अभी हाल ही मे प्रदयूमन हत्याकांड के बारे मे सबने सुना अोर पढा ओर जब हरियाणा पुलिस कि जांच शक के दायरे मे अाई तो यह केस सीबीआई के पास गया| लेकिन सीबीअाई कि जो रिर्पोट अाई उसने तो मुझे तो अाशचर्य मे डाल दिया ओर मै अकेला नही युवा पीढी के कई युवाओ को अचंभित किया होगा| अाज तक यह जरुर सुना था कि किसी वर्ग का दूसरे वर्ग से झगडा हो गया,अार्थिक परेशानी के चलते शख्स ने कि हत्या,अापसी रंजिश के चलते पुरे परिवार को मौेेत के घाट उतारा|परंतु यह नहि सोचा था कि कभी यह भी सुनने को मिलेगा कि परीक्षा रद्ध कराने के लिए पेरेंट मीटींग कैंसल कराने के लिए 11 कक्षा के छात्र ने कि हत्या| अोर भी कई उदाहरण है जैसे 1 रुपये के लिए गई हत्या,होटल मे पराठे के उपर कि गयी हत्या मतलब सोचने वाली बात यह है कि इंसान कि जान की कोई कीमत नहि रह गयी| 1 रुपये जी अापने सही सुना दोस्तो 1 रुपये यही एक इंसान कि जान कि कीमत वो तो भला हो सरकार का जो अठ्ठनी-चव्न्नी के सिक्के निषेध कर दिये नही तो वो दिन भी दूर नही था कि अठ्ठनी,25 पैसे के लिए एक शक्श ने गोली से कि हत्या| यह सब जब सुनने को मिलता दिमाग मे बात अाती है कौन से समय अोर किस समाज का निर्माण कर रहे है| हम अपनी अाने वाली पीढी के लिए,क्या उदाहर्ण रख रहे है| अाज हम समाज के उस निम्न स्तर पर पहुंच चुके है |जहां से नीचे जाना भी संभव नही एक कहावत है कि कितना नीचे गिरेगा भाई? लेकिन नीचे गिरने के लिए भी धरती चाहिए होती है अब कही कहावत बदलनी ना पडे कहां गिरेगा भाई गिरने के लिए कुछ बचा ही नही| तो एसी स्थिति मे तो केवल अाप उपर उठने कि ओर ही देख सकते है| अर्थात समाज का स्तर उठाने से अाजकल दौड-भाग की जिंदगी हो गई हर कोई अपने से सामने वाले को कुचलकर अागे बढना चाहता है| इन्ही सब मे हम अपने बच्चो का अार्थिक,स्वास्थिक विकास कि और तो ध्यान देते है लेकिन मानसिक विकास को कोई ध्यान नही देते जिसका परिणाम यह घटनाए है| अरे भाई जब अाप मानसिक तौर पे सक्षम होंगे तो बाकि सब अपने आप ही ठीक हो जायेगा| शरीर कि बजाए मनुषय के गुणो उसका अांतरिक विकास कि ओेर ध्यान दे तो ही जाके कुछ बदलाव होगा पुरानी कहावत है इंसान को दो तरह कि 'भूख लगती है पेट कि ओर चेतन (मन) कि पेट कि भूख को मिटाने का प्रयास हर कोई करता है| पर मन या दिमाग कि भूख कि ओर उसका ध्यान नही जाता मनोवैज्ञानिक चिकित्सक भी कहते है कि 10से15 वर्ष कि अायु एसी होेती है कि वहां पे वयक्ति सबसे ज्यादा प्रशन करता है| ओर उस अवस्था मे सबसे ज्यादा जरुरत मां-बाप को अपने बच्चे पर ध्यान देने कि होती है,एसी स्थिति मे बच्चे कि वैचारिक,सोचने-समझने कि शक्ति को विकसित जिससे वो कोई भी कदम उठाने से पहले २ बार सोचे सही है या गलत| जैसा कि इस केस मे बच्चे ने कहा कि मै बस पेरेंट मीटींग ओर परीक्षाए कैंसल कराना चाहता था ओर समझने मे नही अाया क्या किया जाए इसलिए यह काम किया| मतलब सोचिए यहां असफलता के भय ११ वी क्क्षा के छात्र से कया करा दिया यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो किसी के साथ भी हो सकता बहतर यहि कि हम युवाओ के बढती उम्र मे मानसिक विकास कि ओर ज्यादा ध्यान दे जिससे खुद सक्षम बन सके|
adcode
Saturday, 11 November 2017
Monday, 2 October 2017
अंतराष्टरीय संस्थाओ का नही है कोई लाभ
अंतराष्टरीय संस्थाओ का नही कोई लाभ केवल पशचिमी देशों ने अपने हितो को थोपने के लिए एसी संस्थाए बनाई है क्या? यह बात मै उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग के संर्दभ मे कह रहा हूं| अमेरिका की चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के पाबंदीयो के बावजूद उत्तर कोरिया बाज नही अाया ओर हाईडरोजन बम का सफल परीक्षण किया अोर यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन मे अमेरिका को धमकि तक दे डाली| जापान के उपर से मिसाईल छोडना साउथ कोरिया के करीब से मिसाईल परीक्षण करना यह दिखाता कि यदी इस सनकी तानाशाह से जल्दी नहि निपटा गया तो वो जो अंग्रेजी का शब्द है ट्रिगर तीसरे विशव युद्ध की कल्पना हकिकत बने मे देर नही लगेगी| इतना ही नही नामी-ग्रामी अंतराष्ट्रिय संस्थाओं कि अाड मे अपने से संप्न्न देश को बर्बाद करने का एजेंडा चल रहा है| फिर चाहे वो पशचिमी देशो मे मुसलिम शरर्णथीयो का समर्थन करना हो या रोंहिग्या के मुदे पे अााधा सच दिखाना ना जाने कब से यह दिखाया जा रहा था कि रोहिंगया मुसलिम शरणार्थीयो के साथ कितना जु्र्म,अत्याचार हो रहा हेै| बल्कि बोद्ध तो छोडिये इन लोगो ने रखाईन प्रांत मे हिंदुओ कौ भी नही छोडा 100 से ज्यादा शव मिलने पर सारे सेक्युलरो के मुंह मानो दही जम गयी हो| अरे इन लोगो का इतना ब्रेन वाश किया जा चुका है कि जहां भी जाएंगे गंदगी ही फैलाऐंगे ओर फिर यदी इतने ही हयूम्न राईटस वाले हितैषी है|तो पहले इस बात का उत्तर दे कि कोई भी अरब मुसलिम देश इन्हे शरण क्यूं नही दे रहा है? सच तो यह है कि यह संस्थाए ओर इनको चलाने वाले पैसे मिलते ही गिरगिट कि तरह रंग बदलते है हर जगह हर देश मे किसी ना किशी विचारधारा का सर्मथन कर परेशानी ओर विवाद पैदा कर रहे है ओररइसमे उपर से लेकर नीचे तबके हर वर्ग के लोग शामिल है| इनको एक सोफ्ट वेप्नस कि तरह इसतेमाल किया जा रहा है| ओर हर देश अपने से संपन्न देश को बर्बाद करना चाहता है एक जगह तो इनही कट्टरवादी ताकतो को हथियार दिए जाते है ओर उसके बाद शरणार्थी सम्सया खडी कि जाती है इस तरह जहर एक जगह ना रहकर संपुर्ण विश्व मे फैलाया जाता है ओर फिर धीरे-धीरे उस देश को अंदर से खोकला किया जाता है| अंततः उसे जंग का मैदान बना दिया जाता है ओर उसमे सबसे बडा सहायक एसी संस्थाएं होती है जो मानवता के नाम पर अपना गुप्त एेजेंडा चलाते है| सर्वपर्थम तो इन्ही संस्थाओ को खत्म कर प्रतयेक देश अपने तरीके से अपनी सम्सया सुलझाए जब तक इनका प्रभाव को सीमीेत कर इन पे सख्त कानून के दायरे मे लाया जाना चाहिए जिसे इनकी जवाबदेही तय कि जा सके अन्यथा एसी संस्थाए विवाद ही पैदा करेंगी अोर विावद से नफ्रत ही बढेगी|
Saturday, 5 August 2017
स्वदेशी अपनाए देश सेवा मे अपना योगदान बढाए
भारत ओर चीन के बीच तनातनी के चलते देश मे अलग-अलग संस्थअो द्वारा चीनी समान का बहिषकार करने कि लोगो से अपील कि जा रही है लेकिन इसी बीच कुछ लोग एसे भी है| जो यह कहते है सरकार अाधिकारिक तौर पे यह काम कयो नही करती? ओर अपने अाप को कथित देशभक्त साबित कर एसे अांदलनो के रास्ते रोडे का काम करते है| एसे लोगो को देश से कोई मतलब नही केवल सरकार को घेरने का मौका चाहिए क्योंकि यह जानते है कि एसा करना लगभग असंभव है जिसका कारण है विश्व व्यापार संधि जिसके तहत कोई भी देश अंतराष्ट्रिय व्यापार मे पूर्णता प्रतिबंधित नही लगा सकता तो एसे मे सवाल उठता है कि क्या चीनी समान का बहिषकार का कोई लाभ नही क्या जो लोग संस्थाए एसा कर रहे है उनके प्रयास का कोई मोल नही काफी असमंजस कि स्थिति ओर कई प्रशन उमड रहे होंगे| तो इसका उत्तर कुछ इस प्रकार है जापान मे भी यह अंतराष्ट्रिय संधि लागु होती है लेकिन फिर भी वहां अमेरिका के लोग अपना समान नही बेक सकते जिसमे ऊनकी सरकार इसमे कोई दबाव नही बल्कि वहां के देश के लोगो का अपने देश के प्रति देशे भक्ति का भाव है| दर्शल द्तीय विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिको ने यह ठाना कि अमेरिका कि कोई भी वस्तु का उपयोग नही करेगें बल्कि स्वदेशी समान को ही अपनाएंगे ओर खुद इतने सश्कत होंगे कि दुनिया भर मे हमारा समान बिके परिणाम स्वरुप अमेरिकी कंपनिया जापान से सदैव अार्थिक घाटा हि झेलती है इसी कारण अमेरिकी कंपनियां ना के बराबर हि जपान मे निवेश करती है| जिसका एक ओर कारण जापानी प्रडक्टस का गुणवत्ता ओर कीमत के मामले अधिक सक्शम होना है होंडा,सुजुकि,पैनासोनिक, यह वो नाम है जिनकी तुती दुनिया भर मे बोलती है| ठीक इसी प्रकार यदि हम नागरिक स्तर पे इस अांदोलन को जापान के लोगो कि तरह प्रेरणा लेेते हुए बढाए तो हम बिना युद्ध लडे ही चीन को परास्त कर सकते हाल ही मे अभी हमारे व्यापारियो ने ओर हमारी बहनो ने राखी के इस पर्व पर सहयोग से चीन कि एक कंपनी को बीस करोड का घाटा हुुुया है जिसका असर वहं के सरकारी अखबार मे उस व्यापारी ने खीज मे लिखा कि हमे भारत का कुछ करना होगा लेकिन इसे अभी पूरे देश मे प्रभावी बनाना होगा| दोस्तो हर काम सरकार या सेना नही कर सकती बल्कि नागरिको को भी अपने स्तर पर करने होते है| क्योंकि नागरिको से देश बनता है यदि जापान जैसेे देश एसा कर सकते है तो हमे भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए अाखिर हर बार सेना ही लडाई कयो करे? जबकि देश कुछ एसे गद्धार मौजूद है जो सेना कि कार्यवाही का सबूत मांगते है| सेना से सबूत तो सेना तो नागरिको के लिए होती है ओर यदी नागरिक हि अपनी जिम्मेदारियो को ना समझे तो बडी से बडी सेना भी छोटि से छोटि लडाई भी नही जीत सकती इस बात का सबसे बडा उदाहरण है वियतनाम ने जब अमेरिका को युद्ध मे परास्त वहां के लोगो बंदूक से ही अमेरिकी जैट मटियामेठ कर दिये थे| एक-एक शहरी अपनी जान देने के लिए तैयार था गोरिल्ला टैक्टिक्स से इतनी अाधुनिक तकनीकयुक्त सेना को पछाड दिया ओर अपने देश से भगा दिया|
Monday, 31 July 2017
नार्थ कोरिया ओर पाकिसतान दुनिया के लिए बन सकते है गहन संकट
