Friday, 26 May 2017

पहले मचाया ईवीम पर बवाल चुनाव आयोग की चुनौती के बाद धुयाँ हो गए सारे सवाल

भानु प्रताप/नई दिल्ली:चुनावी मैदान में मुँह की खाने के बाद ईवीम और चुनाव आयोग पे सवाल खड़ा करने का तो जैसे फ़ैशन ही चल पड़ा था| जो भी कोई चुनावों में हारता वो हार का सारा धिक्रा ईवीम पर फोड़ देता और यह सिलसिला शुरू हुआ 2016 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों से परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग के समक्ष हंगामा भी किया|  इसके बाद यूपी चुनाव का नतीज़ा आने के बाद मायावती ने भी ईवीम पे ही सारा दोष मढ़ दिया| फिर केजरीवाल एंड कंपनी ने तो हद ही पार कर  दी 2017 दिल्ली  नगर निगम चुनावों के नतीजों के बाद जैसे इस मुद्दे को ही अपना पार्टी का ऐजेंडा बना दिया दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान एक नकली मशीन पेश की और यह दिखाने के कोशिश की किस प्रकार सॉफ्टवेयर को हैक कर एक पार्टी के पक्ष में सारे वोट डलवाये जा सकते है| और भाजपा की जीत को ईवीम की जीत कह के उसे एक बड़ी धांधली करार दिया लेकिन विपक्ष के सभी कोशिशों पर खुद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह कह के की यदि ईवीम से छेड़छाड़ हुई होती तो मैं पंजाब का मुखयमंत्री ना होता चुनाव आयोग पे सवाल उठाने वालो के मुँह पे जोरदार तमाचा जड़ दिया| बरहाल केंद्र ने भी विविपैट मशीनो की खरीद के लिए मंजूरी दे दी  और चुनाव आयोग ने एक महीने का मौका दिया है| सभी विपक्षी दलों को की वो चुनाव आयोग आकर ईवीम हैक करके दिखाए|लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से दी गयी समय सीमा ख़तम हो चुकी है|और अभी एक भी दल चुनाव आयोग नहीं पहुंचा यानी इतना हंगामा केवल सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के लिए यानी थोथा चना बजे घना अब कहाँ गया विपक्ष?कहाँ धुयाँ हो गए उन के सवाल?यानी इन्होने यह नहीं  सोचा की राजनीती में देश के उच्चतम विभाग को भी नहीं बक्शा चुनाव आयोग पे सवाल खड़े कर इन्होने पुरे इलेक्शन सिस्टम पे ही सवाल खड़े कर  दिए जो लगभग सवा सौ करोड़ के ज़्यादा देशवासियों की भावना आहात करने के सामान है| यह वही लोग है जो सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते है तो फिर जो लोग अपने देश की सेना को शर्मशार कर  सकते है उनके लिए चुनाव आयोग पे आरोप लगाना कौन सी बड़ी बात है| इन्हे यह समझना चाहिए की जनता सब जानती है ऐसी भी क्या सियासत का नशा जिसमे चूर होकर अपने  ही देश की संस्थाओं पे प्रश्न चिह्न लगा दे |