Saturday, 10 June 2017

किसानो अोर जवानो के राजनीतीकरण से विपक्ष का हो जायेगा बंटाधार

 एक के बाद एक राज्यों में चुनावी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी बौखला गयी है| उसकी इसी बौखलाहट के कारण वो खुद ही भविष्य में अपने लिए कांटे बो रही है | मोदी सरकार के विरोध में पार्टी यह भूल चुकी है की जिस डाल पे बैठते है उसे काटा नहीं करते वह यह समझ नहीं पा रही की जनता अब तुष्टिकरण की राजनीती से ऊब चुकी है| उसे समझ में आ गया है की पार्टियां अपने वोट बैंक की राजनीती के लिए तुष्टिकरण से भी नहीं चुकती जिसका ताज़ा उदाहरण है उत्तर प्रदेश का चुनाव जिसमे मुस्लिम विरोधी का ठप्पा झेलते आ रही भाजपा को देवबंद जैसे मुस्लिम बहुल इलाके से भी जीत मिली और जबकि एक भी मुस्लिम उमीदवार  खड़े किये बिना लेकिन विपक्ष इसे ईवीम का घोटाला देने में लगा रहा| अपनी नाकामियों को माने की बजाये सारा दोष ईवीम पर मढ दिया| तीन तलाक़ के मुद्दे पर भाजपा को मुस्लिम महिलाओं का भरपूर साथ मिला जिसका परिणाम सबको पता है| लेकिन हार से सबक लेने की बजाए पार्टी अपने विरोधाभास में एक समाज की धार्मिक भावनाओ को आहत करने से बाज नहीं आ रही| क्रूर पशु बलि के खिलाफ कानून क्या बना केरल के कनूर में सरेआम एक बछड़े के ह्त्या कर दी गयी|कल को यदि सरकार स्वछता अभियान पे कोई सख्त कानून बनाये तो क्या विपक्ष सरे बाज़ार में सड़क के बीचों-बीच टट्टी खालेगा| अगर नहीं तो फिर मुद्दों की राजनीती करे ना की तुष्टिकरण की क्यूंकि इस प्रकार की राजनीती से कुछ साल कुछ महीनें ही कामयाबी मिलती है| लंबे समय तक नहीं जिसका परिणाम यह हुआ की राजस्थान में 1500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने पद से यह कहकर की गाय की बलि से उनके ह्रदय को पीड़ा हुई है| इसीलिए हम इस पार्टी का हिस्सा नहीं बने रहना चाहते यह तो शुरुआत भविष्य में और भी घोर राजनितिक परिणाम झेलने पड़ सकते है| अभी यह मुद्दा थमा ही नहीं था की कश्मीर में कोंग्रस के नेता रह चुके मणिशंकर अय्यर हुर्रियत  नेताओ के साथ भारतीय सेना का उपहास उड़ाने  में अलगावादियों के मत से सहमत नजर आते दिखे इसके बाद लेफ्ट के एक नेता ने जर्नरल रावत की तुलना हिटलर से कर  दी और हम जानते है सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने के बाद विपक्ष देश को शर्मशार कर दिया| जिसका परिणाम उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में जनता ने कांग्रेस को नकार दिया और अब मध्यप्रदेश में किसानो के शांतिपूर्ण आंदोलन को भड़काकर यदि विपक्ष यह समझ रहा है की वह अपनी इस राजनीती से आगामी चुनावों में कुछ फायदा होगा तो वो यह समझ ले जिस सरकार के नेता अपनी सेना पे प्रश्नचिह्न लगा सकते तो अब यह जनता तय ले की राजनितिक सफलता के लिए यह मासूम लोगों को अपनी राजनितिक आग में झुलसा सकते है|  जिसका उदहारण है सहरानपुर हिंसा में राजपूत और दलित दोनों तरफ से लोग मारे गए लेकिन विपक्ष के नेता केवल दलितों के परिजनों से मिलकर लौट आये और राजपूतो के परिजनों से हाल भी नहीं पूछा इस प्रकार  कि  राजनीती से वो ना केवल समाज को आपस में बांटते है अब लोगो को यह समझना चाहिए इस प्रकार कि माननसिकता रखने क्या उनका क्या भला करेंगे बंटवारे की राजनीती करके बंटवारा करके अपनी राजनितिक रोटियां शेक सकते है| और इसे ही नकरात्मक राजनीती कहते है नकरात्मक राजनीती से चुनाव जीते जा सकते है दिल नहीं कुछ समय के लिए लेकिन लंबे समय के लिए नहीं इसीलिए जो पार्टी मुद्दों पे राजनीती करेगी वो ही लंबे समय के लिए सफलता प्राप्त करेगी|