द्क्षिण एशिया मे पाकिस्तान अोेर पूर्व मे नार्थ कोरिया दोनो इस वक्त दुनिया के लिए एक गहरा संकट है| दोनो देशो मे एसे हालात बन रहे है जो दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध या एक बहुत बडे वैशविक संकट कि ओर धकेल सकते है| जहां एक ओर पाकिस्ताम मे तख्तापलट होना ना केवल पाकिस्तान बल्कि भारत के लिए भी एक बडा खतरा हो सकता है कारण पाकिस्तान मे जब भी तख्तापलट होता है तब वहां कि सेना सत्ताह पे काबिज होने कि कोशिश करती है ओेर अपना प्रभुत्व स्थापित करती है| पाकिस्तान का इतिहास रहा है जब भी वहां तख्तापलट हुअा तब तब भारत से जंग हुई ओर इस समय तो अार्थिक रुप से भी अातंकिस्तान दिवालिया होने के निकट है इसी के साथ पाकिस्तान के परमाणु बम के अातंकियो के हाथ मे जाने का खतरा लगातार बना हुअा है| अातंकिस्तान कि भारत के प्रति द्वेष कि भावना इतनी प्रबल है कि उसके लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जा सकता है यहां तक कि अपने परमाणु तकनीख को दूसरे देशो को बेचने कि कोशिश पहले कर चुका है| अोर विश्व के विद्वानो का तर्क है कि पाकिस्तान अपने अार्थिक संकट के लिए एटम बम कि तकनीक दूसरेे देशो को बेचने से परेह्ज नही करेगा|वही दूसरी ओर उतर कोरिया लगातार लंबी दूरी तक वार करने वाली मिसाईलों का परीक्षण करने मे लगा हुअा है जिसके चलते रोज अमेरिका से युद्ध कि धमकी देने से बाज नही अाता अभी हाल ही मे जानकारो कि माने तो पाकिस्तान भी नार्थ कोरिया के इन प्रयासो मे उसकी तकनीकी रुप से सहायता कर रहा है| उसने जापान केि सीमा मे अपना मिसाइल परीक्षण किया जिसके जापान सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है| ओर अमेेरिका ने अपना बमवर्षक वाहन जापान ओर उतर कोरिया कि सीमा मे तैनात कर दिए ओर जरुरत पडने पर ठोस कदम उठाने से भी नही चुकेगा वही दूसरी अोर गौर करने वाली बात यह है कि कोरिया हो या अातंकिस्तान इन दोनो को चीन का संरक्षण प्राप्त हो रहा है| उलटा किम जोंग उत्तर कोरिया को समझाने कि बजाय चीन अमेरिका कोई हिदायत दे रहा है उधर अाज ही अास्ट्रेलिया मे विमानो के जरिए अातंकी हमले साजिश नाकाम कि गयी है अोर जांच एेजेंसियो को अापरेशन के हैन्डलर्स पाकिस्तान मे मौजूद होने सबूत मिले है| इसे इस बात को बल मिलता है कि अातंकिस्तान मे सेना ओर अातंकियो मे कोई फर्क नही है ओर ना जाने कब पाकिस्तान के एटम बम अातंकियो के हाथ लग जाए अाप देख ही सकते है किस प्रकार गंभीर परिस्थितियां उमड रही है जिसमे 3-6 देश सीधे तरह से सम्मलित है एक कि भी चूक ओर परिणाम विनाशकारी भी हो सकता है एसा मै इसलिए कह रहा हूं जरा अाप लोगे पढेंगे ओेर खोजबीन करेंगे कि द्तीय विश्व युद्ध कैसे शुरु हुअा तो अाप कारण जान अपना सर पिट लिंगे एक जान कि कीमत के बदले सैकडो जानें कुर्बान कर दी गयी|
Friday, 28 July 2017
शीत युद्ध ३.०
डोकलाम विवाद पे जिस प्रकार भारत अोेर चीन के बीच जो जंग चल रही है उसे 21वी सदी का शीत युद्ध कहना ज्यादा सहज होगा| लेकिन अपने पाठको को पहले यह बता दूं कि शीत युद्ध होता क्या है? इसे अाप अंग्रेजी मे "कोल्ड वार" के नाम से भी जानते है सर्वप्रथम यह युद्ध दि्तीय वि्श्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अाज का रुस अोेर अमेरिका के बीच लडा गया था| यह पारस्पारिक युद्ध से अलग होता जिसमे गोला,बारुद या हथियारो का इस्तेमाल नहि होता बल्कि इसे विचारो का युद्ध कहते है जिसमे लेखको को की कल्म देश का मीडिया एक दूसरे के ऊपर रणनीतीक दबाव बनाते है लेकिन अह्म सवाल यह कि यह युद्ध किस बात को लेकर था| तो जैसा कि अाप सभी जानते है कि दि्तीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अोर अमेरिका दो शक्तिशाली देश थे अार्थिक ओर मिलिट्री दोनो ही क्षेत्रो मे लेकिन यह युद्ध भविष्य के अार्थिक तंत्र को लेकर विश्व मे किस प्रकार के अार्थिक माडल कि दुनिया के दूसरे देश अपनाएंगे एक तरफ था सोशलिस्ट तंत्र जिसकी अगुवाई सोवियत संघ कर रहा था दूसरी तरफ था निजिकरण प्रावेटिस्ट कैपिटल माडल जिसकी अगुवाई अमेरिका कर रहा था सभी अन्य देश पुरा विश्व दो धडो मे बट चुका था| सोशलिस्ट माडल मे सारी पावर सरकारी विभागो के पास होती है सभी सरकारी विभागो के अह्म निर्णय सरकार लेती है जब कि कैपिटलिस्ट माडल मे विभागो का एकिकरण हो जाता लिबिरलाइजेशन,प्राईवेटाईजेशन,ग्लोबलाईजेशन सरल शब्दो निजिकरण,एकिकरण यह माडल अमेरिका का है| इसी विषय पे दोनो देश अामने-सामने अा गये अोर स्थिति युद्ध तक पहुंच गयी कयू्बा छोटे से तटिय देश पर रुस ने अपनी बैलिस्टिक मिसाईलस टेस्टिंग कि जिस प्रकार चीन ने तिब्बत मे युद्ध अभ्यास किया था| जवाब मे अमेरिका ने भी अपना यु्द्ध पोत कैरिबियन सी मे तैनात कर दिया अोर अंतिम चेतावनी दि कि हम फुल स्केल न्युकलियर वार के लिये तैयार है| लेकिन युद्ध को रोकने के प्रयास से अमेरिका ने एक संदेश रुस को भेजा इसे ना केवल दोनो ही देश अपितु पूरी दुनिया तबाह हो जायेगी जिसके चलते सोवियत संघ ने अपने सैनिक वापिस बुला लेिए अौर एक बहुत बडा संकट टल गया| लेकिन सोवियत संघ अपना ज्यादा खर्च सेना ओर हथियारों पे करता था जिसके चलते वहां पे अार्थिक संकट बढता चला गया,बेरोजगारी बढती गयी अोर धीरे-धीरे सोवियत संघ टूट कर कई अलग देशों मे बंट गया जिससे यह साबित हो गया कि अमेरिका का एलपीजी माडल भविष्य के लिए ज्यादा त्रेष्ठ है अब एसी ही स्थिति भूटान के डोकलान क्षेत्र को लेकर जिस पे चीन अपना दावा करता है भारत अोर चीन कि है भारत ओर भूटान का संबध इतना गहरा जिस प्रकार अमेरिका अोर क्यूबा के संबध थे| जिसके चलते भारत भूटान को कोई अलग देश नही मानता बल्कि भारतीय सेना ही भूटान कि सीमा सुरक्षा करती है भारत ओर भूटान के लोगो कि किसी विजा कि जरुरत नही पडती दोनो देशो के नागरीक किसी राज्य कि तरह यहां से वहां या वहां से यहां अा जा सकते है| इसी कारण भूटान अोर भारत दोनो कि संप्रभुता को बचाने के लिये भारत ने डोकलाम क्षेत्र पर सख्त कदम उठा वहां पे अपनी सेना तैनात कर दी अोर चीन को सडक बनाने से रोक दिया वहां पर सडक बन जाने से ना केवल भूटान बल्कि चीन भारत ,भूटान, सिकिम्म को जोडने वाले सिलिगुडी कारीडोर तक पहुंच जाएगा |चीन का मीडीया भी रोज भारत पे दबाव बनाने के लिए धमकी देता रहता है लेकिन भारत भी पीछे हटने को तैयार नही अपने रुख पे अडिग है अोर साफ कहा हम भी युद्ध के लिए सज है| जिसको देखते हुए अजित डोभाल चीन दौरे पर गये अोेर बातचीत करी जिसमे चीन भी यह कहने को मजबूर हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतॄत्व मे हिंदोस्तान कि विदेश नीती मजबूत हुई है जिसमे साफ पता चलता है कि दोनो देशो के बीच चल रहा यह शीत युद्ध अागे भी एसे ही जारी रहेगा अोेर विचारो कि गोलीबारी एसे ही जारी ही रहेगी|
Monday, 24 July 2017
नार्थ कोरिया धरती का जिंदा नर्क
नार्थ कोरिया एक एसा देश जो कि अपने अाप मे ही अाज के परिवेश मे किसी बुरे सपने से कम नहि अाज भी वहां पे तनाशाहाअो का राज चलता है| यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि नार्थ कोरिया मे ना तो इंटरनेट है, ना वहां के नागरिक अपनी मर्जी से कही अा जा सकते है, ना ही पहन सकते है, ना ही खा सकते है, ओर ना ही अपने देश मे अपनी मर्जी से अा जा सकते है| वहां पे टेलिविजन पर केवल एक ही चैनल अाता है कुलमिलाके वहां के नागरीकों पर अपनी मर्जी से सांस लेने तक का अधिकार नही है| वहां कि मताएं अपने बच्चो से कहती है कि तुम्हारी अवाज इतनी कम होनी चाहिए कि चूहा भी ना सुन सके कयोंकि यदि हमारे तनाशाह कि तुम्हारे मन मे क्या चल रहा है इस बात कि भनक तक ना लग सके यहि वहां के नागरिकों कि जीवन पद्धति है| वहां केवल किम जोंग जो उनका तानाशाह है उसकि चलती है यहां तक कि यदि वहां का कोई प्रेमी अपने से या तनाशाह कि हरम कि लडकियो से किसी ज्यादा सुंदर लडकी से विवाह करना चाहता है तो उसे पहले किम जोंग के साथ हम्बिसतर होना पडेगा विरोध करने वालो कि वहां पे कोई गिनती नहि है उसे सीधा सजा-ए-मौत दे दी जाती है| अपनी इसी सनक के चलते वहां का तानाशाह अमेरिका जैसे देश को भी युद्ध कि धमकी देता रहता है उसकि सनक इतनी है कि कैमिकल हथियारो बनाने कि अोर फिर उसके जरिये दुनिया को फतह करने कि चाह मन मे पाले हुए है| अपनी सनक के लिये वो अपने मुल्क कि भी बलि दे सकता है | इसी डर के साये मे वहां के लोग अपना जीवन बिताते है जिनके बस मे होता है वो देश छोड दूसरे देशो मे शरणार्थी बने को मजबूर है| जो देश छोङने कि कोशिश मे पकडे जाते है उन्हे मौत कि सजा सुनाई जाती है| वहां के सरकारी अखबार मे भी केवल वो छापा जाता है जो किम जोंग चाहते है स्वतंत्रता जैसे विचारो कि कोई सुनवाई नहि है नार्थ कोरिया अपने-अाप मे एक अविशवशनिय देश है वहां के तानाशाह के किम जोंग के अागे तो हिेटलर भी पानी कम चाय है| एक एेसा देश जहां अाप अपनी मर्जी से जा सकते है लेकिन अा नहि सकते है| अौर विडंबना देखिए हमारा इतना बडा देश है परंतु फिर भी हमारे देश मे हर क्षेत्र मे एसे गद्धार बैठे है कि उनके होने से दुसमनो कि जरुरत नही है अब मै एक विडियो लिंक डालने जा रहा हूं इस विडियो को जरुर देखे ओर खासके वो बुद्धिजिवी जो खाते तो यहां का है लेकिन गुणगान कही का करते यह वीडियो देखने के बाद खुशकिस्मत समझे अपने अाप को जिन्होने यहां पे जन्म लिया है जो भारतीय है भारत माता कि जय बोलने मे हिचकिचाए नहि चाहे कोई भी हो यह देश यहां के लोगो ने बनाया है जिन्हे इसकी कद्र नहि अोेर जरा सोचिए जो लोग अब तक अपने देश कि सहि मायनो मे अाजाद कराने के लिए संघर्ष कर रहे है कयोंकि उन लोगो से यदि पूछेंगे कि जीवन मे सबसे बडा पाप कौन सा है तो उनका जवाब होगा देश से गद्धारी उनके लिये देश से गद्धारी का अर्थ है भगवान,खुदा उस उपर वाले से गद्धारी वो उपरवाला भी इस पाप को माफ नहि करता| एसा क्यों वो अाप इस विडियो को देखकर समझ जाएंगे वन यंग वर्लड नाम कि संस्था के अाप फेसबुक अोर युटयुब पे जुड के इसे ्ओर ज्यादा से ज्यादा अपना समर्थन दे ओर लोगो को जागरुक करे
Monday, 17 July 2017
बीसीसीअाई ने खेल को खेल नही बल्कि एक धंधा बना के रख दिया है
