प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्त्वकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू होने से पहले ही विफल हो चुकी है क्यूंकि आप ही बताइए स्मार्ट सिटी परियोजना मकसद क्या है 100 नई स्मार्ट सिटीज बनाना लेकिन स्मार्ट सिटीज की जो पहली सूची आई है उनमे से ज्यादातर जो शहर चुने वो मौजूदा हालात में भी दुसरो से काफी आगे है जैसे अहमदाबाद,चंडीगढ़ इत्यादि और सबसे चौकाने वाली बात यह है दोस्तों की उत्तर प्रदेश और बिहार में से एक भी शहर नही चुना गया जिसकी वजह से यह परियोजना विफल हो जाएगी जरा सोचिये सबसे ज्याद लोग रोज़गार के लिए किन राज्यों से दुसरे राज्यों में जाते है उत्तर प्रदेश और बिहार से अब जब इन्ही राज्यों में से कोई शहर पहली सूची में अपनी जगह नही बना पाया तो फिर फायदा क्या है ऐसी परियोजना का? स्मार्ट सिटी का मतलब तो यही होता है ना कि शहर को सभी मूलभूत सुविधायें देना जब की होना यह चाहिए था की पहली सूची में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार में से इस परियोजना के लिए शहर चुने जाने चाहिए थे क्यूंकि यही सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य है और इन राज्यों में जितना ज्यादा विकास होगा दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों पे से बोझ उतना ही कम होगा क्यूंकि जो शहर पहले से ही दुसरो से अव्वल है उन्हें तो बाद में भी विकसित कर सकते है लेकिन जिन शहरों अथवा राज्यों में आबादी ज्यादा है वहां स्मार्ट सिटी परियोजना लागू करनी चाहिए ज्यादा से ज्यादा स्मार्ट सिटीज बनानी चाहिए माना की इन राज्यों के शहरों के विकास में कुछ बहुत बड़ी मूलभूत कठिनाईयाँ है लेकिन इन राज्यों के शहरों का विकास कर देने से ना केवल इन राज्य के शहरों को लाभ होगा बल्कि दुसरे राज्यों के शहरों को भी लाभ होगा उदहारण के तौर पे अभी 2 करोड़ लोगो की बसावट वाले मुंबई शहर में 20 करोड़ आबादी रहती है जिसे मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों पे बोझ बढ़ रहा आबादी ज्यादा होने से लोगो को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे रोजगार के अवसर काम पैदा होते है.महंगाई दिनोंदिन बढ़ रही है इत्यादि इसलिए मेरी सरकार से यह विनती इन राज्यों के शहरों को वो ज्यादा प्राथमिकता दे माना इन राज्यों के शहरों के विकास में काफ़ी कठिनाईयाँ है लेकिन जैसा की सिंगापुर को बनाते समय नेल्सन मंडेला ने कहा था की हर कार्य कठिन लगता है जब तक वह पूरा नही हो जाता तो इसलिए कठिन भले ही लेकिन असंभव नही
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