अंतराष्टरीय संस्थाओ का नही कोई लाभ केवल पशचिमी देशों ने अपने हितो को थोपने के लिए एसी संस्थाए बनाई है क्या? यह बात मै उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग के संर्दभ मे कह रहा हूं| अमेरिका की चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के पाबंदीयो के बावजूद उत्तर कोरिया बाज नही अाया ओर हाईडरोजन बम का सफल परीक्षण किया अोर यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन मे अमेरिका को धमकि तक दे डाली| जापान के उपर से मिसाईल छोडना साउथ कोरिया के करीब से मिसाईल परीक्षण करना यह दिखाता कि यदी इस सनकी तानाशाह से जल्दी नहि निपटा गया तो वो जो अंग्रेजी का शब्द है ट्रिगर तीसरे विशव युद्ध की कल्पना हकिकत बने मे देर नही लगेगी| इतना ही नही नामी-ग्रामी अंतराष्ट्रिय संस्थाओं कि अाड मे अपने से संप्न्न देश को बर्बाद करने का एजेंडा चल रहा है| फिर चाहे वो पशचिमी देशो मे मुसलिम शरर्णथीयो का समर्थन करना हो या रोंहिग्या के मुदे पे अााधा सच दिखाना ना जाने कब से यह दिखाया जा रहा था कि रोहिंगया मुसलिम शरणार्थीयो के साथ कितना जु्र्म,अत्याचार हो रहा हेै| बल्कि बोद्ध तो छोडिये इन लोगो ने रखाईन प्रांत मे हिंदुओ कौ भी नही छोडा 100 से ज्यादा शव मिलने पर सारे सेक्युलरो के मुंह मानो दही जम गयी हो| अरे इन लोगो का इतना ब्रेन वाश किया जा चुका है कि जहां भी जाएंगे गंदगी ही फैलाऐंगे ओर फिर यदी इतने ही हयूम्न राईटस वाले हितैषी है|तो पहले इस बात का उत्तर दे कि कोई भी अरब मुसलिम देश इन्हे शरण क्यूं नही दे रहा है? सच तो यह है कि यह संस्थाए ओर इनको चलाने वाले पैसे मिलते ही गिरगिट कि तरह रंग बदलते है हर जगह हर देश मे किसी ना किशी विचारधारा का सर्मथन कर परेशानी ओर विवाद पैदा कर रहे है ओररइसमे उपर से लेकर नीचे तबके हर वर्ग के लोग शामिल है| इनको एक सोफ्ट वेप्नस कि तरह इसतेमाल किया जा रहा है| ओर हर देश अपने से संपन्न देश को बर्बाद करना चाहता है एक जगह तो इनही कट्टरवादी ताकतो को हथियार दिए जाते है ओर उसके बाद शरणार्थी सम्सया खडी कि जाती है इस तरह जहर एक जगह ना रहकर संपुर्ण विश्व मे फैलाया जाता है ओर फिर धीरे-धीरे उस देश को अंदर से खोकला किया जाता है| अंततः उसे जंग का मैदान बना दिया जाता है ओर उसमे सबसे बडा सहायक एसी संस्थाएं होती है जो मानवता के नाम पर अपना गुप्त एेजेंडा चलाते है| सर्वपर्थम तो इन्ही संस्थाओ को खत्म कर प्रतयेक देश अपने तरीके से अपनी सम्सया सुलझाए जब तक इनका प्रभाव को सीमीेत कर इन पे सख्त कानून के दायरे मे लाया जाना चाहिए जिसे इनकी जवाबदेही तय कि जा सके अन्यथा एसी संस्थाए विवाद ही पैदा करेंगी अोर विावद से नफ्रत ही बढेगी|
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