पिछले कुछ महीनो से कोहली अोर कोच अनिल कुंबले के बीच चली अा रही खींच-तान अाखिरकार थम ही गई| रवि शास्त्री के मुख्य कोच के चयन ने एक बार फिर जाहिर कर दिया कि क्रिकेट मे चयनकर्ताओ से ज्यादा कप्तान कि चलती है| उस कि पसंद ओर नापसंद का ख्याल सर्वोपरी है| वैसे ताजुब कि बात तो यह है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रकेट र्बाड होने के बावजूद कप्तान अोर कोच के बीच जो संघर्ष देखने को मिला वो तो शायद ग्रेग चैपल के दौर मे भी नहि मिला साथ ही राहुल द्रविड ओर जहीर खान के चयन से गांगुली अोर शास्त्री के बीच कि जो गहमा-गहमी है वो भी जग जाहिर हो गई वीरेंद्र सहवाग के दौड मे पिछड जाने के बाद दादा ने दिखा दिया कि क्यों उन्हे इस खेल का दादा कहा जाता है| लेकिन दुखद बात यह है कि अनिल कुंबले के इतने सफल कार्यकाल के बाद भी उनको इसतीफे के लिये मजबूर होना पडा जो यह दिखाता है कि किस प्रकार इतने वर्षो मे क्रिकेट का राजनितीकरण हुअा है| क्यो बीसीसीअाई र्कोट अोर लोढा कमेटी कि सिफारिशो को लागु करने मे अब तक नाकाम रहि है| बीसीसीअाई ने खेल को एक धंधा बना दिया है तभी तो खिलडीयों कि इतनी भारी अामदनी के बावजूद भी मैच फिक्सिंग,कैच फिक्सिंग अाईपीएल के फिक्सिंग कान्ड ने ना केवल खेल बल्कि खेलप्रेमियो कि भावनाओ को भी झंकझोर के रख दिया है| इस खेल के प्रति लोगो मे वो भावना नहि रहि जो पहले किसी जमाने मे हु्अा करती थी| तभी अाप लोगो को यह कहते सुनते होंगे कि यह मैच या ये खिलाडी बिक चुका है अोर कइ बार जब सट्टेबाज अोर बुकिज पकडे जाते है तब इन बातो को ओर बल मिलता है| अाज भारतीय क्रिकेट कि यह जो स्थिति है उसका कारण है कि एक खेल के प्रति इतनी जनभावनाये लोगो कि जिसने इस खेल को धर्म कि तरह देखा जाने लगा जिसका सबसे बडा नुकसान हमारे देश को यह हुअा है कि दूसरे खेलो को वो सम्मान प्राप्त नहि हुअा जो कि उन्हे होना चाहिए था यहां तक कि हमारा राष्ट्रिय खेल हाकी मे भारत कितना पिछड गया अथलिट मे तो मिलखा सिंह अोर पीटी उषा के बाद कोइ उस स्तर का धावक नहि मिल पाया जिसका परिणाम हम हर साल ओलंमपिक जैसी प्रतियोगिताओ मे देखने को मिलता है जब देश को यह सुने को मिलता है कि इतनी बडि जनसंखया वाले देश मे खिलाडि पैदा नहि होते लेकिन उन्हे कौन बताए कि क्रिकेट मे भारत जितना पैसा खर्च करता उसका अाधा भी अन्य खेलो मे लगाया होता तो अाज हमारे देश के खेल का स्तर किसी अौर ही मुकाम पे होता अोर ना ही क्रिकेेट के कारण देश को बद्नामी झेलनी पडती क्योंकि जब सभी खेलो को बराबरी का सम्मान मिलता और बराबर सरकारी सुविधाएं मिलती तो लोग हर खेल को एक सम्मान रवैये से देखते ओर परिणाम यह होता कि केवल क्रिकेट मे ही कयों खेल जगत के हर स्पर्धा मे हिंदोस्तान सफलता कि नई इबादत लिखता जिसका सबसे बडा उदाहरण है अास्ट्रेलिया जिसने विश्व मे सबसे ज्यादा क्रिकेट विश्व कप के खिताब अपने नाम किये है| ओर जभी पांच साल बाद ओलंपिक प्रतियोगिताओ मे टाप पांच देशो मे ही शुमार होता है| जिसका कारण वहां के लोगो का हर खेल के प्रति सम्मान भाव,सम्मान अधिकार ओर युवाओ को अपने पसंदीदा खेलो के प्रति प्रोत्तसाहा्न करना जबकि क्रिकेट मे भी बराबरी का भाव होता तो भी समझ मे अाता जहां एक ओर विराट कोहली कि एक मैच कि अामदनी करोङो मे है वहि अगर अाप इसकी तुलना करे महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज से तो अाप पाएंगे एक ही खेल के दो अलग वर्गो मे कितना बङा अंतर है पिछले अोलकपिंक्स मे एक के बाद एक जिस तरस से पदक कि दौड से हमारे अथलिटस बाहर हो रहे थे जिस समय भारत कि साख का सवाल था उस समय देश कि बेटियो ने ही देश कि इज्जत बचाई थी पीवी सिन्धु,साक्षी मलिक ये वो नाम है जो अभिनव बिंद्रा,जीतू राय जैसे बडे नामो पे भारी पडी थी ओर अभी चल रहे महिला क्रिकेट विश्व कप मे भारतीय टीम सेमीफाईनल मे पहुंच गई है| जबकि पुरुष ओर महिला वर्ग मे एक ही खेल मे सुविधाओ ओर पैसो का कितना भेद-भाव है| हालांकि पिछले कुछ सालो मे कब्ड्ङी,फुटबाल,जैसे खेलो कि अाईपीएल कि तर्ज पे होने वाली घरेलु लीगो का होना अारंभ हुअा है जिसे काफी सुधार देखने को मिला है जो कि एक सराहनीय प्रयास है लेकिन अभी बहुत सुधार करना बाकि है जिसे भविष्य मे चलके देश मे खेल अोर खिलाडी का स्तर और ऊंचा किया जा सके|
Wednesday, 12 July 2017
इस सावन हो जायो तैयार गौरीशंकर करेगे बेडा पार
श्रवण मास के इस शुभ अवसर पर अाज भोले नाथ के सर्गुण स्वरुप के बारे मे कुछ रोचक तथ्य अापको बताते अौर यह अत्यंत शुभ इसलिए भी है कयोंकि इस बार का सावन सोमवार को ही अारंभ अौर सोमवार कि ही समाप्त हो रहा है एसा संयोग 50 वर्षो बाद बन रहा है| वैसे तो शिव एक ओंकार सवरुप है जिनका ना तो कोई रंग,रुप या अाकार है वो पुरुश अोर प्रकॢति स्वरुप है| इसलिये उनकी पूजा शिवलिंग के रुप मे होति है परंतु अपने भक्तो के लिए उस परम परमेश्वर ने स्वंय को पांच भागो अर्थात पांच दिव्य देहो अथवा दिव्य रुपो मे विभाजित किया यहि पांच दिव्य रुप पंच महादेव कहलाते है|जिनकि अराधना शिवरात्री के या अभी चल रहे सावन के पर्व पे शिव भक्तो के लिये अतंयत महत्त्वपूर्ण हो जाति है| अोर यह पंच रुप है गणेश,कार्तिके,नंदी,मां जगदम्बा(पार्वति) अौर भोलेनाथ शंकर अोर इन्ही का पंचाक्षरी मंत्र है ऊं नमः शिवाय जो पंच तत्वो का प्रतीक भी है अग्नि,वायु,जल,धरती,अाकाश यजुर वेद मे इसे ही पंच ब्रह्मा अर्थात कायनाथ का हर स्वरुप के पांच भाग होते है| इसिलिए ही दूसरे धर्मो मे भी संख्या पांच को पाक माना गया है| इसी कारण से यह पाया गया है कि भगवान शिव कि पूजा पांच क्रम या वक्तो मे की जाती है इसी कारण से हमार देश मे शैव ओर शाक्त समप्रदाय के लोग शिव-शक्ति के हर पर्व को बडे नियमा अनुसार जोश के साथ मनाते है पंच महादेव कि पूजा विधि इस प्रकार है|
अाप पांच देवो कि स्थापना करके गंगाजल,गाय का दूध, घी अथवा शहद के साथ थोडा जल मिलाकर जनेयु,रोली,भांग,धतूरा शिवलिंग पे बिल्वपत्र् जरुर चढाये ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप 7,5,108 बार प्रतिदिन करे अापको मानसिक अौर शरिरीक लाभ जरुर मिलेंगे अौर गौरीशंकर सहपरिवार पूजा पारिवारिक समस्याओ सुख,शांति अोर भौतिक सुविधायो के लिये बडि लाभकारी होती है| जिस प्रकार वैश्णव समप्रदाय के लोगो के लिये लक्षमीनारायण कि पूजा होती है ठीक उसी प्रकार गौरीशंकर कि अराधना शैव ओर शाक्त समप्रदाय लोगो के लिये मह्त्त्वपूर्ण मानी जाती है|
Saturday, 8 July 2017
दगाबाज है चीन
चीन वैदिक काल मे प्राचीन अखंड भारत एक अंग हु्या करता था| जिसकी सीमाये मध्य एसिया मेसोपोटामिया तक जब एक ही सनातन सभ्यता पुरे विशव मे थी| चीन के संत भारत नालंदा अोर तक्षिला जैसे महाविद्यालयों मे शिक्षा-दीक्षा लेने अाते थे| लेकिन जैसे-जैसे समय का चक्र बदला अोर युग बीते वैसे-वैसे परिवर्तन अाया अोर फिर कलियुग मे भगवान विष्णु ने अपने नो वे अवतार सिद्धार्थ गौतम जो अागे चलके भगवान गौतम बुद्ध के नाम से विख्यात हुए अोर यहि से बोद्ध धर्म कि स्थापना हुई| इस्लाम अोर इसाई धर्म के अाने से पूर्व दुनिया भर मे बोद्ध धर्म फैला हुया था|अौर चीन को एक सभ्य देश बनाने मे भगवान गौतम बुद्ध के शिष्य बोद्धिधर्मा का बहुत बडा योगदान था|यह वहि संत है जिनहोने भारत से जाकर चाइना मे शाअोलिन मंदिर कि स्थापना कि अोर साथ ही भगवान गौतम बुद्ध द्वारा कलियुग कि दिव्य युद्ध शिक्षा जिसे सारा संसार अाज शअोलिन कंग-फु के नाम से जानता है| वो भारत के ही एक संत बोद्धिधर्मा ही भारत से चाईना लेके गये थे| लेकिन यहि से धोखेबाज या दगाबाज चाईना कि काहानी शुरु होति है जो शायद देश के पहले प्रधानमंत्री चाचा नेहरु या तो जानते नहि थे या फिर किसी बुद्धीजीवी ने इस बात से अवगत कराना जरुरी नहि समझा जिसका परिणाम भारत ने 1962 के युद्ध मे अपना एक राज्य तिब्बत गवां दिया| लोग अाज कहते है कि चाईना ने 1962 मे धोखे से भारत को हराया था मुह पे हिंदी चीनी भाई-भाई कह के पीठ पीछे छुरा घोंप दिया| लेकिन चीन कि तो फितरत ही यहि रही है| उन्होने संत बोधिधर्मा के साथ भी एक षडयंत्र रचा था जी हां दोस्तो जब भारतीय संत चीन यात्रा से अपने वतन वापस अाना चाहते थे| जब तक वो वहां रहे चीन काफी समॢद्ध अोर विकसित देश बन चुका था| उसे भय था यदी बोद्धिधर्मा यहा से चले गये तो चीन से सुख-समॢद्धी अोर साथ ही साथ शअोलिन कंग-फू कि शिक्षा किसी अोर देशों तक ना पहुंचे इसलिेए एक दिन बोधिधर्मा के खाने मे जहर मिलाके उन्हे परोश दिया गया जिसके चलते उनका स्वर्गवाश हो गया| जो संत भारत के ही नहि बल्कि पूरे चाईना के लोगो के गुरु भी थे जो अपने दुर्लभ विद्या के चलते विश्वगुरु बने उसी गुरू कि केवल अपने लाभ के लिये निर्मम हत्या कर दि गयी यह घटना कई चाईनीज लेखक अपने लेखो अोर किताबो मे बता चुके है| लेकिन चीन यह भूल गया कि भारत अनंत काल से सिद्ध संतो,पीरो की भूमि रहा है| लगभग सभी महान संत या पीर भारत मे जन्मे है| या फिर यहां पे अाये है| अोर उनहोने अपना ज्ञान इस धरा के लोगो को दिया है तभी मौजूदा वैज्ञानिक भी मानते है कि भारत कि भूमि सभी धर्मा कि जननी है| ठीक उसी प्रकार बोद्धिधर्मा ने पहले ही अपन विद्या दक्षिण भारत मे दी थी जिसको अाज हम कलायरीपायटू के नाम से केरल समेत पूरे दक्षिण भारत मे मशहूर है शायद एक सिद्ध संत होने के कारण बोधिधर्मा को इस बात का अाभास था कि उनके खिलाफ कोई साजिश रची जायेगी जिसके चलते उन्होने सर्वप्रथम अपने ज्ञान का प्रसार पहले भारत के लोगो के बीच ही किया इसिलिए अाज भी विदेशों से लोग चीन से पहले वो अनोखी युद्ध शिक्षा सिखने दक्षिण भारत के विद्यालयो मे अाते है| इस कहानी का यहि सार हैकि ज्ञान पे किसी एक का अधिकार नहि वो सबके लिये समान है अौर ना ही उसे किसी वस्तु कि तरह बांध के रखा जा सकता है वो पानी कि धारा कि तरह होेता जो निर्मल बहता रहता है| अौर अाज चीन सीमा पर भारतीय सेना द्वारा सख्त रवैये अपनाने पर पंचशील समझोता उल्लंघन कि बात कर रहा है| वो शायद भूल गया 1962 के युद्ध कि शुरुअात करके उसी ने बहुत पहले ही उस संधि कि धज्जियां अपने हाथो से उडा दि थी|
.
