Wednesday, 12 July 2017

इस सावन हो जायो तैयार गौरीशंकर करेगे बेडा पार

श्रवण मास के इस शुभ अवसर पर अाज भोले नाथ के सर्गुण स्वरुप के बारे मे कुछ रोचक तथ्य अापको बताते अौर यह अत्यंत शुभ इसलिए भी है  कयोंकि इस बार का सावन सोमवार को ही अारंभ अौर सोमवार कि ही समाप्त हो रहा है एसा संयोग 50 वर्षो बाद बन रहा है| वैसे तो शिव एक ओंकार सवरुप है जिनका ना तो कोई रंग,रुप या अाकार है वो पुरुश अोर प्रकॢति  स्वरुप है| इसलिये उनकी पूजा शिवलिंग के रुप मे होति है परंतु  अपने भक्तो के लिए उस परम परमेश्वर ने स्वंय को पांच भागो अर्थात पांच दिव्य देहो अथवा दिव्य रुपो मे विभाजित किया यहि पांच दिव्य रुप पंच महादेव कहलाते है|जिनकि अराधना शिवरात्री के या अभी चल रहे सावन के पर्व पे शिव भक्तो के लिये अतंयत महत्त्वपूर्ण हो जाति है| अोर यह पंच रुप है गणेश,कार्तिके,नंदी,मां जगदम्बा(पार्वति) अौर भोलेनाथ शंकर अोर इन्ही का पंचाक्षरी मंत्र है ऊं नमः शिवाय जो पंच तत्वो का प्रतीक भी है अग्नि,वायु,जल,धरती,अाकाश यजुर वेद मे इसे ही पंच ब्रह्मा अर्थात कायनाथ का हर स्वरुप के पांच भाग होते है| इसिलिए ही दूसरे धर्मो मे भी संख्या पांच को पाक माना गया है| इसी कारण से यह पाया गया है कि भगवान शिव कि पूजा पांच क्रम या वक्तो मे की जाती है इसी कारण से हमार देश मे शैव ओर शाक्त समप्रदाय के लोग शिव-शक्ति के हर पर्व को बडे नियमा अनुसार जोश के साथ मनाते है पंच महादेव कि पूजा विधि इस प्रकार है| 
 अाप पांच देवो कि स्थापना करके गंगाजल,गाय का दूध, घी अथवा शहद के साथ थोडा जल मिलाकर जनेयु,रोली,भांग,धतूरा शिवलिंग पे बिल्वपत्र् जरुर चढाये ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप 7,5,108 बार प्रतिदिन करे अापको मानसिक अौर शरिरीक लाभ जरुर मिलेंगे अौर गौरीशंकर सहपरिवार पूजा पारिवारिक समस्याओ सुख,शांति अोर भौतिक सुविधायो के लिये बडि लाभकारी होती है| जिस प्रकार वैश्णव समप्रदाय के लोगो के लिये लक्षमीनारायण कि पूजा होती है ठीक उसी प्रकार गौरीशंकर कि अराधना शैव ओर शाक्त समप्रदाय लोगो के लिये मह्त्त्वपूर्ण मानी जाती है|
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