भारत ओर चीन के बीच तनातनी के चलते देश मे अलग-अलग संस्थअो द्वारा चीनी समान का बहिषकार करने कि लोगो से अपील कि जा रही है लेकिन इसी बीच कुछ लोग एसे भी है| जो यह कहते है सरकार अाधिकारिक तौर पे यह काम कयो नही करती? ओर अपने अाप को कथित देशभक्त साबित कर एसे अांदलनो के रास्ते रोडे का काम करते है| एसे लोगो को देश से कोई मतलब नही केवल सरकार को घेरने का मौका चाहिए क्योंकि यह जानते है कि एसा करना लगभग असंभव है जिसका कारण है विश्व व्यापार संधि जिसके तहत कोई भी देश अंतराष्ट्रिय व्यापार मे पूर्णता प्रतिबंधित नही लगा सकता तो एसे मे सवाल उठता है कि क्या चीनी समान का बहिषकार का कोई लाभ नही क्या जो लोग संस्थाए एसा कर रहे है उनके प्रयास का कोई मोल नही काफी असमंजस कि स्थिति ओर कई प्रशन उमड रहे होंगे| तो इसका उत्तर कुछ इस प्रकार है जापान मे भी यह अंतराष्ट्रिय संधि लागु होती है लेकिन फिर भी वहां अमेरिका के लोग अपना समान नही बेक सकते जिसमे ऊनकी सरकार इसमे कोई दबाव नही बल्कि वहां के देश के लोगो का अपने देश के प्रति देशे भक्ति का भाव है| दर्शल द्तीय विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिको ने यह ठाना कि अमेरिका कि कोई भी वस्तु का उपयोग नही करेगें बल्कि स्वदेशी समान को ही अपनाएंगे ओर खुद इतने सश्कत होंगे कि दुनिया भर मे हमारा समान बिके परिणाम स्वरुप अमेरिकी कंपनिया जापान से सदैव अार्थिक घाटा हि झेलती है इसी कारण अमेरिकी कंपनियां ना के बराबर हि जपान मे निवेश करती है| जिसका एक ओर कारण जापानी प्रडक्टस का गुणवत्ता ओर कीमत के मामले अधिक सक्शम होना है होंडा,सुजुकि,पैनासोनिक, यह वो नाम है जिनकी तुती दुनिया भर मे बोलती है| ठीक इसी प्रकार यदि हम नागरिक स्तर पे इस अांदोलन को जापान के लोगो कि तरह प्रेरणा लेेते हुए बढाए तो हम बिना युद्ध लडे ही चीन को परास्त कर सकते हाल ही मे अभी हमारे व्यापारियो ने ओर हमारी बहनो ने राखी के इस पर्व पर सहयोग से चीन कि एक कंपनी को बीस करोड का घाटा हुुुया है जिसका असर वहं के सरकारी अखबार मे उस व्यापारी ने खीज मे लिखा कि हमे भारत का कुछ करना होगा लेकिन इसे अभी पूरे देश मे प्रभावी बनाना होगा| दोस्तो हर काम सरकार या सेना नही कर सकती बल्कि नागरिको को भी अपने स्तर पर करने होते है| क्योंकि नागरिको से देश बनता है यदि जापान जैसेे देश एसा कर सकते है तो हमे भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए अाखिर हर बार सेना ही लडाई कयो करे? जबकि देश कुछ एसे गद्धार मौजूद है जो सेना कि कार्यवाही का सबूत मांगते है| सेना से सबूत तो सेना तो नागरिको के लिए होती है ओर यदी नागरिक हि अपनी जिम्मेदारियो को ना समझे तो बडी से बडी सेना भी छोटि से छोटि लडाई भी नही जीत सकती इस बात का सबसे बडा उदाहरण है वियतनाम ने जब अमेरिका को युद्ध मे परास्त वहां के लोगो बंदूक से ही अमेरिकी जैट मटियामेठ कर दिये थे| एक-एक शहरी अपनी जान देने के लिए तैयार था गोरिल्ला टैक्टिक्स से इतनी अाधुनिक तकनीकयुक्त सेना को पछाड दिया ओर अपने देश से भगा दिया|

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