर्वर प्रणाली बनाना। जिससे  भविष्य में कैशलेस ट्रांजैकशन से लोगो को परेशानी न हो और साइबर सुरक्षा पुख्ता हो सके।जैसे-जैसे देश इ-बैंकिंग की और बढ़ेगा वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा से सबंधित समस्याए बढेंगी और जब हमारी अपने देश कि सैन्य गुप्त जानकारियाँ हैक हो जाती है। तो तब क्या होगा जब जनता के खातो में से पैसे गायब होने लगेंगे जैसे मोबाइल में सिम क्लोनिंग के जरिये डाटा हैक हो जाता है। परिणाम स्वरूप जनता बहुत जल्दी इस व्यवस्था पे से अपना भरोसा खो बैठेगी।  इसलिए जरुरी है की डीऐनस सर्वर वायरस और ऐसे ही घातक वायरसों से सुरक्षाहेतु एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।  भारत जैसे आईटी हब कहे जाने वाले मुल्कों के लिए यह मुश्किल नही होना चाहिए। और वैसे भी इसे हम इंटरनेट कन्टेंट पे भी काबू  पा सकते है। क्या दिखाना है और  कितना इस पे नियंत्रण पाया जा सकता है। क्योंकि कही ऐसा ना हो जाए की विज्ञान के इस युग में हमारे  देश का हाल भी कुछ-कुछ  टर्मिनेटर फ़िल्म जैसा हो जाए जिसमें  हमे लगता है की विज्ञान हमारा गुलाम है।लेकिन स्थिति विपरीत होने में समय नही लगता की पता चले हम विज्ञान के गुलाम हो गए है। कैशलैस अर्थव्यवस्था जिन विकसित देशो में मौजूद है। उन देशो का अध्यन्न करना होगा और यह भी समझना होगा। की उन्हें अब और पहले किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ताकि हम उनसे सबक लेकर और सीख लेकरअपने देश में लागु करे। डिजिटल इंडिया बनाना तो इन सभी चुनौतियों से निपटना जरुरी है। जिससे केवल डिजिटल इंडिया नही बल्कि सुरक्षित डिजिटल इंडिया बने ऐसी व्यवस्था का विकास हो कि तमाम विकसित देशों के सामने एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत हो सके 

Saturday, 3 December 2016

नोटबंदी से सरकार ने किये तीन शिकार यानी एक अनार तीन बीमार


नोटबंदी प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम है। कालेधन,आतंकवाद,और देश कि अर्थव्यवस्था में बढ़ते जाली नोटों के खिलाफ जिससे जनता को थोड़ी परेशानी तो हो रही है। लेकिन लोग इसके लिए तैयार है। क्योंकि लोग जानते है की कल देश के लेट जाने से अच्छा है। की देश आज लाइन में खड़ा हो जाए और वैसे भी जब हम सब वोट डालने के लिए, अस्पतालों में इलाज के लिए, और जिओ सिम के लिए लाइन में खड़े हो सकते है। तो मुल्क के लिए क्या बुराई है। इसी बीच लेकिन देश की जनता के मन में कई ऐसे सवाल भी  है। जैसे क्या इस कदम से देश में कालधन ख़तम हो जाएगा? क्या बाद में कालाधन पैदा नही होगा? क्या कालाबाज़ारी रुक जायेगी? और इत्यादि। अभी हाल ही में आयकर संसोधन बिल में कुछ बदलावों के साथ लोकसभा में पारित हो गया। जिसके चलते अघोषित आय पर 50 फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन इसने जनता के मन में कई सवाल पैदा कर दिए जैसे की कहीं इस फैसले से सरकार ने कालधन रखने वालो के  लिए एक सुगम रास्ता तो नही दे दिया। या विपक्ष यह पूछ रहा है। की जब यही करना था। तो इतने बड़ा ड्रामा करने की क्या जरुरत थी? खैर विपक्ष का तो काम ही यही है। विपक्ष  अपना विपक्षी धर्म अच्छे से निभारा है और पूरी कोशिश कर रहा है। की लोग सरकार के खिलाफ सड़को पे उतर आये हंगामा करे और किसी तरह यह फैसला प्रधानमन्त्री वापिस ले। फिर चाहे उसके लिए भारत बंद करने का प्रयास ही क्यों ना हो। प्रयास तो विफल हो गया। लेकिन भड़ास निकालने के लिए सदन की कार्यवाही हर दिन स्थगित हो रही है। जिसमे ना जाने रोज़ाना  कितने ही हज़ारों, लाखों रुपयो का नुक्सान हो रहा है। लेकिन कोई यह नही समझ रहा की इस निर्णय के पीछे सरकार का असली मकसद क्या है। दरसल सरकार का मकसद यह नही की देश का सारा कालाधन ख़तम या बर्बाद हो जाए बल्कि यह जितनी ज़्यादा हो सके यह काली अघोषित आये  बैंक खातों तक पहुँच जाए और साथ ही देश भविष्य में कैशलेस अर्थव्यवस्था की और कदम बढ़ाये। और कालाधन सामने आ जाये इसी कारण सरकार ने  50  फीसदी के प्रवाधान के साथ आयकर संधोधन बिल पास किया ताकि यह कालाधन जितना हो सके देश के विकास में काम आये अब उन सवालों का जवाब की इससे कलाधन ख़तम होगा या नही? आतंकवाद पे रोक लगेगी या नही? लेकिन इससे पहले यह समझना होगा की इन सब परेशानियों का मूल कारण क्या था? दरसल इससे पहले भारत अपनी करेंसी छापने के लिए जिस काग़ज का प्रयोग करता था वो बाहर से आता था। और वो जिस देश से आता था। उसी देश से पडोशी देश ने भी समझौता कर लिया  और जाली इंडियन करेंसी छापने लगा। जिसे यह सारी दिकत्ते पैदा हुई और मौजूदा सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। और नए नोट छापने के लिए अत्याधुनिक कागज़ और स्याही का इस्तेमाल करना पड़ा। जिसकी बारीकियों को समझना और नकल करना मुश्किल है। सरकार के इस फैसले से कालाधन पैदा होना समाप्त तो नही होगा। लेकिन कम जरूर  हो जाएगा और और देश के ट्रांसैक्शन प्रणाली में पारदर्शिता आजायेगी और देश डिजिटल ट्रांसैक्शन और प्लास्टिक मनी की लिए प्रेरित होगा।