Tuesday, 4 July 2017
सत्तर सालों बाद होगा दो दोस्तो का मिलन
प्रधानमंत्री मोदी अाज से तीन दिवसिय इजरायल दौरे पर है| भारत अौर इजरायल के संबध यूं तो वैदिक काल से दोनो सभ्यतायो के इतिहास के प्रमाण मिलते है| जब यहुदीयो पर दुनिया भर मे अत्याचार बढा तब केवल भारत ही एकमात्र एेसा देश था जहां उन्हे शरण मिली अौर यहीं से दोनो देशो के लोगो के बीच का रिशता अोर संवाद इतना गहरा हो गया जिसकी मिसाल अाने वाले लंबे समय तक दुनिया के सामने एक ऊदाहरण बनके चमकेगी|इस रिशते मे सबसे बडा योगदान मूलरुप से भारतीय इजरायलि समाज का है| जिसने अपने देश लोटकर वाकई मे उस कहावत को सत्य साबित कर दिया कि भारत कि मिटी सोना उगलती है| जब दुनिया भर मे शरणार्थी यहुदी अपने नये वतन अाये जिसमे भारत से भी लोग मौजूद थे तो उन्हे अपने रंग के कारण भेदभाव का सामना करना पडा जिसका कारण यूरोप से अाये शरणार्थी थे वो रंग मे गोरे थे| जिस वजह से भारतीय मूल के लोगो के मेन शहर से अलग रेगिस्तानी इलाके मे रहने को कहा गया| परंतु अपनी परिश्रम अोर भारतीय संस्कारों के बल पर भारतीय मूल के लोगो ने रेगिस्तानि इलाके खेती,सब्जीयों कि पैदावार कर कुछ सालों मे उस इलाके को हरे-भरे मैदानों मे बदल दिया| परिणामस्वरुप इनाम के तौर पे अाखिरकार भारतीय मूल के लोगो को भी मुख्य शहरों मे बसने कि अोर समाज के मुख्यधारा से जुडने मे सफलता मिली ओर नये अाधुनिक इजरायल का अपने परिश्रम भारतीय संस्कारो के चलते देश का अभिन्न अंग बन गये| इसी गहरे संबध के चलते इजरायल ने बिना परिणाम कि चिंता करते हुए 1965,1971 भारत-पाक के जंगो मे प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष सदैव भारत कि सहायता कि अोर अंतराष्ट्रीय स्तर पर चाहे स्थिति भारत के अनकूल रही हो या प्रतिकूल सदैव हर मोर्चे पे भारत का पक्ष लिया| वैदिक काल के समय के वजह से दोनो देशों कि सांस्कॄतिक त्योहारो मे भी संमानताये देखने को मिलती उदाहरण के तोर पे दियों के त्योहार यानी दिपावली को दोनो मुल्कों मे अलग-अलग कारणो से मनाया जाता है| एक नही बल्कि एसे अनेक त्योहार है जिनका इतिहास ओर कारण भले ही अलग हो परंतु मनाने का तरीका बिल्कुल समान है| दोनो देशों कि समस्याएं भी एक जैसी हि है फिर चाहे वो अातंकवाद हो या अांतरीक सुरक्षा महीला सशक्तीकरण ये तमाम वो क्षेत्र है| जहां इजरायल ने महारत हासिल कि है जिनसे भारत बहुत कुछ सीख सकता है|
Friday, 30 December 2016
साइबर सुरक्षा पुख्ता हुए बिना डिजिटल इंडिया का सपना कैसे होगा पूरा
नई दिल्ली/भानु प्रताप: रविवार को यूनियन होम मिनिस्ट्री की वेबसाइट हैक कर ली गयी। जांच के लिए फिलहाल ब्लॉक किया गया। बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान के किसी ग्रुप ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड यानी एनएसजी की वेबसाइट हैक कर ली थी। हैक किए जाने के बाद वेबसाइट पर भारत विरोधी कमेंट पोस्ट कर दिए गए थे। ऐसे में देश को कैशलैस इकॉनमी के चरण में ले जाने से पहले कुछ मुलभूत सुविधाए ऐसी है। जिन पे सुधार करना जरुरी है। जैसे गाँव-गाँव में बिजली की सुविधा दुरुस्त करना। कैशलेस इकॉनमी और ऑनलाइन ट्रांज़ैकशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अंत में सबसे महत्वपूर्ण अपना एक मजबूत स्वदेशी सर्वर प्रणाली बनाना। जिससे भविष्य में कैशलेस ट्रांजैकशन से लोगो को परेशानी न हो और साइबर सुरक्षा पुख्ता हो सके।जैसे-जैसे देश इ-बैंकिंग की और बढ़ेगा वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा से सबंधित समस्याए बढेंगी और जब हमारी अपने देश कि सैन्य गुप्त जानकारियाँ हैक हो जाती है। तो तब क्या होगा जब जनता के खातो में से पैसे गायब होने लगेंगे जैसे मोबाइल में सिम क्लोनिंग के जरिये डाटा हैक हो जाता है। परिणाम स्वरूप जनता बहुत जल्दी इस व्यवस्था पे से अपना भरोसा खो बैठेगी। इसलिए जरुरी है की डीऐनस सर्वर वायरस और ऐसे ही घातक वायरसों से सुरक्षाहेतु एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। भारत जैसे आईटी हब कहे जाने वाले मुल्कों के लिए यह मुश्किल नही होना चाहिए। और वैसे भी इसे हम इंटरनेट कन्टेंट पे भी काबू पा सकते है। क्या दिखाना है और कितना इस पे नियंत्रण पाया जा सकता है। क्योंकि कही ऐसा ना हो जाए की विज्ञान के इस युग में हमारे देश का हाल भी कुछ-कुछ टर्मिनेटर फ़िल्म जैसा हो जाए जिसमें हमे लगता है की विज्ञान हमारा गुलाम है।लेकिन स्थिति विपरीत होने में समय नही लगता की पता चले हम विज्ञान के गुलाम हो गए है। कैशलैस अर्थव्यवस्था जिन विकसित देशो में मौजूद है। उन देशो का अध्यन्न करना होगा और यह भी समझना होगा। की उन्हें अब और पहले किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ताकि हम उनसे सबक लेकर और सीख लेकरअपने देश में लागु करे। डिजिटल इंडिया बनाना तो इन सभी चुनौतियों से निपटना जरुरी है। जिससे केवल डिजिटल इंडिया नही बल्कि सुरक्षित डिजिटल इंडिया बने ऐसी व्यवस्था का विकास हो कि तमाम विकसित देशों के सामने एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत हो सके
Saturday, 3 December 2016
नोटबंदी से सरकार ने किये तीन शिकार यानी एक अनार तीन बीमार
नोटबंदी प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम है। कालेधन,आतंकवाद,और देश कि अर्थव्यवस्था में बढ़ते जाली नोटों के खिलाफ जिससे जनता को थोड़ी परेशानी तो हो रही है। लेकिन लोग इसके लिए तैयार है। क्योंकि लोग जानते है की कल देश के लेट जाने से अच्छा है। की देश आज लाइन में खड़ा हो जाए और वैसे भी जब हम सब वोट डालने के लिए, अस्पतालों में इलाज के लिए, और जिओ सिम के लिए लाइन में खड़े हो सकते है। तो मुल्क के लिए क्या बुराई है। इसी बीच लेकिन देश की जनता के मन में कई ऐसे सवाल भी है। जैसे क्या इस कदम से देश में कालधन ख़तम हो जाएगा? क्या बाद में कालाधन पैदा नही होगा? क्या कालाबाज़ारी रुक जायेगी? और इत्यादि। अभी हाल ही में आयकर संसोधन बिल में कुछ बदलावों के साथ लोकसभा में पारित हो गया। जिसके चलते अघोषित आय पर 50 फीसदी टैक्स लगेगा। लेकिन इसने जनता के मन में कई सवाल पैदा कर दिए जैसे की कहीं इस फैसले से सरकार ने कालधन रखने वालो के लिए एक सुगम रास्ता तो नही दे दिया। या विपक्ष यह पूछ रहा है। की जब यही करना था। तो इतने बड़ा ड्रामा करने की क्या जरुरत थी? खैर विपक्ष का तो काम ही यही है। विपक्ष अपना विपक्षी धर्म अच्छे से निभारा है और पूरी कोशिश कर रहा है। की लोग सरकार के खिलाफ सड़को पे उतर आये हंगामा करे और किसी तरह यह फैसला प्रधानमन्त्री वापिस ले। फिर चाहे उसके लिए भारत बंद करने का प्रयास ही क्यों ना हो। प्रयास तो विफल हो गया। लेकिन भड़ास निकालने के लिए सदन की कार्यवाही हर दिन स्थगित हो रही है। जिसमे ना जाने रोज़ाना कितने ही हज़ारों, लाखों रुपयो का नुक्सान हो रहा है। लेकिन कोई यह नही समझ रहा की इस निर्णय के पीछे सरकार का असली मकसद क्या है। दरसल सरकार का मकसद यह नही की देश का सारा कालाधन ख़तम या बर्बाद हो जाए बल्कि यह जितनी ज़्यादा हो सके यह काली अघोषित आये बैंक खातों तक पहुँच जाए और साथ ही देश भविष्य में कैशलेस अर्थव्यवस्था की और कदम बढ़ाये। और कालाधन सामने आ जाये इसी कारण सरकार ने 50 फीसदी के प्रवाधान के साथ आयकर संधोधन बिल पास किया ताकि यह कालाधन जितना हो सके देश के विकास में काम आये अब उन सवालों का जवाब की इससे कलाधन ख़तम होगा या नही? आतंकवाद पे रोक लगेगी या नही? लेकिन इससे पहले यह समझना होगा की इन सब परेशानियों का मूल कारण क्या था? दरसल इससे पहले भारत अपनी करेंसी छापने के लिए जिस काग़ज का प्रयोग करता था वो बाहर से आता था। और वो जिस देश से आता था। उसी देश से पडोशी देश ने भी समझौता कर लिया और जाली इंडियन करेंसी छापने लगा। जिसे यह सारी दिकत्ते पैदा हुई और मौजूदा सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। और नए नोट छापने के लिए अत्याधुनिक कागज़ और स्याही का इस्तेमाल करना पड़ा। जिसकी बारीकियों को समझना और नकल करना मुश्किल है। सरकार के इस फैसले से कालाधन पैदा होना समाप्त तो नही होगा। लेकिन कम जरूर हो जाएगा और और देश के ट्रांसैक्शन प्रणाली में पारदर्शिता आजायेगी और देश डिजिटल ट्रांसैक्शन और प्लास्टिक मनी की लिए प्रेरित होगा।
Tuesday, 18 October 2016
एक तरफ है सुप्रीम कोर्ट की हूंकार दूसरी तरफ मुस्लिम लॉ बोर्ड का अहंकार
मुस्लिम महिलाओ की कोशिश रंग लाइ और देश की उच्च अदालत ने तीन तलाक के मामले पे सुनवाई करने का निर्णय लिया | और धर्म कि आड़ में तीन तलाक़ के नाम पर मुस्लिम महिलओं के साथ हो रहे शोषण को बड़ी सख्ती के साथ उजागर किया| लेकिन यह काम अगर पहले हो जाता तो आज हालात कुछ और होते बरहाल
अजीब विडंबना जब कुछ लोग यह कहते है| इस्लाम में महिलओं को उनका हक जैसी कोई बात लिखी नही है हालांकि मैं इस्लाम का इतना बड़ा कोई ज्ञाता तो हूँ नही यह तो हमारे देश के मौलवी जानते होंगे लेकिन ऐसा हो
