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Saturday, 11 November 2017

अार्थिक नही मानसिक विकास पे दिजिए ध्यान

अभी हाल ही मे प्रदयूमन हत्याकांड के बारे मे सबने सुना अोर पढा ओर जब हरियाणा पुलिस कि जांच शक के दायरे मे अाई तो यह केस सीबीआई के पास गया| लेकिन सीबीअाई कि जो रिर्पोट अाई उसने तो मुझे तो अाशचर्य मे डाल दिया ओर मै अकेला नही युवा पीढी के कई युवाओ को अचंभित किया होगा| अाज तक यह जरुर सुना था कि किसी वर्ग का दूसरे वर्ग से झगडा हो गया,अार्थिक परेशानी के चलते शख्स ने कि हत्या,अापसी रंजिश के चलते पुरे परिवार को मौेेत के घाट उतारा|परंतु यह नहि सोचा था कि कभी यह भी सुनने को मिलेगा कि परीक्षा रद्ध कराने के लिए पेरेंट मीटींग कैंसल कराने के लिए 11 कक्षा के छात्र ने कि हत्या| अोर भी कई उदाहरण है जैसे 1 रुपये के लिए गई हत्या,होटल मे पराठे के उपर कि गयी हत्या मतलब सोचने वाली बात यह है कि इंसान कि जान की कोई कीमत नहि रह गयी| 1 रुपये जी अापने सही सुना दोस्तो 1 रुप‌ये यही एक इंसान कि जान कि कीमत वो तो भला हो सरकार का जो अठ्ठनी-चव्न्नी के सिक्के निषेध कर दिये नही तो वो दिन भी दूर नही था कि अठ्ठनी,25 पैसे के लिए एक शक्श ने गोली से कि हत्या| यह सब जब सुनने को  मिलता दिमाग मे बात अाती है  कौन से समय अोर किस समाज का निर्माण कर रहे है| हम अपनी अाने वाली पीढी के लिए,क्या उदाहर्ण रख रहे है| अाज हम समाज के उस निम्न स्तर पर पहुंच चुके है |जहां से नीचे जाना भी संभव नही एक कहावत है कि कितना नीचे गिरेगा भाई? लेकिन नीचे गिरने के लिए भी धरती चाहिए होती है अब कही कहावत बदलनी ना पडे कहां गिरेगा भाई गिरने के लिए कुछ बचा ही नही| तो एसी स्थिति मे तो केवल अाप उपर उठने कि ओर ही देख सकते है| अर्थात समाज का स्तर उठाने से अाजकल दौड-भाग की जिंदगी हो गई हर कोई अपने से सामने वाले को कुचलकर अागे बढना चाहता है| इन्ही सब मे हम अपने बच्चो का अार्थिक,स्वास्थिक विकास कि और तो ध्यान देते है लेकिन मानसिक विकास को कोई ध्यान नही देते जिसका परिणाम यह घटनाए है| अरे भाई जब अाप मानसिक तौर पे सक्षम होंगे तो बाकि सब अपने आप ही ठीक हो जायेगा| शरीर कि बजाए मनुषय के गुणो उसका अांतरिक विकास कि ओेर ध्यान दे तो ही जाके कुछ बदलाव होगा पुरानी कहावत है इंसान को दो तरह कि 'भूख लगती है पेट कि ओर चेतन (मन) कि पेट कि भूख को मिटाने का प्रयास हर कोई करता है| पर मन या दिमाग कि भूख कि ओर  उसका ध्यान नही जाता मनोवैज्ञानिक चिकित्सक भी कहते है कि 10से15 वर्ष कि अायु एसी होेती है कि वहां पे वयक्ति सबसे ज्यादा प्रशन करता है| ओर उस अवस्था मे सबसे ज्यादा जरुरत मां-बाप को अपने बच्चे पर ध्यान देने कि होती है,एसी स्थिति मे बच्चे कि वैचारिक,सोचने-समझने कि शक्ति को विकसित जिससे वो कोई भी कदम उठाने से पहले २ बार सोचे सही है या गलत| जैसा कि इस केस मे बच्चे ने कहा कि मै बस पेरेंट मीटींग ओर परीक्षाए कैंसल कराना चाहता था ओर समझने मे नही अाया क्या किया जाए इसलिए यह काम किया| मतलब सोचिए यहां असफलता के भय ११ वी क्क्षा के छात्र से कया करा दिया यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो किसी के साथ भी हो सकता बहतर यहि कि हम युवाओ के बढती उम्र मे मानसिक विकास कि ओर ज्यादा ध्यान दे जिससे खुद सक्षम बन सके| 
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