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Friday, 28 July 2017

शीत युद्ध ३.०

डोकलाम विवाद पे जिस प्रकार भारत अोेर चीन के बीच जो जंग चल रही है उसे 21वी सदी का शीत युद्ध कहना ज्यादा सहज होगा| लेकिन अपने पाठको को पहले यह बता दूं कि शीत युद्ध होता क्या है? इसे अाप अंग्रेजी मे "कोल्ड वार" के नाम से भी जानते है सर्वप्रथम यह युद्ध दि्तीय वि्श्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अाज का रुस अोेर अमेरिका के बीच लडा गया था| यह पारस्पारिक युद्ध से अलग होता जिसमे गोला,बारुद या हथियारो का इस्तेमाल नहि होता बल्कि इसे विचारो का युद्ध कहते है जिसमे लेखको को की कल्म देश का मीडिया एक दूसरे के ऊपर रणनीतीक दबाव बनाते है लेकिन अह्म सवाल यह कि यह युद्ध किस बात को लेकर था| तो जैसा कि अाप सभी जानते है कि दि्तीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अोर अमेरिका दो शक्तिशाली देश थे अार्थिक ओर मिलिट्री दोनो ही क्षेत्रो  मे लेकिन यह युद्ध भविष्य के अार्थिक तंत्र को लेकर विश्व मे किस प्रकार के अार्थिक माडल कि दुनिया के दूसरे देश अपनाएंगे एक तरफ था सोशलिस्ट तंत्र जिसकी अगुवाई सोवियत संघ कर रहा था दूसरी तरफ था निजिकरण प्रावेटिस्ट कैपिटल माडल जिसकी अगुवाई अमेरिका कर रहा था सभी अन्य देश पुरा विश्व दो धडो मे बट चुका था| सोशलिस्ट माडल मे सारी पावर सरकारी विभागो के पास होती है सभी सरकारी विभागो के अह्म निर्णय सरकार लेती है जब कि कैपिटलिस्ट माडल मे विभागो का एकिकरण हो जाता लिबिरलाइजेशन,प्राईवेटाईजेशन,ग्लोबलाईजेशन सरल शब्दो निजिकरण,एकिकरण यह माडल अमेरिका का है| इसी विषय पे दोनो देश अामने-सामने अा गये अोर स्थिति युद्ध तक पहुंच गयी कयू्बा छोटे से तटिय देश पर रुस ने अपनी बैलिस्टिक मिसाईलस टेस्टिंग कि जिस प्रकार चीन ने तिब्बत मे युद्ध अभ्यास किया था| जवाब मे अमेरिका ने भी अपना यु्द्ध पोत कैरिबियन सी मे तैनात कर दिया अोर अंतिम चेतावनी दि कि हम फुल स्केल न्युकलियर वार के लिये तैयार है| लेकिन युद्ध को रोकने के प्रयास से अमेरिका ने एक संदेश रुस को भेजा इसे ना केवल दोनो ही देश अपितु पूरी दुनिया तबाह हो जायेगी जिसके चलते सोवियत संघ ने अपने सैनिक वापिस बुला लेिए अौर एक बहुत बडा संकट टल गया| लेकिन सोवियत संघ अपना ज्यादा खर्च सेना ओर हथियारों पे करता था जिसके चलते वहां पे अार्थिक संकट बढता चला गया,बेरोजगारी बढती गयी अोर धीरे-धीरे सोवियत संघ टूट कर कई अलग देशों मे बंट गया जिससे यह साबित हो गया कि अमेरिका का एलपीजी माडल भविष्य के लिए ज्यादा त्रेष्ठ है अब एसी ही स्थिति भूटान के डोकलान क्षेत्र को लेकर जिस पे चीन अपना दावा करता है भारत अोर चीन कि है भारत ओर भूटान का संबध इतना गहरा जिस प्रकार अमेरिका अोर क्यूबा के संबध थे|  जिसके चलते भारत भूटान को कोई अलग देश नही मानता बल्कि भारतीय सेना ही भूटान कि सीमा सुरक्षा करती है भारत ओर भूटान के लोगो कि किसी विजा कि जरुरत नही पडती दोनो देशो के नागरीक किसी राज्य कि तरह यहां से वहां या वहां से यहां अा जा सकते है| इसी कारण भूटान अोर भारत दोनो कि संप्रभुता को बचाने के लि‌ये भारत ने डोकलाम क्षेत्र पर सख्त कदम उठा वहां पे अपनी सेना तैनात कर दी अोर चीन को सडक बनाने से रोक दिया वहां पर सडक बन जाने से ना केवल भूटान बल्कि चीन भारत ,भूटान, सिकिम्म को जोडने वाले सिलिगुडी कारीडोर तक पहुंच जाएगा |चीन का मीडीया भी रोज भारत पे दबाव बनाने के लिए धमकी देता रहता है लेकिन भारत भी पीछे हटने को तैयार नही अपने रुख पे अडिग है अोर साफ कहा हम भी युद्ध के लिए सज है| जिसको देखते हुए अजित डोभाल चीन दौरे पर गये अोेर बातचीत करी जिसमे चीन भी यह कहने को मजबूर हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतॄत्व मे हिंदोस्तान कि विदेश नीती मजबूत हुई है जिसमे साफ पता चलता है कि दोनो देशो के बीच चल रहा यह शीत युद्ध अागे भी एसे ही जारी रहेगा अोेर विचारो कि गोलीबारी एसे ही जारी ही रहेगी|




























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