नही सकता की कोई मजहब भेदभाव की अनुमति देता हो| यह जरुर हो सकता है की कुछ लोग व्यतिगत फायदे के लिए धर्म के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करे और उसे ही कानून बना दे| जैसा की इस वक़्त देश का मुस्लिम लॉ बोर्ड करने की कोशिश कर रहा है| जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा मुल्क के मुस्लिम समाज को ही हुआ है| जहाँ एक और आजादी की लड़ाई मुस्लिम महिलओं कि भागीद्दारी अधिक थी| उन्होंने बढ़-चढ़कर अपने विचार व्यक्त किये वो आज कहाँ पिछड गयी ? इतना ही नही कुछ ताज़ा सर्व के मुताबिक देश में साक्षरता और पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए है| यहाँ तक की पिछड़े समाज अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति आदि से भी पिछड़े| यहाँ तक की कुछ राज्यों में आरक्षण मिलने के बाद भी मुस्लिम भाई-बहन भी उसका पूरा फयादा नही उठा पाते| जिसके चलते वो ऐसे अब व्यवस्था को भी दोष नही दे सकते| क्यूंकि व्यवस्था तो उन्हें अवसर दे रही है लेकिन वो मौको का लाभ नही ले पा रहे तो इसमें सरकार का क्या दोष| दुसरे धर्मो में भी पहले ऐसी कुछ प्रथाए प्रचलित थी| जो समय के साथ कुप्रथा बन गयी और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे सती प्रथा,बाल-विवाह इत्यादि यदि हिन्दू लॉ बोर्ड भी इन पर अडिग हो जाता तो शायद देश महिलओं के अवस्था और भी बुरी हो जाती| क्यूंकि भगवान् श्री कृषण ने कहा है| कि समय परिवर्तनशील है| मनुष्य को समय के अनुसार आचरण करना चाहिए अर्थात वक़्त के साथ अपने जीवन में बदलाव लाना जरुरी है| जो मनुष्य ऐसा नही करते वो तबाह हो जाते अर्थात उनका जीवन नष्ट हो जाता है| यहाँ पे मैंने श्रीकृषण का उदाहरण इसलिए दिया है| क्यूंकि इस्लाम के कुछ सूफी संतो का मनान है की मुहम्मद पैगंबर आखरी पैगंबर थे| उनसे पहले बाकी धर्मो में बहुत से पैगंबर हुए है| जैसे जीसस.कृषण.मोसेस आदि| यदि मुस्लिम महिलाये अपने हक चाहती है| और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से निवारण चाहती है| जो इस्लाम ने नही बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बनाई है| तो उनको अपने समाज के लोगो को जागरूक करना होगा तभी बदलाव भी आएगा क्यूंकि मक्का-मदीना जहाँ से इस्लाम कि शुरुआत हुई यानी सऊदी अरब समेत 21 मुसलमान देशो में भी तीन तलाक जैस कोई सिस्टम नही है|
अजीब विडंबना जब कुछ लोग यह कहते है| इस्लाम में महिलओं को उनका हक जैसी कोई बात लिखी नही है हालांकि मैं इस्लाम का इतना बड़ा कोई ज्ञाता तो हूँ नही यह तो हमारे देश के मौलवी जानते होंगे लेकिन ऐसा हो
नही सकता की कोई मजहब भेदभाव की अनुमति देता हो| यह जरुर हो सकता है की कुछ लोग व्यतिगत फायदे के लिए धर्म के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करे और उसे ही कानून बना दे| जैसा की इस वक़्त देश का मुस्लिम लॉ बोर्ड करने की कोशिश कर रहा है| जिसका नुकसान सबसे ज़्यादा मुल्क के मुस्लिम समाज को ही हुआ है| जहाँ एक और आजादी की लड़ाई मुस्लिम महिलओं कि भागीद्दारी अधिक थी| उन्होंने बढ़-चढ़कर अपने विचार व्यक्त किये वो आज कहाँ पिछड गयी ? इतना ही नही कुछ ताज़ा सर्व के मुताबिक देश में साक्षरता और पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए है| यहाँ तक की पिछड़े समाज अनुसूचित जाती अनुसूचित जनजाति आदि से भी पिछड़े| यहाँ तक की कुछ राज्यों में आरक्षण मिलने के बाद भी मुस्लिम भाई-बहन भी उसका पूरा फयादा नही उठा पाते| जिसके चलते वो ऐसे अब व्यवस्था को भी दोष नही दे सकते| क्यूंकि व्यवस्था तो उन्हें अवसर दे रही है लेकिन वो मौको का लाभ नही ले पा रहे तो इसमें सरकार का क्या दोष| दुसरे धर्मो में भी पहले ऐसी कुछ प्रथाए प्रचलित थी| जो समय के साथ कुप्रथा बन गयी और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे सती प्रथा,बाल-विवाह इत्यादि यदि हिन्दू लॉ बोर्ड भी इन पर अडिग हो जाता तो शायद देश महिलओं के अवस्था और भी बुरी हो जाती| क्यूंकि भगवान् श्री कृषण ने कहा है| कि समय परिवर्तनशील है| मनुष्य को समय के अनुसार आचरण करना चाहिए अर्थात वक़्त के साथ अपने जीवन में बदलाव लाना जरुरी है| जो मनुष्य ऐसा नही करते वो तबाह हो जाते अर्थात उनका जीवन नष्ट हो जाता है| यहाँ पे मैंने श्रीकृषण का उदाहरण इसलिए दिया है| क्यूंकि इस्लाम के कुछ सूफी संतो का मनान है की मुहम्मद पैगंबर आखरी पैगंबर थे| उनसे पहले बाकी धर्मो में बहुत से पैगंबर हुए है| जैसे जीसस.कृषण.मोसेस आदि| यदि मुस्लिम महिलाये अपने हक चाहती है| और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से निवारण चाहती है| जो इस्लाम ने नही बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बनाई है| तो उनको अपने समाज के लोगो को जागरूक करना होगा तभी बदलाव भी आएगा क्यूंकि मक्का-मदीना जहाँ से इस्लाम कि शुरुआत हुई यानी सऊदी अरब समेत 21 मुसलमान देशो में भी तीन तलाक जैस कोई सिस्टम नही है|
Saturday, 24 September 2016
पाकिस्तान को पहले मानो की है वो आतंकिस्तान वही होगी वीर सपूतो को सच्ची श्रधांजलि
उरी हमले के बाद देश गुस्से में है ज़्यादातर लोग आपको यह कहते मिलेंगे की भारत को पाकिस्तान पे हमला कर देना चाहिए या फिर युद्ध छेड देना चाहिए आर -पार की लडाई होनी चाहिए | मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ | वह भावुक हो कर यह कह रहे| शहीदों के परिवारों पर क्या गुजर रही है| उस दर्द कों भले ही मैं अनुभव ना कर पायूं| लेकिन मेरा ऐसा मानना है की जो लोग परमाणु या फिर आर-पार की लड़ाई इस तरह की जो बाते करते है| वो एक बार दोबारा विचार जरुर करे क्यूंकि ऐसी अवस्था में वो लोग जाने-अनजाने में अपनी ना जाने कितनी ही पीढियों को एक अंधकार से भरे भविष्य की और धकेल रहे है| हिरोशिमा और नागासाकी पे जब एटम बम गिराए गये तब से लेके आजतक वहां पे जो बच्चे पैदा होते है| वो किसी ना किसी शारीरिक विकृति से ग्रस्त है| इतनी दूर क्या जाना भोपाल गैस त्रासदी के बारे में तो सब ने सुना ही होगा| जरा वो लोग जो परमाणु युद्ध को सही मानते है| जाके देखे की भोपाल हादसे के इतने साल बाद भी वहां पे जो पैदा हो रहे है| वो कितने ही प्रकार की शारीरिक रोगों अथवा विकृतियों का शिकार है| भले ही एटमी जंग की सूरत में पाकिस्तान का नामो-निशान क्यों ना मिट जाए लेकिन भारत का भी कोई कम नुक्सान नही होगा| और वैसे भी हिन्दुस्तान पहले परमाणु हमला नही करने के वायदे के बंधन में है| तो इन सब स्थितियों को देखते हुए मेरा नज़रिया यह है की परमाणु बम अंतिम विकल्प हो सकता है| लेकिन सिर्फ एक विकल्प नही हो सकता| तो ऐसे में वो कौन से तरीके है जिसे आतंकिस्तान को सबक भी सिखाया जा सके और देश पे भी कोई बड़ी मुसीबत ना आये| यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे तो ऐसे कई तरीके है| लेकिन पहले हमारे मुल्क की सरकारे हमारे नेता आतंकिस्तान पे कोई बड़ा फैसला या पक्ष तो रखे| हर देशवासी की तरफ से मैं यह सवाल पूछना चाहता हूँ| की 70 सालो बाद भी हम यह तय नही कर पा रहे की आतंकिस्तान हमारा दुश्मन है या नही? उल्टा हमने पकिस्तान को सबसे प्रिय मुल्क का दर्जा दे रखा है| यही कारण है की भारत के और उनके राजनेताओं के दौहरे रवैये के चलते अंतराष्ट्रीय
समुदाय पापिस्तान पे कोई भी कड़ी कारवाही करने से पहले दो बार सोचता है|और हिन्दुस्तान द्वारा सैकड़ो बार आतंकिस्तान को बेनक़ाब करने के बावजूद पाकिस्तान को अंतरास्ट्रीय समुदाय की आँखों में धुल झोकने का मौका मिल जाता है| मैं यह कतई नही कह रहा है की राजनेता या सरकारे भ्रस्ट है| कुछ भ्रस्ट हो सकते है| लेकिन ज़्यादातर ठीक-ठाक अच्छे लोग भी है| परंतु खोट हमारी पाक नीति में है| क्यूंकि मैंने देखा है की सभी सरकारों में पाकिस्तान को लेकर बड़ी उलझन रहती है| की पाकिस्तान से रिश्ते सुधारे जाए या नही और जितनी बार भी हमने रिश्ते सुधारने की कोशिश करी पडोशी ने उतनी ही बार पीठ में छुरा घोंप दिया| अजीब विडंबना है की जहाँ एक और हमारा देश पाक-नीति को लेकर उलझन में रहता है| वंही अमेरिकी संसद में पकिस्तान को आतंकिस्तान घोषित करने के लिए विधेयक पेश कर दिया जाता है| और यूरोपीय संघ भी पापिस्तान के के बलूचिस्तान में पापों को देखकर उन्हें चेतावनी जारी कर देता है| इन मुल्को से सबक लेकर हिन्दुस्तान को भी अपनी पाक-नीति में पारदर्शिता रखनी चाहिए| और जब देशवासी और सरकारे यह मानती है की पाकिस्तान एक दुश्मन मुल्क है| तो उसके साथ वैसा ही व्यवाहार करना चाहिए क्यूंकि पापिस्तान की तरफ से यह साफ़ हो चूका है की वह सुधरने वाला नही है| उसे बात की नही लात की भाषा समझ में आती है| बरहाल मुद्दे से हम भटक रहे यह कुछ वो तरीके जो आतंकिस्तान को बर्बाद कर सकते है| सबसे पहले सभी प्रकार के व्यापारिक,सामरिक और आर्थिक संबंधो का बहिष्कार कर देना चाहिए| क्यूंकि जब हमारे किसान उगाते है तब जाके पाकिस्तान समेत आधी दुनिया का पेट भरता है| हमे अपने दूतावास को अतंकिस्तान से वापिस बुला लेना चाहिए और उनके दूतावास को उनके देश वापिस भेज देना चाहिए यहाँ तक की भारत को आतंकिस्तान के साथ वीज़ा पॉलिसीस को बंद कर देना चाहिए क्यूंकि बड़ी संख्या में पाकिस्तान के लोग अपना इलाज कराने हिन्दुस्तान में आते है| क्यूंकि यहाँ उन्हें बाकी दुनिया से बेहतर सस्ता इलाज पड़ता है| और वैसे भी यह सब कार्य एक प्रक्रिया माने जाते है| जब कोई देश किसी देश को दुश्मन घोषित कर देता है| इन सबसे जो परिणाम निकलेगा वो किसी युद्ध में पाकिस्तान को हराने से भी ज्यादा घातक होगा| जैसे की पाकिस्तान कर्ज में डूबा हुआ देश तमाम मीडिया और बुद्धिजीविओ कि रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 तक पाकिस्तान दिवालिया मुल्क बन सकता है| जहाँ की आधी से ज्यादा आबादी मूलभूत सुविधाओ के लिए तरसती है| तो आप अंदाज़ा लगा सकते है की ऐसे कदम उठाकर पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई जा सकती है| इसका परिणाम यह होगा की जिस तरह का आंदोलन इस वक़्त पाकिस्तान के बलूचिस्तान के प्रांत में चल रहा है| वहां के लोग आतंकिस्तान से अलग होना चाहते है| वैसे आंदोलन बड़े स्तर पे पाकिस्तान के हर सूबे में शुरू हो जायेंगे लोगो का सरकार के प्रति आक्रोश बढेगा आंतरिक गृह युद्ध के हालात होंगे और पाकिस्तान कई टुकडो में बट जाएगा| जिसे पाकिस्तान का वजूद ही दुनिया के नक़्शे से हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है| तो इसलिए मैं अपने सभी देशवासियों से दरख्वास्त करना चाहूंगा की जिस तरह आप सड़को पे निकलकर पाकिस्तान को मुह्तौड़ जवाब देने का सरकार पे दबाव डाल रहे है| ठीक उसी प्रकार पाकिस्तानी कलाकारों और तमाम लोगो जो हिन्दुस्तान में रहकर कमा रहे है| उनकी फिल्मो का उनके गानों का उनकी किताबो का और उनको देश से भगाने के लिए भी आंदोलन करे और सरकार पे दबाव बनाये की आतंकिस्तान से सभी प्रकार के संबंध ख़तम करे यही उन शहीदों को सच्ची श्रधांजलि होगी|
समुदाय पापिस्तान पे कोई भी कड़ी कारवाही करने से पहले दो बार सोचता है|और हिन्दुस्तान द्वारा सैकड़ो बार आतंकिस्तान को बेनक़ाब करने के बावजूद पाकिस्तान को अंतरास्ट्रीय समुदाय की आँखों में धुल झोकने का मौका मिल जाता है| मैं यह कतई नही कह रहा है की राजनेता या सरकारे भ्रस्ट है| कुछ भ्रस्ट हो सकते है| लेकिन ज़्यादातर ठीक-ठाक अच्छे लोग भी है| परंतु खोट हमारी पाक नीति में है| क्यूंकि मैंने देखा है की सभी सरकारों में पाकिस्तान को लेकर बड़ी उलझन रहती है| की पाकिस्तान से रिश्ते सुधारे जाए या नही और जितनी बार भी हमने रिश्ते सुधारने की कोशिश करी पडोशी ने उतनी ही बार पीठ में छुरा घोंप दिया| अजीब विडंबना है की जहाँ एक और हमारा देश पाक-नीति को लेकर उलझन में रहता है| वंही अमेरिकी संसद में पकिस्तान को आतंकिस्तान घोषित करने के लिए विधेयक पेश कर दिया जाता है| और यूरोपीय संघ भी पापिस्तान के के बलूचिस्तान में पापों को देखकर उन्हें चेतावनी जारी कर देता है| इन मुल्को से सबक लेकर हिन्दुस्तान को भी अपनी पाक-नीति में पारदर्शिता रखनी चाहिए| और जब देशवासी और सरकारे यह मानती है की पाकिस्तान एक दुश्मन मुल्क है| तो उसके साथ वैसा ही व्यवाहार करना चाहिए क्यूंकि पापिस्तान की तरफ से यह साफ़ हो चूका है की वह सुधरने वाला नही है| उसे बात की नही लात की भाषा समझ में आती है| बरहाल मुद्दे से हम भटक रहे यह कुछ वो तरीके जो आतंकिस्तान को बर्बाद कर सकते है| सबसे पहले सभी प्रकार के व्यापारिक,सामरिक और आर्थिक संबंधो का बहिष्कार कर देना चाहिए| क्यूंकि जब हमारे किसान उगाते है तब जाके पाकिस्तान समेत आधी दुनिया का पेट भरता है| हमे अपने दूतावास को अतंकिस्तान से वापिस बुला लेना चाहिए और उनके दूतावास को उनके देश वापिस भेज देना चाहिए यहाँ तक की भारत को आतंकिस्तान के साथ वीज़ा पॉलिसीस को बंद कर देना चाहिए क्यूंकि बड़ी संख्या में पाकिस्तान के लोग अपना इलाज कराने हिन्दुस्तान में आते है| क्यूंकि यहाँ उन्हें बाकी दुनिया से बेहतर सस्ता इलाज पड़ता है| और वैसे भी यह सब कार्य एक प्रक्रिया माने जाते है| जब कोई देश किसी देश को दुश्मन घोषित कर देता है| इन सबसे जो परिणाम निकलेगा वो किसी युद्ध में पाकिस्तान को हराने से भी ज्यादा घातक होगा| जैसे की पाकिस्तान कर्ज में डूबा हुआ देश तमाम मीडिया और बुद्धिजीविओ कि रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 तक पाकिस्तान दिवालिया मुल्क बन सकता है| जहाँ की आधी से ज्यादा आबादी मूलभूत सुविधाओ के लिए तरसती है| तो आप अंदाज़ा लगा सकते है की ऐसे कदम उठाकर पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई जा सकती है| इसका परिणाम यह होगा की जिस तरह का आंदोलन इस वक़्त पाकिस्तान के बलूचिस्तान के प्रांत में चल रहा है| वहां के लोग आतंकिस्तान से अलग होना चाहते है| वैसे आंदोलन बड़े स्तर पे पाकिस्तान के हर सूबे में शुरू हो जायेंगे लोगो का सरकार के प्रति आक्रोश बढेगा आंतरिक गृह युद्ध के हालात होंगे और पाकिस्तान कई टुकडो में बट जाएगा| जिसे पाकिस्तान का वजूद ही दुनिया के नक़्शे से हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है| तो इसलिए मैं अपने सभी देशवासियों से दरख्वास्त करना चाहूंगा की जिस तरह आप सड़को पे निकलकर पाकिस्तान को मुह्तौड़ जवाब देने का सरकार पे दबाव डाल रहे है| ठीक उसी प्रकार पाकिस्तानी कलाकारों और तमाम लोगो जो हिन्दुस्तान में रहकर कमा रहे है| उनकी फिल्मो का उनके गानों का उनकी किताबो का और उनको देश से भगाने के लिए भी आंदोलन करे और सरकार पे दबाव बनाये की आतंकिस्तान से सभी प्रकार के संबंध ख़तम करे यही उन शहीदों को सच्ची श्रधांजलि होगी|
जय हिन्द
Sunday, 11 September 2016
पकिस्तान का परमाणु बम ही भविष्य में उसके संपूर्ण विनाश का कारण होगा
उत्तर कोरिया ने पांचवें परमाणु बम के सफल परिक्षण के बाद दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी| क्यूंकि यह अब तक का उनका सबसे घातक बम साबित हुआ है| कोरियाई मीडिया की माने तो हिरोशिमा और नागासाकी वाले से भी ज़्यादा ताकतवर इतना शक्तिशाली की जिसके द्वारा उत्पन्न हुए झटके पडोशी देश जापान और दक्षिण कोरिया में भी महसूस किये गये| यदि कोरियाई दावे सच है| तो पूरी दुनिया के लिए यह एक गहरी चिंता की बात है| क्यूंकि एक ऐसा मुल्क जिसपे तमाम पाबंदिया है| उसके बाद भी वो लगातार ऐसे परीक्षणों को अंजाम दिए जा रहा है| जहाँ का तानाशाह इतना निरंकुश है| की अपनी सनक में वह कुछ भी कर सकता है| तो इस बात की क्या गारंटी हैकि अपनी सनक के चलते वो इन हथियारो का इस्तेमाल या फिर कोई ऐसा कदम ना उठा ले| जिसके चलते ना केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया पे गहन संकट पैदा हो जाए| जिसका जिम्मेवार केवल और केवल पाकिस्तान है| क्यूंकि यह बात किसी से गुपि-छुपी नही है| की उत्तर कोरिया को ये टेक्नोलॉजी पाकिस्तान ने मुहैया करायी है| यह कहना बिलकुल गलत नही होगा की पाकिस्तान बना तो धर्म के नाम पे था| लेकिन चल रहा एटम बम के ऊपर है| वो एटम बम के नाम पर दुनिया को डराता है| एटम बम के नाम पर ही विदेशो से भीख मांगता है| और इसी से उसकी आर्थिक व्यवस्था भी चल रही है| यानी पाकिस्तान को इस बात का एह्शास ही नही है की यह परमाणु बम उनकी अवाम का खून चूस रहा है| और उन्हें धीरे-धीरे शीत मृत्यु की और ले जा रहा है| यह ऐसी अवस्था होती है| जिसमे मौत कब हो जाती है| पता ही नही चलता यानी मुल्क अंदर से खोकला हो जाता है| अच्छा यह तो हुआ पहला पहलु दूसरा पहलु यह है की एक नामी-ग्रामी विदेशी अखबार के मुताबिक इस वक्त पाकिस्तान के पास भारत से भी अधिक परमाणु हथियार है| और वो हर साल अपने इस प्रोग्राम को बड़ी मात्रा बढ़ा रहा है| वो अपने न्यूक्लियर अड्डो को पुख्ता सुरक्षा दे तो पा रहा है| लेकिन उसकी
सुरक्षा अभेद नही है| अखबार की इस दलील के बाद मेरा नज़रिया यह है की पाकिस्तान भले ही कितनी भी उत्तम सुरक्षा क्यों ना मुहैया करा रहा हो| लेकिन इससे उसे दोतरफा नुक्सान ही हो रहा है| पहला हर बढ़ते परमाणु परियोजना के साथ नाचाहकर भी पाकिस्तान अपने नागरिको की मूलभूत सुख-सुविधाओं के साथ जों हर नागरिक का अधिकार होती है| उनके साथ समझौता कर रहा है| क्यूंकि पुरानी कहावत है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है| दूसरा यह है की यदि पाकिस्तान ऐसे ही अपनी परियोजना में विस्तार करता रहा तो एक वक़्त ऐसा आयेगा की अधिकतम सीमा के बाद वो सुरक्षा मुहैया करने में असक्षम होगा| जिसे आतंकवादियों के हाथ इस तक पहुँचने आसान हो जायेंगे| और यदि ऐसा हुआ तो ना चाहकर भी समस्त दुनिया को पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कारवाही करनी ही पड़ेगी जिसे पाकिस्तान का वजूद भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है|
सुरक्षा अभेद नही है| अखबार की इस दलील के बाद मेरा नज़रिया यह है की पाकिस्तान भले ही कितनी भी उत्तम सुरक्षा क्यों ना मुहैया करा रहा हो| लेकिन इससे उसे दोतरफा नुक्सान ही हो रहा है| पहला हर बढ़ते परमाणु परियोजना के साथ नाचाहकर भी पाकिस्तान अपने नागरिको की मूलभूत सुख-सुविधाओं के साथ जों हर नागरिक का अधिकार होती है| उनके साथ समझौता कर रहा है| क्यूंकि पुरानी कहावत है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है| दूसरा यह है की यदि पाकिस्तान ऐसे ही अपनी परियोजना में विस्तार करता रहा तो एक वक़्त ऐसा आयेगा की अधिकतम सीमा के बाद वो सुरक्षा मुहैया करने में असक्षम होगा| जिसे आतंकवादियों के हाथ इस तक पहुँचने आसान हो जायेंगे| और यदि ऐसा हुआ तो ना चाहकर भी समस्त दुनिया को पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कारवाही करनी ही पड़ेगी जिसे पाकिस्तान का वजूद भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है|
Monday, 5 September 2016
चीन पर पाकिस्तानी संगति का असर हो रहा है
पडोसी देश चीन धीरे-धीरे अपने आदर्शो को भुलाता जा रहा है| सुपर पॉवर की लत ने उसे इतना अंधा कर दिया है| धीरे-धीरे विश्वभर में अपने प्रति कांटे बो रहा है| आप सब समझ ही गए होंगे मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ | हालिया जी-20 शिखर समेलन्न में चीनी अधिकारियों ने अमेरिकी पत्रकारों के साथ जिस प्रकार का दुर्वयवहार किया है| उस पे सारी दनिया थू-थू कर रही है| हुआ कुछ यूँ की शिखर समेलन्न में शामिल होने के लिए अमेरिकी प्रेसिडेंट का जहाज जैसे ही लैंड किया| कुछ पत्रकारों ने प्रेसिडेंट का इंटरव्यू लेने के लिए बैरीकैडिंग तोडकर आगे आ गए| जिस पर चीनी अधिकारी चिलाकर ऐसे टूटकर पड़े जैसे वो बैरीकेडिंग तोड़कर नही उनके देश का बॉर्डर तोड़कर घुस आये हो| गरमा-गर्मी इतनी बढ़ गयी की अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार के दखल देने पर चीनी अधिकारी चिलाकर बोले यह हमारा मुल्क है| आप ही बताइए यह किस प्रकार का व्यवहार है? मेरा मतलब यह की जनाब देश आपक का हो सकता है| लेकिन मीटिंग तो अन्तराष्ट्रीय है| और वैसे भी पत्रकारिता में पत्रकारों के बीच होड़ लगी रहती है| कौन सबसे पहले जाकर इंटरव्यू ले या इवेंट कवर करे| ऐसे में दो-चार पत्रकार आगे आभी गए तो कौन सा ऐसा गुनाह कर दिया? अरे भाई उनका प्रेसिडेंट आया है| अपने प्रेसिडेंट की तस्वीर या इंटरव्यू नही लेंगे तो किसकी लेंगे? ऐसे में उनके साथ इतना कठोर बर्ताव सही नही है| यह दिखाता है की चीन में आने वाले मेहमानों के प्रति किस प्रकार का भेद-भाव किया जाता है| और यह साबित भी करता है की ज्यादातर पडोशी देश चीन के बारे में जों कहते है| या जों तथ्य दुनिया के सामने लाते है| वो एक दम सच है| शायद उनके लोगो की मानसिकता ही ऐसी है| लेकिन जब यही देश शांति वार्ता के नाम पर दूसरों के महासागरो में जाता है| वहां पे जाकर दखलअंदाजी करने की कोशिश करता है| तब यह मानसिकता कहाँ चली जाती है| यानी तुम दूसरो के यहाँ जाओ तो हम शांति वार्ता के तहत घुमने आये है| लेकिन कोई दूसरा तुम्हारे यहाँ आये तो यह हमारा समुद्र है हमारा देश है| क्यों भाई दादागिरी है क्या? लेकिन इसमें चीन की गलती नही है| क्यूंकि कहते है ना संगति का असर होता है| जैसे पकिस्तान की आवाम में तो इतना नही है| लेकिन वहां के जितने भी सियासतदान, विद्वानों की मानसिकता है की हिन्दुस्तान जों भी नयी डिफेन्स टेक्नोलॉजी बना रहा है| वो सब पाकिस्तान के लिए है| या पाकिस्तान पे ही इस्तेमाल होगी| पकिस्तान के यह दावे सरासर गलत है| नही भाई हम कहाँ और तुम कहाँ हम इतने मुर्ख नही है| की अपनी बर्बादी खुद ही करे हमारे अपने मसले है| नीतियां है| पाकिस्तान की यही मानसिकता धीरे-धीरे चीन में भी आती जा रही है| की अमेरिका साउथ-चाइना सी में जों भी कुछ कर रहा है| वो केवल चीन को भड़काने के लिए चाहे भारत या जापान के साथ मिलकर कोई सैनिकअभ्यास ही क्यूँ ना हो| अरे चीनी भाई-बहनों अंतरास्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्र एक अन्तराष्ट्रीय संपति मानी जाती है| जिसे पे चाहकर भी कोई देश पूर्ण रूप से कब्ज़ा नही कर सकता| और यदि आप ऐसा करने की कोशिश कर रहे है| तो दुनिया भर से आपको विरोध झेलना ही पड़ेगा| अन्तराष्ट्रीय अदालत ने जों फैसला सुनाया है| वो तो माना ही पड़ेगा क्यूंकि वो कानून किसी एक के लिए नही सभी के लिए है| चाहे फिर राज़ी हो या ना हो| और वैसे भी दोस्तों मैं इसे संगति का असर इसलिए भी कह रहा हूँ क्यूंकि जब तक चाइना-पाकिस्तान के इतने गहराने रिश्ते नही थे| तब तक चाइना के प्रति दुनिया भर का नजरिया अलग था| पड़ोशियो से तो विवाद थे| लेकिन अमेरिका या दूसरे देशो से इतने मतभेद नही थे| जितने की अब है| और मौजूदा स्थिति को देख के लगता है की आगे जाके बढ़ेंगे भी क्यूंकि हो सकता है| चाइना को अब ना केवल अमेरिका से बल्कि उसके नाटो मेंबर्स से भी खटास झेलनी पड़ सकती है| यदि ऐसा होता है तो यह चीन के हित में है या नही इसका फैसला में चीनी भाई-बहनों पे छोड़ता हूँ| क्यूंकि कहते है ना समझदार को इशारा काफी इसलिए ही कहते है की संगति अच्छी हो तो विचार भी अच्छे आते है| वंही संगति अच्छी ना हो तो विचार भी दूषित हो जाते है| अच्छी संगति अच्छे भरोशेमंद दोस्तों से आती है| हालांकि मैं जानता हूँ की अन्तराष्ट्रीय कूटनीति में अच्छी संगति और भरोशेमंद जैसी कोई चीज नही होती सभी मुल्क अपने हितों के लिए काम करते है| पर यहाँ पे मेरा इनसे अर्थ है| समझदार कूटनीति से जैसी भारत ने की है| मैं कोई बीजेपी का प्रशंशक नही हूँ लेकिन यहाँ पे भारतीय सरकार और प्रधानमंत्री मोदी तारीफ़ के काबिल है की अमेरिका से नजदीकी के इस दौर में उन्होंने हिन्दुस्तान के सबसे भरोशेमंद देश रूस और इजराइल दोनों के साथ भी अंतरास्ट्रीय संबंध उसी संकल्प और निष्ठा के साथ बरकरार रखे है| जैसे शीत युद्ध के दौरान थे|
Saturday, 20 August 2016
बेटियाँ पड़ी बेटों पे भारी ओलंपिक्स में इस बार बेटियों ने है बाजी मारी
पूरे 12 दिन बाद जी हाँ दोस्तों पूरे 288 घंटे लगे भारत को अपना पहला पदक जीतने में क्यूंकि जिस तरह हर बीते इवेंट के साथ खिलाडी बाहर हो रहे थे| उसे भारत की पदक जीतने की उमीदे भी धुंधली होती जा रही थी| और यह लगभग तय लग रहा था| की पिछले ओलंपिक्स में हिन्दुस्तान जिस पायदान पर था| उसे बचाना भी मुश्किल हो जाएगा| लेकिन भला हो हिन्दुस्तान की बेटी साक्षी का जिन्होंने भारत की पदक तालिका के सूखे को ख़तम किया| और निराशा में आशा की किरण का संचार किया| और उसी आशा को आगे ले जाकर पीवी सिंधु ने स्वर्ण पदक की उमीदो को जिंदा रखा है| हिन्दुस्तान जों उमीदे नरसिंह यादव, अभिनव बिंद्रा, जीतू रॉय जैसे तमाम बड़े खिलाडियों से लगाये बैठा था| वो उमीदे भारत की बेटियों ने पूरी की है| इसी से इन लडकियों ने करार तमाचा जड़ा है| समाज के दूषित मानसिकता वाले उन लोगो को जों बेटियों का पैदा होना अच्छा नही मानते|क्यूंकि इन्होने दिखा दिया की जब बात देश के सम्मान की हो तो बेटियाँ किसी से कम नही| बरहाल इस साल ओलंपिक्स में पहली बार भारत ने अपना सबसे बड़ा दल भेजा | लेकिन बड़े दल का मतलब यह नही की पदकों की संख्या भी ज्यादा हो| सोचा नही था की इतना बड़ा दल होने के बावजूद भी हमारी पदको की संख्या इतनी कम रहेगी| हमसे बढ़िया तो रूस है| जिसके पता नही कितने ही खिलाडी डोपिंग की वजह से बाहर हुए लेकिन पदक तालिका में हमसे काफी आगे है|वो तो भला हो भारत की इन बेटियों का जिन्होंने हिन्दुस्तान और तिरंगे दोनों की ही लाज रख ली| नही तो इतनी संख्या में खिलाडी होने के बावजूद पदकों की संख्या कम होना अपने आप में शर्मसार करने वाली बात है| क्यूंकि यह स्थिति सवाल या निशान खड़ा करती है| की क्यों दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आबादी वाले देश में खिलाडी पैदा नही होते? इसका कारण यह है| की मौजूदा खेल व्यवस्था हमारे देश में खेलो को लेकर बहुत भेद-भाव करती है| जों की साफ़ तौर पे बड़े स्तरों पे देखा जा सकता है| जहाँ एक और क्रिकेट,बैडमिंटन और टेनिस कुछ चुनिंदा खेलों पे कुछ जयादा ही ध्यान दिया जाता है| वंही दूसरी और फुटबॉल,जिमनास्ट और बॉक्सिंग इत्यादि जैसे खेलो के लिए तो कोई व्यवस्था ही नही है| यही कारण है की हिन्दुस्तान को दशको लग जाते है एक मैरीकोम बनाने में सदियाँ बीत जाती है एक दीपा बनाने में तो आप कहेंगे क्या इसका कारण भारत में हुनर की कमी होना है| जिसका जवाब है बिलकुल नही हमारे हिंदुस्तान में प्रतिभा की कोई कमी नही है| और ना ही कमी है| प्रतिभा को पहचाने वालो की लेकिन फिर भी हिंदुस्तान अन्तराष्ट्रीय खेलो में इतना पिछड़ा हुआ है| तो केवल इसलिए की यहाँ पे खिलाडियों की क़द्र ना करनेवालो की उनका शोषण करने वालो की संख्या जयादा है| तभी तो आप लोगो ने सुना भी होगा की यहाँ सिल्वर मैडल विजेता सडको पे झाड़ू लगा रहा है| बर्तन मांझ रहा है| जिस देश में खिलाडियों का यह हाल होगा वो मुल्क क्या पदक जीतेगा हमारे देश में खेल व्यवस्था में इतना घोटाला मौजूद है| की हुनरमंद खिलाडी अपनी गरीबी के चलते बड़े स्तर तक पहुँच ही नही पाता हमारे यहाँ खेल फेडरेशनो में ऐसे लोग बैठे है| जिनका उन खेलो से कोई लेना-देना ही नही है| जों या तो राजनीति से जुड़े है या फिर किसी और फील्ड से वास्ता रखते है| उदहारण एनश्रीनिवासन जों कुछ वक़्त पहले तक बीसीसीआई के चेयरमैन हुआ करते थे| अरे भाई किसी खेल की फेडरेशन में पूर्व खिलाडियों या फिर ऐसे लोगो को तैनात करो जों उस खेल से जुड़े हुए हो या फिर उसे कुछ वास्ता रखते हो| यदि ऐसे लोग जब बड़े पदों पे मौजूद होंगे तो खिलाडी अपने आप ही निकल आयेंगे जिसे युवा पीढ़ी के लिए भी रोल-मॉडल तैयार होंगे और उनका प्रोत्शाहन भी खेलो के प्रति बढेगा इसलिए जरुरी नही की जब पढ़ेगा इंडिया तभी बढेगा इंडिया बल्कि यह भी हो सकता है|की जब खेलेगा इंडिया तभी तो जीतेगा इंडिया|
Sunday, 14 August 2016
देर आये दुरुस्त आये
ना जाने कितनी सरकारे आई और गई| ना जाने कितने ही मौसम बदले| लेकिन कभी भी किसी ने कश्मीर पे एक उचित पक्ष जों रखना चाहिए था| वो नही रखा| यदि प्रधामंत्री ने कश्मीर पे अपना पक्ष रखा है| वह अतुलनीय है| हमे उम्मीद है| की अब इसे पीछे नही हटेंगे| पिछली सरकारे यह काम पहले कर लेती तो शायद दोनों देशो के बीच कश्मीर पे जों विवाद है| वो बहुत पहले ही ख़तम हो गया होता| लेकिन तमाम राजनितिक दलों ने वोटबैंक की राजनीती के चलते| देश की एकता और अखंडता में फूट डालने का काम किया| जिसके फलस्वरूप कश्मीर में अलगावादियों और आतंकी जैसे अराजक तत्वों ने अपने पैर पसार लिए| उसे भारत से अलग करने की नाकाम कोशिशे की और अबतक कर रहा है| जों अब कश्मीरी बहन-भाइयो को बरगला कर जिहाद के नाम पे उनका शोषण कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है| यह देखकर अच्छा लगा की सभी राजनितिक दलों ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर कश्मीर के मुद्दे पे एकसाथ खड़ी हो गयी| इसलिए कहना पड़ेगा की देर आये लेकिन दुरुस्त आये| क्यूंकि यह बात तो समझ के परे थी|मतलब की जब कश्मीर भारत का अखंड अंग है| तो उसे लेकर पाकिस्तान से बात-चित क्या करना करना| यदि बातचीत करनी है| तो पाकिस्तान ने अवैध तरीके से कश्मीर के जिस भाग पर कब्ज़ा कर रखा है| जिसे वह आज़ाद कश्मीर भी कहता है| जों भारत का हिस्सा है| बात तो उस पे होनी चाहिए| इस बात का सबूत तो पडोशी देश खुद ही अपनी नापाक करतूतों से दे चूका है| की आज़ाद कश्मीर भारत का अंग है| जरा आप ही बताइए भाइयो-बहनों कौन सा ऐसा मुल्क है| जों अपने ही राज्य और नागरिको दोनों पे ही बम बरसाता हो| हवाई हमले करवाता है| पाकिस्तान केवल आज़ाद कश्मीर और वहां की भोली-भाली अवाम का इस्तेमाल कर रहा है| आज़ाद कश्मीर की धरती का केवल अपने नापाक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहा है| वहां पे ना जाने अनगिनत तादाद में फ़िदायीन और जेहादी तैयार किये जा रहे है| और मैं यह भी जानता हूँ की ज़्यादातर कश्मीरी भाई-बहन भारत का ही समर्थन करते है| क्यूंकि हर सच्चा कश्मीरी यह जानता है| की जब कश्मीर में सैलाब आया तब यह अलगावादी कहाँ थे| आपदा के समय जब ना जाने कितने ही कश्मीरी भाई-बहनों को बेघर होना पड़ा| तब यह अलगावादी कहाँ थे? क्यों नही मदद करने आये? कहाँ गायब हो गये थे? मुसीबत के समय भारतीय जवानों ने अपनी जान पे खेलकर आप सभी की सहायता करी थी| इसलिए मरे प्रिय कश्मीरी भाइयो-बहनों मेरी आप सब से विनती है| सरकार ने यह जों कदम उठाया इसमें उनका योगदान दे| एक कदम आप बढाइये| दो कदम सरकार बढ़ाएगी| और तीन कदम पूरा हिन्दुस्तान मेरा मतलब है| की 15 अगस्त का मौका है| और मौका है| आप सभी के पास भी की एक साथ सभी अपने घरो में, मस्जिदों में अथवा हर उस जगह जिसे आप उचित मानते है| फेहरा दीजिये तिरंगा और दिखा दिजिये इन मुट्ठीभर देश के गदारो को की चाहे कुछ भी हो जाये एक सच्चा हिन्दुस्तानी अपने मुल्क से ग़द्दारी नही कर सकता| क्यूंकि आप सभी एक मुसलमान,सिख ,हिन्दू,जैन किसी भी धर्म या जाती से क्यों ना हो| लेकिन सबसे पहले एक हिन्दुस्तानी है| और हिन्दुस्तानी होने के नाते देश के प्रति आप सबका कर्त्तव्य सर्प्रथम है| क्यूंकि यह जों आजादी हमे मिली है| इनमे हिन्दू हो या मुसलमान,सिख हो या इसाई ना जाने कितने ही वीरो ने इस आजादी के लिए अपना बलिदान दिया है| इस उमीद में की आगे चलके हम इस धरोहर को संभाल के रख सके| जरा पूछिए अपने आप से| क्या हम उनकी उमीदो पर खरा उतर पा रहे है या नही? मरे सभी भाई-बहनों को 15 अगस्त की हार्दिक शुभकामनाये|
जय हिन्द
Sunday, 7 August 2016
सरकारी विस्विद्यालय बाबुजियों के हवाले
आज मैं आपको दिल्ली विश्विद्यालयों की ऐसी सत्य घटना बतायुंगा जिसे सुनने के बाद हो सकता है| आपके विचार परिवर्तित हो जाए| यह घटना मेरे मित्र के साथ घटी है| वो भी उन्ही हजारों-लाखों बच्चो में से एक है| जो हर साल अलग-अलग राज्यों से आँखों में सपने लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में पढने के उम्मीद से आते है| लेकिन बहुत कम ही होते है| जिनके सपने पूरे हो पाते है| क्यूंकि दिल्ली विस्वविद्यालय में व्याप्त धांधली ना जाने कितने ही बच्चो के सपनो को चकनाचूर कर दिया है| और जो यह कट ऑफ लिस्ट का ड्रामा होता है| यह केवल छात्र और उनके अभीभावको को दिखाने के लिए होता है| बच्चो का एडमिशन उनके मेरिट से नही बल्कि बबुबाजी मेरा मतलब घोटाले से होता है| आप सभी की तरह भी मेरा मित्र भी एडमिशन के लिए आया कट-ऑफ भी आई हुई थी| लेकिन सिर्फ एक ही ऐसी चीज थी| जिसे देख कर उसे एडमिशन नही दिया गया वो था की वह उत्तर प्रदेश(यूपी) बोर्ड से बारहवी की थी| ना जाने कितने ही कॉलेज में गया लेकिन हर कोई या तो परसेंटेज कम बताता या फिर सभी कागज़ात पूरे होने के बाद भी उन में कोई न कोई कमी बता देता और कह देता बेटा अगली कट ऑफ में देखना| लेकिन अब जो बात मैं आपको बतायुंगा उसे जानकार आप को कोई आश्चर्य ना हो क्यूंकि हमारे देश के सिस्टम में घोटाले की दीमक ऐसी लग चुकी है| जो देश को धीरे-धीरे अन्दर से खोकला करती जा रही है| क्यूंकि एक छात्र ऐसा था जो बारहवी में फेल हो चूका था| और इस साल उसकी परसेंट तो थोड़ी अच्छी आई लेकिन इतनी अच्छी नही थी की उसे दिल्ली विस्विद्याल्य में एडमिशन मिल सके| लेकिन उसे एडमिशन कम परसेंट होने के बावजूद भी मिल गया| और किसी ऐसे-वैसे कोर्स में नही बल्कि साइंस के बड़े नामी-ग्रामी कोर्स में| ऐसे कोर्स में जिसमे में एडमिशन के लिए बच्चो की लंबी कतारें लगी रहती है| बरहाल आप यह जान चाहेंगे की उसे एडमिशन मिला कैसे? जी तो बात ऐसी है की डीयु का एक प्रोफ़ेसर जो उसे टूशन पढ़ाते थे| उन्ही की मेहरबानी है| उन्होंने कोई धान्द्लीबाज़ी से एडमिशन करा दिया| यदि आप में से किसी के साथ भी ऐसा हुआ है| तो मुझे जरुर कमेंट बॉक्स में अपना नाम बताये| लेकिन अंत में मित्रो मैं यही कहना चाहूंगा की डीयु अब वैसा नही रहा जैसा की किसी ज़माने में हुआ करता था| और सिर्फ डीयू ही क्यों हर राज्य के सरकारी कॉलेजों का यही हाल है| यही कारण है| की हमारे भारत में कभी किसी ज़माने नालंदा विस्विद्यालय में पढने के विदेशो से बच्चे आया करते थे| आज उनकी जगह तमाम प्राइवेट कॉलेजों ने ले ली है| इसलिए मैं तो अपने अनुभव से आपको यही कहना चाहूँगा की यदि मेरे मित्र की तरह सरकारी विस्विद्यालयों का भूत आपकों भी चढ़ा हो तो एक बार गहराई से जरुर विचार करे|
Saturday, 18 June 2016
मोदी जी की ऐनऐसजी नीती से भविष्य में पड़ने वाले प्रभाव
भारतीय प्रधान मंत्री की विदेश नीती किसी से छुपी नही है| न्यूक्लियर सप्पलायर समूह में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए जो कुछ प्रधानमंत्री कर रहे है| वह अतुलनीय है| इसने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है| की भारतीय प्रधानमंत्री विदेश नीती के रॉकस्टार है| लेकिन आप सबके मन में कई प्रशन होंगे जैसे क्या भारत को स्थायी सदस्यता मिलेगी? क्या यह भारत के लिए सही समय था इस समूह में आवेदन देने के लिए? और इसका भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा|? आइये पहले मैं आपको बताता हूँ की न्यूक्लियर सप्प्लायर ग्रुप है क्या? जो न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी ऐवंम मिसाइल टेक्नोलॉजी को बिना किसी रोक-टोक के उनका आयात और निर्यात कर सकते है| और न्यूक्लियर एनर्जी का इस्तेमाल शान्तिप्रिय कामों के लिए किया जाना इस ग्रुप की प्राथमिकता है| इस ग्रुप के अतिरिक्त कोई अन्य देश यह काम नही कर सकता| बरहाल इस ग्रुप के सामने जो ताज़ा स्थिति उत्पन्न हो रही है| उसके मुताबिक इन्हें भारत के आवेदन पर फैसला लेना है| जिसमे भारत के सामने कई चुनौतियाँ है| पहला तो यह की भारत ने ऐनपीटी पालिसी पे दस्तख़त नही किये है| जिसके दम पर चीन भारत का विरोध कर रहा है| और कह रहा है की ऐसे तो फिर पाकिस्तान को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए| हालांकि भारत के लिए राहात की बात यह है की ऐनपीटी इस ग्रुप में शामिल होने के लिए प्राथमिकता नही है| मौजूदा मेम्बर्स में फ्रांस इसका उदाहरण है| जिसने बिना इस पालिसी पे हस्ताक्षर किये इस समूह का मेम्बर है| अब बड़ा सवाल जो खड़ा होता है| वो यह की क्या भारत को इस समूह में शामिल किया जाए या नही? इस सवाल का जवाब मैं 2 तरीके से दूंगा पहला अकेले केवल भारत को इसकी सदस्यता नही दी जानी चाहिए| उसका कारण यह है कि अगर भारत इसका अकेले मेम्बर बन गया तो भविष्य में गंभीर प्रभाव पड़ेगा क्यूंकि फिर पाकिस्तान गैर कानूनी तरीके से न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी अथवा मिसाइल टेक्नोलॉजी को हासिल करने की कोशिश करेगा| जिसे ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनियां के लिए चिंता बढ़ सकती है| क्यूंकि भारत खुद ही इस बात का समर्थन करता रहा है| की पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी होना ठीक नही है| वो इसलिएकी कि अगर पकिस्तान में पल रहे आतंवाद के हाथ इस तक पहुँच गए तो ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में विनाश का खतरा पैदा हो सकता है| अब जरा आप सोचिये की अगर पाकिस्तान को इस समूह में शामिल नही किया जाता और वह गैर कानूनी तरीके से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को आगे बढ़ाता है| तो साथ ही इसे आतंकवादियों के इस तक पहुँचने का रास्ता और साफ़ हो जाएगा| क्यूंकि जितना ज्यादा पकिस्तान अपने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को बढ़ाएगा तो उस हिस्साब से उसे सुरक्षा प्रदान करना पकिस्तान के लिए और भी मुश्किल होता चला जाएगा| और चिंता के बादल गहराएंगे|
लेकिन अब आप सब यह पूछेंगे की क्या फिर हमारे प्रधानमंत्री ने गलत किया? क्या मौजूदा सरकार का यह फैसला ठीक नही है? तो मरे हिसाब से प्रधानमंत्री ने कुछ भी गलत नही किया वो इसलिए क्यूंकि अगर भारत को अकेले दम पर इस ग्रुप की सदस्यता मिल जाती है तो इसका बहुत बड़ा लाभ ना केवल भारतीय डिफेन्स सेक्टर को होगा बल्कि इसे दुनिया भर में जितने भी छोटे देश है| छोटे देश से मेरा मतलब थर्ड वर्ल्ड कन्ट्रीज के सभी देशो को फायदा होगा| वो इसलिए क्यूंकि भारत ने हमेशा बड़े स्तर पर थर्ड वर्ल्ड कन्ट्रीज के हितो के लिए काम किया है| उनके विकास के लिए भारत ने हमेशा भरपूर सहयोग दिया है| और उनके लीडर के तौर पे पूरी दुनिया में जाना जाता है| तो इस हिसाब से अगर देखा जाए तो भारत को यह सदस्यता मिलनी चाहिए ताकि जिसे वो छोटे देशो की जरूरतों उनके हितो को दुनिया के सामने रख सके और उनका विकास करने में योगदान दे सके जिसे की विश्व भर में संतुलन बना रहे और इंटरनेशनल सोव्रेंनिटी कायम रहे| तो इसलिए देखा जाए तो मैं यह फैसला आप सब पे छोड़ता हूँ की भारत को सदस्यता दी जानी चाहिए या नही| मैंने आपको दोनों नज़रिये बतादिये है| और साथ ही भारतीय प्रधानमंत्री को 24 जून जी हाँ दोस्तों यही तारीख जिस दिन भारत की सदस्यता पर निर्णय लिया जाना है| समस्त भारत वासियों की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी को ढेरो शुभकामनाये देता हूँ |
जय हिन्द|
Subscribe to:
Posts (Atom)







